पंजाब में नशा कारोबार को जड़ से खत्म करने के लिए गठित एसटीएफ को पंजाब पुलिस की मिलीभगत के सुराग मिले हैं।
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सोमवार सुबह एसटीएफ ने नशा तस्करों को संरक्षण देने और उन्हें नशीले पदार्थों की ट्रैफिकिंग में मदद करने के आरोप में पुलिस इंस्पेक्टर इंदरजीत सिंह को गिरफ्तार कर लिया।
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बीते दो माह के दौरान एसटीएफ के लिए यह पहला मौका है जब नशा तस्करी के आरोप में किसी पुलिस कर्मचारी की गिरफ्तारी हुई है। इस संबंध में एसटीएफ प्रमुख हरप्रीत सिंह सिद्धू ने बताया कि इंस्पेक्टर इंदरजीत सिंह का पक्का पद हेडकांस्टेबल का है, लेकिन उसे इंस्पेक्टर का दर्जा दिया हुआ था।
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पुलिस मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में एसटीएफ प्रमुख ने बताया कि इस मामले में डीएसपी जसवंत सिंह को भी राउंडअप किया गया है, जिसने इंदरजीत सिंह को एनडीपीएस के मामलों की जांच, कोर्ट में गवाही आदि का काम सौंपा हुआ था। उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार एनडीपीएस के मामलों की जांच एएसआई रेंक से नीचे कोई कर्मचारी नहीं कर सकता, लेकिन इस मामले में हेडकांस्टेबल को लोकल इंस्पेक्टर को ओहदा देकर एनडीपीएस के 10 केस सौंपे गए थे।
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एसटीएफ ने नजर में यह मामला उस समय जब वर्ष 2013-14 के तीन एनडीपीएस केसों में भारी मात्रा में नशीले पदार्थ जब्त होने के बावजूद उसमें शामिल आरोपी कोर्ट से रिहा हो गए। एसटीएफ ने पाया कि तीनों मामलों में एक जैसा तरीका अपनाया गया और यह तीनों मामले इंस्पेक्टर इंदरजीत सिंह के पास ही थे। उसके अधीन शेष सात मामले अभी पेंडिंग थे।
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- फोटो : Times of India
एडीजीपी सिद्धू ने बताया कि इंदरजीत सिंह पर केस दर्ज करने के बाद उसके दो ठिकानों पर छापे मारे, जिनमें इंदरजीत के एक मकान से विभिन्न बोर के कारतूस, एक अवैध 9 एमएम की पिस्तौल, 16.50 लाख की भारतीय और 3550 पाउंड विदेशी करेंसी बरामद की गई। उसके फगवाड़ा स्थित दूसरे मकान से चार किलो हेरोइन और तीन किलो स्मैक बरामद की गई। एडीजीपी सिद्धू ने बताया कि इंदरजीत तरनतारन में तैनात रहते हुए नशे के कारोबार में लिप्त रहा और उसने नशा तस्करों को अपने एरिया में पूरा संरक्षण दिया।
इंस्पेक्टर इंदरजीत के राजनीतिक कनेक्शन के सवाल पर एडीजीपी ने कोई प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि इंदरजीत को सोमवार सुबह की गिरफ्तार किया गया और उससे पूछताछ चल रही है। उन्होंने कहा कि अब तक इंदरजीत द्वारा जिन एनडीपीएस केसों की जांच के नाम पर अपराधियों को बचकर निकलने दिया, केवल उन्हीं केसों का विश्लेषण किया गया है। उन्होंने बताया कि सरहाली थाने में दर्ज उक्त तीनों केसों में काफी संख्या में आरोपी साफ बच निकले हैं।