पठानकोट आतंकी हमले को अंजाम देने से पहले आतंकियों ने 4 घंटे एसपी के दोस्त संग बिताए थे बाद में आतंकी उसके गले पर चाकू मारकर फेंक गए थे। होश में आते ही उसने बयां की आपबीती।
विज्ञापन
4 आतंकियों के बीच बिताए 4 घंटे, देखिए क्या-क्या बोले वो?
2 of 5
जिन लोगों ने हमें अगवा किया, वे लगातार किसी कमांडर साहिब के संपर्क में थे और उसे हर 10 मिनट बाद फोन कर रहे थे। एक आतंकी ने अपने कमांडर को बताया कि इलाका शांत है और वे आसानी से अपने लक्ष्य तक पहुंच जाएंगे। आतंकियों ने यह भी कहा कि हमारा काम इंशाअल्लाह फतेह हो जाएगा। वे ज्यादातर उर्दू में बात कर रहे थे, इसलिए मैं ज्यादा बात समझ नहीं पाया। एक बार शायद वे रास्ता भी भूल गए थे।
विज्ञापन
4 आतंकियों के बीच बिताए 4 घंटे, देखिए क्या-क्या बोले वो?
3 of 5
ड्राइवर ने कहा कि यह ठीक रास्ता नहीं है। इसके बाद आतंकियों ने जीपीएस ऑन किया और कहा कि यह सही रास्ता है क्योंकि हम दरिया के पास पहुंच गए हैं। मैं रात 12 बजे से सुबह 4 बजे तक आरोपियों के कब्जे में था। आतंकियों के पास पिट्ठू बैग थे। उसमें ग्रेनेड वगैरह होंगे। उन्होंने पहले मुझसे 500 रुपये लिए और शुक्रिया किया। कुल मिलाकर उन्होंने मुझसे 2000 रुपये लिए और मेरा पर्स डैशबोर्ड पर रख दिया।
4 आतंकियों के बीच बिताए 4 घंटे, देखिए क्या-क्या बोले वो?
4 of 5
आतंकी पांच फोन इस्तेमाल कर रहे थे। इसमें एक मेरा और दो एसपी के फोन थे। जब वे रुके तो उन्होंने कहा कि अल्फा इसे जन्नत पहुंचा दो। मेरे हाथ-पैर बंधे थे। मैंने खुद को छुड़ाने की कोशिश की लेकिन उन्होंने मुझे राइफल के बट से मारा। उन्होंने मुझसे कहा कि तुम्हारे साथियों ने हमें धोखा दिया और वे मुझे इसके लिए सबक सिखाएंगे। इसके बाद उन्होंने मेरे गले पर चाकू से वार कर दिया और मुझे मरने के लिए वहीं छोड़ कर चले गए।
4 आतंकियों के बीच बिताए 4 घंटे, देखिए क्या-क्या बोले वो?
5 of 5
उनके जाने के बाद मैंने किसी तरह खुद को आजाद किया और जैकेट को गले के आसपास कस कर बांध लिया। इसके बाद मैं करीब आधा किलोमीटर दौड़ा और एक गुरुद्वारे में पहुंचा। वहां से फोन लेकर मैंने अपने परिजनों को फोन किया, जिन्होंने मुझे अस्पताल में भर्ती करवाया। आतंकियों को एसपी के गनमैन कुलविंदर की कॉल आई थी। इसके बाद उन्होंने दोनों फोन को राइफल का बट मारकर तोड़ दिया।