कृषि कानूनों को रद्द कराने की मांग को लेकर सिंघु बॉर्डर पर बैठे किसानों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। हर रोज लोग अपने ट्रैक्टर-ट्रॉली और बाइक से धरनास्थल पर पहुंच रहे हैं। इन लोगों में महिलाएं, बच्चे और युवक सभी शामिल हैं। सभी एक ही बात कहते हैं कि हक लिए बिना हम नहीं लौटेंगे। सिंघु बॉर्डर पर शुरू हुए आंदोलन में अब केवल किसान नहीं, बल्कि हर वर्ग के लोग शामिल हो रहे हैं।