पुलिस के जवान को 'नायक' समझ कर उसकी तैनाती जहां होती, वहीं नशा तस्करों की मुश्किलें बढ़ जातीं, लेकिन जब सच्चाई सामने आई तो पुलिस भी देखती रह गई।
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कभी इंदरजीत सिंह का गैंगस्टरों में काफी खौफ था । उसकी जहां भी पोस्टिंग होगी, वहां पर एफआईआर की कापी हेरोइन की रिकवरी से भर जाती थी। इंस्पेक्टर इंदरजीत सिंह की अधिकतर तैनाती जालंधर रूरल, जालंधर सिटी, फगवाड़ा, कपूरथला, तरनतारन में रही। तस्करी से जुड़ने के बाद इसकी खासी पकड़ पंजाब के बॉर्डर बेल्ट पर थी। माझा इलाके से होने के कारण इंदरजीत सिंह का नेटवर्क अमृतसर, तरनतारन, मजीठा व बॉर्डर इलाके के गांवों में बना हुआ था। पंजाब में इंदरजीत सिंह के बारे में आम तौर पर कहा जाता था कि वह ड्रग पैंडलर व सप्लाई लाइन तोड़ने में माहिर है। यही वजह थी कि वह कभी पंजाब के कई बड़े आईपीएस की आंख का तारा बना।
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खाकी वर्दी पहल चला रहा था समानांतर ड्रग नेटवर्क
तरनतारन के गांव रामूवाल के शतरपाल सिंह से 25 करोड़ की हेरोइन की बरामदगी हो या फिर जालंधर के हरजिंदर सिंह से 20 करोड़ की हेरोइन की बरामदगी, रिकवरी करने वाला इंस्पेक्टर इंदरजीत सिंह ही था। हालात यह थे कि इंदरजीत सिंह कोे जिस इलाके में तैनात किया जाता, वहां पर अचानक हेरोइन, अफीम व भुक्की की रिकवरी तथा तस्करों की गिरफ्तारी का ग्राफ बढ़ जाता था। जनवरी 2015 में इंस्पेक्टर इंदरजीत सिंह को करतारपुर में बतौर एसएचओ तैनात किया गया था। मई माह तक वहां पर नशे की रिकवरी की बाढ़ आ गयी।
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हालात यह हुए कि पांच माह में करतारपुर में जहां पर नशीले पदार्थों की रिकवरी न के बराबर थी, वहां पर 60 करोड़ की 12 किलो हेरोइन, 41 क्विंटल चूरा पोस्त, दो किलो चरस, पांच किलो स्मैक, एक किलो नशीला पाउडर बरामद किया गया। इसी दौरान सेंट्रल एक्साइज विभाग का अधिकारी गुरदेव सिंह करतारपुर में गिरफ्तार हुआ। दिलचस्प है कि यह रिकवरी उन लोगों से हुई, जिनका करतारपुर से कोई लेना-देना नहीं था। केंद्रीय सीमा शुल्क का अधिकारी गुरदेव सिंह अटारी रेलवे स्टेशन पर तैनात था, जिसको करतारपुर में गिरफ्तार किया गया, जिसके पास से सात किलो हेरोइन व पांच किलो स्मैक बरामद हुई। राजस्थान व मध्य प्रदेश से आने वाली भुक्की के दो ट्रक थे।
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ड्रग्स स्मगलिंग
- फोटो : डेमो फोटो
हालात यह थे कि तत्कालीन मंत्री सरवण सिंह फिल्लौर को कहना पड़ा था कि जब से इंदरजीत सिंह उनके हलके करतारपुर में लगा है, उनका क्षेत्र नशीले पदार्थों के लिए बढ़े स्तर पर नशे के लिए बदनाम हो चुका है। इंदरजीत सिंह को कुछ समय पहले कपूरथला तैनात किया गया तो उसने 9 अप्रैल को 3 किलो अफीम की खेप बरामद कर दो तस्करों को दबोचा। पुलिस अफसरों की मानें तो इंदरजीत सिंह का नेटवर्क काफी नामी तस्करों के साथ बन चुका था। वह बेखौफ होकर उनके साथ कारोबार में लिप्त था। उनके साथ ड्रग की डील करता था। वह एक समानांतर नेटवर्क को चला रहा था।
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- फोटो : Times of India
सिंथेटिक ड्रग नेटवर्क को ध्वस्त कर बना था अफसरों की आंख का तारा :
पंजाब में पहली बार 200 करोड़ के सिंथेटिक ड्रग के नेटवर्क को ध्वस्त करने वाला इंस्पेक्टर इंदरजीत सिंह आज खुद नशे की खेप के साथ सलाखों के पीछे है। पंजाब पुलिस के तमाम अधिकारियों को अपने जिस इंस्पेक्टर पर नाज था, उसकी पहचान आज बदल गई है। जब इंदरजीत सिंह देहाती पुलिस में स्पेशल स्टाफ के इंचार्ज के पद पर तैनात था, तो उसने साल 2013 में राजा कंदोला का नेटवर्क ब्रेक किया था।
इसमें पहली बार 200 करोड़ के सिंथेटिक ड्रग के कारोबार का खुलासा हुआ। इसकी आगे की कड़ी में डीएसपी जगदीश भोला व बिट्टू औलख और चाहल जैसे लोगों के नाम सामने आए। बाद में पंजाब में सिंथेटिक ड्रग कारोबार की परत दर परत खुलती गई। यहां तक कि इसकी आंच तत्कालीन शिअद व भाजपा गठबंधन सरकार तक जा पहुंची।