पंजाब सरकार ने बड़ा फैसला किया है, जो महिलाओं के लिए अच्छी खबर है। महिलाओं को सरकार 50 प्रतिशत आरक्षण देगी।
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अब नगर पंचायतों से लेकर नगर निगमों तक महिलाओं की ही सरदारी कायम होगी। कांग्रेस ने अपना चुनावी वादा पूरा करते हुए पंचायती राज और स्थानीय निकायों में महिलाओं का आरक्षण 33 से बढ़ा कर पचास फीसदी करने को मंजूरी दे दी है।
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सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई में कैबिनेट की बैठक में पंचायती राज और स्थानीय निकायों में महिलाओं का आरक्षण 33 से बढ़ा कर पचास फीसदी करने को हरी झंडी दे दी गई। बजट सत्र से पहले यह काफी महत्वपूर्ण फैसला है, क्योंकि अगस्त में चार बड़े निगमों समेत कई निकायों के चुनाव होने हैं।
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सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि पंचायती राज एक्ट, पंजाब म्यूनिसिपल एक्ट और पंजाब म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन एक्ट में संशोधन केलिए प्रारूप बिल को एक्ट में तब्दील करने को विधानसभा के बजट सत्र में पेश किया जाएगा। इस फैसले से ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों, जिला परिषदों, नगर निगमों, काउंसिलों और पंचायतों के सदस्यों के चयन में महिलाओं का आरक्षण 50 फीसदी हो जाएगा।
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मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह
ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों में महिलाओं और ज्यादा अधिकार मिलेंगे। आरक्षण केतहत ही महिलाओं का प्रतिनिधित्व सरपंचों, पंचायत समितियों व जिला परिषद चेयरमैन, नगर काउंसिल व नगर पंचायतों के प्रधानों और निगमों के मेयर के पदों में भी होगा।
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कैप्टन अमरिंदर सिंह
- फोटो : File Photo
एक अन्य फैसले के तहत मेगा फूड पार्कों को पंजाब अपार्टमेंट एंड प्रॉपर्टी रेगुलेशन एक्ट की धारा 44(2) के उपबंधों से छूट देने को मंजूरी दी गई। इससे फूड पार्कों के विकास को प्रोत्साहन मिलेगा, नौजवानों को रोजगार मिलेगा। भविष्य में ऐसे प्रोजेक्ट को पापरा एक्ट के तहत लाइसेंस की जरूरत नहीं होगी। कैबिनेट ने खालसा यूनिवर्सिटी (रीपील) ऑर्डिनेंस 2017 को एक्ट में तब्दील करने को बजट सत्र में पेश करने को स्वीकृति दी। यह फैसला एक सदी से ज्यादा पुराने गौरवशाली खालसा कॉलेज की विरासत को बचाने के मद्देनजर किया गया है।
पुराने कर्ज को स्वैप करेगी सरकार
कैबिनेट ने एक और फैसला लेते हुए ज्यादा ब्याज वाले पुराने कर्ज को कम ब्याज वाले नए कर्ज से स्वैप करने को मंजूरी दी है, ताकि राजस्व के नियंत्रण स्रोतों के मद्देनजर वित्तीय प्रबंध को यकीनी बनाया जा सके। गौरतलब है कि काफी सारा पुराना कर्ज ऐसा है, जिस पर ब्याज दर काफी ज्यादा है। जबकि, सरकार को अब कम ब्याज दर वाला कर्ज उपलब्ध है। इसकेलिए केंद्र सरकार से स्वीकृति लेने का फैसला किया गया है। इस फैसले वित्तीय स्थिति में सुधार होगा। वहीं, विकास कार्यों का खर्च उठाने को बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।