31 दिसंबर को मैंने एसपी सलविंदर सिंह को कहा था कि वह अब न आएं, देर हो गई है लेकिन वह जबरदस्ती आ गए। ये कहना है दरगाह के सेवादार का। देखिए बातचीत।
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आतंकी हमलाः 'मना किया था पर SP जबरदस्ती आ गए'
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दरगाह के सेवादार सोमराज ने बताया कि रात करीब सवा आठ बजे उनका फोन आया था। मेरा तो फोन भी घर पर पड़ा था, घंटी बजी तो किसी ने मुझे लाकर दिया। उधर से एसपी सलविंदर सिंह बोल रहे थे। कहने लगे कि हम आ रहे हैं आपके पास। मैंने कहा कि मत आओ, अभी जाने का वक्त हो रहा है, लेकिन वह नहीं माने और आ ही गए। वे कुछ देर तक बैठे। चाय पी और माथा टेककर चले गए।
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आतंकी हमलाः 'मना किया था पर SP जबरदस्ती आ गए'
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सोमराज ने बताया कि मेरे मौसा जी कुक मदन गोपाल भी उनके साथ में थे। मदन गोपाल तो 31 दिसंबर की सुबह को भी राजेश के साथ आए थे। राजेश ने कहा था कि मेरा काम मंदा चल रहा है। मैंने उनसे कहा था कि आप मालिक के आगे दुआ करो, सब ठीक हो जाएगा। सुबह वह जल्दी आए थे और जल्दी ही निकल गए। मजार की सेवा करते मुझे सात साल से अधिक का वक्त हो गया, मौसा जी तीसरी बार आए थे। पहले बस दो बार ही आए थे।
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सेवादार सोमराज ने खुलासा किया कि एसपी कठुआ (जेएंडके) की तरफ से आए थे और कोलियां की तरफ चले गए। कोलियां में ही एसपी की गाड़ी छीनी गई थी। सेवादार के मौसा मदन गोपाल, जो पहले नहीं आते थे, अचानक तीन बार तैल्लूर क्यों आए। क्या यह साजिश थी या महज इत्तेफाक था।
ऐसे में सवाल उठ रहे है कि एसपी सलविंदर सिंह जाते समय पठानकोट कठुआ की तरफ से गए थे। वहां पर रास्ता काफी अच्छा है और आधे घंटे के वक्त में ही तैल्लूर पहुंचा जा सकता है। फिर एसपी वापस आते समय कोलियां, नरोट जैमल सिंह, कथलौर पुल की तरफ के टूटे फूटे रास्ते से क्यों आए, जहां पर रात को कोई आता जाता भी नहीं है। इस रास्ते से पठानकोट पहुंचने में एक घंटे से अधिक का वक्त लगता है।