शहीद कुलविंदर सिंह के माता-पिता।
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कुलविंदर अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे और 10 दिन की छुट्टी के बाद 11 फरवरी को ही ड्यूटी पर लौटे थे। तीन दिन बाद 14 फरवरी को घर बेटे की शहादत की खबर पहुंची तो पूरा गांव शोक में डूब गया था। बेटे के शहादत के दो साल बाद आज भी रोजाना माता-पिता तस्वीर के सामने प्रणाम करते हैं।