मिस वर्ल्ड मानुषी छिल्लर के लिए नियमों को ताक पर रख दिया गया। ऐसे में अब उनकी एक ख्वाहिश पूरी हो गई, जबकि इसी काम के लिए एक कश्मीरी छात्रा महीनों से जद्दोजहद कर रहा था।
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मानुषी छिल्लर
- फोटो : ANI
बीपीएस राजकीय महिला मेडिकल कॉलेज खानपुर, सोनीपत ने मिस वर्ल्ड रहीं मानुषी छिल्लर को कॉलेज बदलने की एनओसी जारी कर दी है। मानुषी मुंबई के किसी कॉलेज में पढ़ना चाहती हैं, लेकिन आरोप लगाया गया है कि मेडिकल कॉलेज ने एनओसी देते समय नियमों को ताक पर रख दिया। यही नहीं आम और खास में भेदभाव करने का भी आरोप लगाया जा रहा है। कहा जा रहा है कि साल 2017 में कॉलेज बदलने के लिए एक कश्मीरी छात्रा ने एनओसी मांगी थी, जिस पर आज तक विचार नहीं किया गया, लेकिन मानुषी को पंडित बीडी शर्मा यूनिवर्सिटी रोहतक से केवल 15 दिन में एनओसी जारी कर दी गई है।
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manushi chhillar
मानुषी छिल्लर ने वर्ष 2014 में बीपीएस महिला मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस में दाखिला लिया था। वह पहला प्रॉस पूरा कर चुकी हैं। जब वह मिस वर्ल्ड कांटेस्ट के लिए गई थीं तब दूसरा प्रॉस शुरू हो गया था। मानुषी मिस वर्ल्ड बनीं, लेकिन अभी तक भी कॉलेज नहीं आई थीं। मानुषी ने दूसरे प्रॉस की परीक्षा भी छोड़ दी थी। वह पिछले ढाई साल से कॉलेज से अनुपस्थित हैं। अब करीब एक माह पहले कॉलेज में मानुषी का पत्र आया, जिसमें उन्होंने कोई ठोस कारण लिखे बिना कॉलेज बदलने के लिए एनओसी मांगी। इसके लिए कॉलेज प्रबंधन ने नियमों को ताक पर रख दिया। प्रबंधन ने एनओसी जारी करने के लिए कमेटी की बैठक तक नहीं की। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) से अनुमति नहीं ली।
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मिस वर्ल्ड मानुषी छिल्लर
फाइल पर अनुमति की मुहर लगाकर पंडित बीडी शर्मा यूनिवर्सिटी रोहतक के रजिस्ट्रार के पास भेज दी गई और रजिस्ट्रार ने मानुषी छिल्लर को कॉलेज बदलने की एनओसी जारी कर दी। वहीं मानुषी को एनओसी जारी करने के बाद कॉलेज में सीट खाली हो गई है, लेकिन उस पर कोई दाखिला नहीं ले पाएगा। तीन साल का समय बीत चुका है। ऐसे में अब कॉलेज की यह सीट खाली रहने से सरकार को फीस का नुकसान झेलना पड़ेगा।
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manushi chillar
- फोटो : सोशल मीडिया
कश्मीरी छात्रा को नहीं दी गई एनओसी
बीपीएस कॉलेज में कश्मीर की एक छात्रा भी एमबीबीएस करती है। उसने 2017 में अपने माता-पिता के अकेले होने के साथ ही कश्मीर में हालात खराब होने की बात कहते हुए कॉलेज बदलने के लिए एनओसी मांगी थी। बताया जा रहा है कि उसके पास कॉलेज बदलने की ठोस वजह थी, लेकिन वह कश्मीर के कॉलेज से उस समय एनओसी लेकर नहीं आई थी। ऐसे में उस कश्मीरी छात्रा को एनओसी देने से इनकार कर दिया गया था।
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Manushi Chhillar
यह है एनओसी लेने का नियम
एमबीबीएस का कोई छात्र अगर एक से दूसरे कॉलेज में जाना चाहता है तो इसके लिए उसे पहले प्रॉस की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद आवेदन करना होगा। जिस कॉलेज में जाना है, वहां से एनओसी लेनी होगी कि वहां सीट खाली है और उनको अपने यहां उस छात्र को प्रवेश देने में आपत्ति नहीं है। यह एनओसी आवेदन पत्र के साथ लगाई जाती है। आवेदन में कॉलेज बदलने की ठोस वजह भी बतानी होती है कि वह इस परेशानी के कारण कॉलेज बदलना चाहता है। कॉलेज में सभी दस्तावेज जमा कराने के बाद वहां से अनुमति देकर यूनिवर्सिटी भेज दिया जाता है, जहां से फाइल मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को जाती है। वहां कमेटी की अनुमति मिलने के बाद एनओसी जारी होती है। आरोप है कि मानुषी ने एनओसी लेने के लिए मुंबई के कॉलेज का कोई दस्तावेज नहीं लगाया, न ही कॉलेज बदलने की कोई वजह बताई है।
मानुषी छिल्लर को लगभग 15 दिन पहले यूनिवर्सिटी की ओर से एनओसी जारी की गई है। वह किसी मुंबई के कॉलेज में दाखिला लेना चाहती हैं। मेरे पास यह स्पेशल केस बनकर आया था। उनकी फाइल पर बीपीएस कॉलेज प्रशासन ने नो ऑब्जेक्शन लिखकर भेजा था, जिस आधार पर एनओसी जारी की गई है। - डॉ. एचके अग्रवाल, रजिस्ट्रार पंडित बीडी शर्मा यूनिवर्सिटी रोहतक