हिंदुस्तान जिंदाबाद.. हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, आपस में सब भाई-भाई... जैसे नारों से वीरवार को सेक्टर-20 स्थित जामा मस्जिद ग्राउंड गूंज रहा था। बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग यहां नागरिकता संशोधन एक्ट (सीएए) के विरोध में एकत्र हुए थे। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने ग्राउंड में विशाल रैली कर इस कानून का विरोध किया और सरकार से इस कानून को वापस लेने की मांग की।
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- फोटो : अमर उजाला
रैली को मुस्लिम नेताओं के अलावा लेफ्ट पार्टियों के नेताओं ने भी संबोधित किया। रैली के बाद मुस्लिम संगठनों की एक 21 सदस्यीय कमेटी ने पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक वीपी सिंह बदनौर को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।जामा मस्जिद सेक्टर-20 के इमाम और खतीब मौलाना अजमल खान ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि आज 19 दिसंबर है। आज ही के दिन पंडित राम प्रसाद बिस्मिल और अशफाकुल्लाह खां का शहीदी दिवस है।
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राम प्रसाद बिस्मिल ब्राह्मण थे और अशफाकुल्लाह खां मुसलमान लेकिन आजादी की लड़ाई में दोनों साथ-साथ थे। अशफाकुल्लाह खां ने राम प्रसाद बिस्मिल को अपना उस्ताद माना था। आजादी की लड़ाई हिंदू-मुसलमान ने साथ-साथ लड़ी और आज भी यह भाईचारा बनाए रखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सीएए देश के लिए ठीक नहीं है। सरकार को इस कानून को बदलना चाहिए। धर्म के आधार पर इस देश में कोई कानून नहीं बनना चाहिए।
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रैली को सेक्टर-26 के नुरानी मस्जिद के मुफ्ती मोहम्मद अनस कासमी, मौलवी इमरान, लेफ्ट के नेताओं में इंद्रजीत सिंह ग्रेवाल, कंवलजीत सिंह, प्रोफेसर मंजीत सिंह, बंत सिंह बराड़, आरएम कश्यप सहित बड़ी संख्या में नेताओं ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया।
रैली के बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों को मार्च करना था लेकिन जामा मस्जिद के ग्राउंड में ही रैली कर मार्च को स्थगित कर दिया गया। इससे पुलिस ने राहत की सांस ली। पुलिस के बड़े अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे। सीएए के विरोध में रैली और गवर्नर हाउस तक मार्च को लेकर पुलिस भी सतर्क रही। बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। सेक्टर 18 और 19 की डिवाइडिंग सड़क में 18 और 19 लाइट प्वाइंट के पास पुलिस ने बैरिकेड कर रखी थी। साथ ही घुड़सवार पुलिस भी तैनात रही।