नोवाक जोकोविच को आदर्श माना, महेश भूपति से सीखा और रोजर फेडरर से मुकाबला हारकर भी जीते। कुछ ऐसी है सुमित नागल के हौसला और जुनून की कहानी...
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सुमित नागल
- फोटो : सोशल मीडिया
साल का आखिरी टेनिस ग्रैंड स्लैम यूएस ओपन से सुमित नागल ने अपना ग्रैंड स्लैम डेब्यू किया। सुमित नागल ने अपने पहले ही मैच में दुनिया के महानतम खिलाड़ी रोजर फेडरर को पहले सेट में हराकर सभी को चौंका दिया। पहला सेट गंवाने के बाद फेडरर जरूर मैच (4-6, 6-1, 6-2, 6-4) जीतने में कामयाब रहे, लेकिन दिल तो नागल जीत चुके थे। एकाएक पूरी दुनिया में चर्चित हो चुके नागल की कहानी बेहद दिलचस्प है।
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सुमित नागल
- फोटो : social media
सुमित नागल के पिता सुरेश का कहना है कि सुमित दिग्गज रोजर फेडरर के साथ यूएस ओपन में भले ही मैच हार गए हों, लेकिन उन्होंने सभी का दिल जीता है। फेडरर के साथ हुए मैच ने उसे भविष्य की राह दिखा दी है। अब आगे का सफर तय करना उसके लिए मुश्किल नहीं है। सुमित के अनुसार, फेडरर ने कहा कि उनके लिए भी यह मुश्किल सेट था। एक बार उन्हें लगा कि वह नागल नहीं, बल्कि नडाल के खिलाफ खेल रहे हैं।
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sumit nagal
बता दें कि सुमित नागल ने जज्बा और जुझारूपन दिखाते हुए दिग्गज रोजर फेडरर से पहला सेट जीता, लेकिन आखिर में उन्हें इस मैच में हारकर बाहर होना पड़ा। नागल पिछले 20 वर्षों में ग्रैंडस्लैम के पुरुष एकल मुख्य ड्रॉ में एक सेट जीतने वाले केवल चौथे भारतीय हैं। यह सेट उन्होंने फेडरर के खिलाफ जीता, जिनके नाम पर 20 ग्रैंडस्लैम खिताब दर्ज हैं। नागल से पहले ग्रैंडस्लैम टूर्नामेंट में केवल सोमदेव देववर्मन, युकी भांबरी और साकेत मयनेनी ही एक सेट जीतने में कामयाब रहे थे।
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सुमित नागल
- फोटो : फाइल फोटो
16 अगस्त, 1997 को झज्जर के जैतपुर में जन्मे सुमित नागल दिल्ली के नांगलोई इलाके में रहते हैं। उनके पिता सुरेश सेना में हवलदार रह चुके हैं। मां कृष्णा गृहिणी हैं। पिता सेना की नौकरी से सेवानिवृत्त होने के बाद एक स्कूल में अध्यापक की नौकरी कर रहे हैं। पिता ने बताया कि सुमित 22 साल के सुमित जूनियर ग्रैंड स्लैम जीतने वाले छठे भारतीय खिलाड़ी हैं। वे उसे एक रोज टेनिस कोर्ट ले गए तो वहां से सुमिल हाथ में रैकेट लेकर ही लौटे।
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सुमित नागल
- फोटो : फाइल फोटो
विंबलडन जूनियर डबल्स खिताब जीत के बाद सुमित नागल की रैंकिंग में उछाल आया है और वे 19 पायदान चढ़कर 745 वें नंबर पर पहुंच गए हैं। अगले साल फरवरी तक वे शीर्ष 300 खिलाड़ियों में शामिल होना चाहते हैं। सात बरस की उम्र में सुमित ने टेनिस खेलना शुरू किया था। उनके कोच चाहते थे कि सुमित को बड़े स्तर पर प्रशिक्षण मिलना चाहिए। एक दिन महेश भूपति ने सुमित का खेल देखा और वे उन्हें अपनी टेनिस अकादमी में ले आए।
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सुमित नागल
- फोटो : फाइल फोटो
महेश भूपति की अकादमी से ही शुरू हुई उनके चैंपियन बनने की असली यात्रा। सुमित का वक्त ही तब पलटा, जब उनकी जिंदगी में दिग्गज टेनिस खिलाड़ी महेश भूपति की एंट्री हुई। भूपित की एकेडमी में उन्होंने ट्रेनिंग ली। सुमित, महेश भूपति को अपना मेंटोर मानते हैं। सुमित कहते हैं- 'भूपति मेरे मेंटोर हैं और हमेशा रहेंगे। मैं करीब 10 साल का था, तब उनकी एकेडमी में पहली बार गया था। उन्होंने मेरे खेल को निखारा। उन्होंने ही मुझे स्पॉन्सर भी किया था।
सुमित के पिता सुरेश बताते हैं कि हम बहुत साधारण परिवार के लोग हैं। टेनिस जैसा खेल खेलाना और उसका खर्च उठाना हमारे बूते से बाहर था। लेकिन महेश भूपति ने उसकी पूरी जिम्मेदारी उठाई। दिग्गज नोवाक जोकोविच को अपना आदर्श मानने वाले सुमित भी यह मानते हैं कि महेश भूपति के बिना उनका इस खिताब तक पहुंचना संभव नहीं था। बचपन में जिस रोजर फेडरर के स्टाइल को कॉपी करते थे, उन्हीं को पहले सेट में हराना वाकई किसी सुखद अनुभूति से कम नहीं।