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कुलभूषण जाधव को लेकर पाकिस्तान का सच, इस शख्स की तरह मारने की थी चाल

Fri, 19 May 2017 09:37 AM IST
टीम डिजीटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
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कुलभूषण जाधव (फाइल फोटो)
कुलभूषण जाधव पर पूरी दुनिया के सामने पाकिस्तान बेनकाब हुआ है। उसकी असलियत सबके सामने हैं, जाधव से पहले इस शख्स पर पाक  कुछ ऐसी चालें कर चुका है।
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पाकिस्तान की जेल में बंद कुलभूषण
कुलभूषण जाधव केस में भारत की बड़ी जीत हुई है। नीदरलैंड के द हेग में इंटरनेशनल कोर्ट अॉफ जस्टिस ने पाकिस्तान को झटका देते हुए अंतिम फैसला आने तक कुलभूषण जाधव की फांसी पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि पाकिस्तान जाधव पर कोई कार्रवाई न करे।
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sarbjit
पाकिस्तान के मुंह पर भले ही तमाचा लगा है लेकिन पाकिस्तान ऐसी कई चालें पहले भी करता रहा है,  इससे पहले भी पाकिस्तान की चाल का शिकार कई निर्दोष भारतीय हो चुके हैं। सरबजीत का केस तो हर कोई जानता ही है, लेकिन उसके अलावा भी पाकिस्तान ने भारत से बदला लेने के लिए ऐसे हथकंडे कई बार इस्तेमाल किए हैं।

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sarbjit
सरबजीत के केस में भारत कुछ नहीं कर पाया और आखिरकार सरबजीत की पाकिस्तान के जेल में ही मौत हो गई। जाधव की भी गिरफ्तारी के महज एक साल बाद ही उसे मौत की सजा सुना दी गई है, जबकि इस एक साल में भारतीय दूतावास अधिकारियों को जाधव से मिलने की इजाजत भी नहीं दी गई।
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sarbjit
पंजाब के तरनतारन जिले का रहने वाला सरबजीत को भी भारत बचा नहीं सका था। कई कोशिशें करने के बाद भी आखिरकार सरबजीत की पाकिस्तान के जेल में ही मौत हो गई थी। साल 1990 में गलती से पाकिस्तान की सीमा पार करने वाले सरबजीत को पाकिस्तान ने 1991 में लाहौर और फैसलाबाद में हुए बम धमाके का दोषी बताते हुए फांसी की सजा सुना दी थी।
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sarbhit
सरबजीत का नाम एफआईआर में मंजीत सिंह लिखकर पाकिस्तान ने इस चाल को अंजाम दिया था। साल 2008 में पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने सरबजीत की दया याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद साल 2011 में गलत नाम को आधार बताकर केस फिर से सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था।
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Sarabjit Singh
जाधव की ही तरह 2005 में पाकिस्तानी ने एक वीडियो जारी करके दावा किया कि सरबजीत सिंह ने अपना जुर्म कबूल लिया है, लेकिन 2005 तक पाकिस्तान सरबजीत सिंह को मंजीत सिंह कहता था। 2005 में ही वो गवाह मीडिया के सामने आया जिसने सरबजीत की पहचान की थी, उसने मीडिया से साफ कहा कि उस पर दबाव डालकर सरबजीत के खिलाफ बयान दिलवाया गया था। 
 
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sarbjit
सरबजीत की बहन दलबीर कौर ने अपने भाई की रिहाई के लिए जी जान एक कर दी थी, लेकिन फिर भी सरबजीत की रिहाई हो नहीं सकी। साल 1991 से ही दलबीर ने लाहौर और दिल्ली को एक कर दिया था, लेकिन रिहाई की लड़ाई के बीच ही अप्रैल 2013 में सरबजीत के ऊपर लखपत जेल में धारदार हथियारों से कई कैदियों ने हमला कर दिया और उनकी मौत हो गई।
 
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