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देखिए मोदी ने पूरा किया स्टूडेंट्स का सपना, खिल उठे चेहरे

Sat, 12 Sep 2015 03:27 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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मोदी के हाथों से डिग्री लेने का सपना था, पूरा हो गया। देखते ही देखते स्टूडेंट्स में खुशी की लहर दौड़ गई। चेहरे खिल उठे। देखिए तस्वीरें।
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मौका था चंडीगढ़ पीजीआई 34वें दीक्षांत समारोह का। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोद बतौर चीफ गेस्ट पहुंचे थे, जहां उन्होंने 9 स्टूडेंट्स को गोल्ड मेडल देकर पुरस्कृत किया।
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मेजर जनरल आमिर चंद गोल्ड मेडल प्राप्त करने वाले डा. सुरेश कुमार ने बताया कि यह उनके लिए काफी बड़ी अचीवमेंट है। एकता मेमोरियल गोल्ड मेडल प्राप्त करने वाली प्रतिभा चौहान ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी से गोल्ड मेडल प्राप्त करना उनके लिए एक अद्भुत अनुभव है।

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कटारिया मेमोरियल गोल्ड मेडल डा. अग्रवाल अनिरुद्ध किशनदत्त व खैरे निरंजन शिवाजी को मिला। डा. अशोक कुमार , डा. रमेश कुमार, डा. किरण कुमार को मेजर जनरल आमिर चंद गोल्ड मेडल दिया गया। डा. इंद्रनील बिस्वास को वीके सैनी गोल्ड मेडल दिया गया जबकि डा. बलान को प्रोफेसर सुभाष कुमारी गुप्ता मेमोरियल गोल्ड मेडल से नवाजा गया।
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इस मौके पर मोदी ने कहा कि डाक्टरों को बीमारी के बजाए बीमार व्यक्ति पर फोकस करना चाहिए। ऐसा करने वाले डाक्टर ही सबसे ज्यादा सफल होते हैं। यदि वे बीमार को अपना बनाएंगे तो बीमारी आसानी से दूर हो जाएगी।
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मोदी ने बताया कि ने आपको डाक्टर बनाने में सिर्फ सरकार का हाथ नहीं होता, बल्कि एक वार्ड ब्वाय का भी रोल रहा होगा। एग्जाम के दौरान पेड़ के नीचे बैठने वाले चाय वाले का भी अहम रोल होगा, क्योंकि जब नींद आई होगी तो रात में जगाकर उससे चाय बनवाई होगी और चाय पीने के बाद दो घंटे और पढ़ाई की होगी। समाज के सहयोग से डाक्टर बनते हैं। डाक्टर बनने के बाद गरीब मरीजों का इलाज कर इस ऋण को जरूर चुकाएं।
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मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत 9/11 के महत्व का व्याख्या करते हुए की। उन्होंने कहा कि आज का दिन कई मायनों में महत्वपूर्ण है। कुछ साल पहले मानवता को ध्वस्त करते हुए हजारों लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया था। आज ही कुछ लोग समाज में नया कदम रख रहे हैं, जो लोगों की जान बचाने के लिए दिन रात एक कर देंगे। किसी को जिंदा रखना पूरा जीवन खपा देने के बराबर होता है।

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मोदी ने कहा कि साल 1893 में आज ही के दिन स्वामी विवेकानंद ने शिकागो के सम्मेलन ने समूचे विश्व को मानवता का संदेश दिया था। यदि उस संदेश को गहराई से समझा गया होता तो वर्ष 2001 में 9/11 का हमला नहीं होता।

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मोदी ने कहा कि लोग अब बीमारी के बजाए तंदुरुस्ती पर ध्यान दे रहे हैं। लोगों में प्रिवेंटिव हेल्थ केयर की सोच उत्पन्न हो रही है। लोग स्वस्थ रखना चाहते हैं ताकि वे किसी बीमारी के चपेट में न आएं। जब इस गहराई को समझ लेंगे तो योग का महत्व भी समझ में आ जाएगा। योग में ही क्षमता थी कि 100 दिन के भीतर 192 देशों ने योग को अपना समर्थन दिया।

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मोदी बोले कि ऐसा अचानक क्यों हुआ कि इतनी जल्दी इन देशों ने समर्थन दिया, क्योंकि लोग मेडिकल साइंस से कुछ और चाहते हैं। समाज अब दवाइयों से मुक्ति चाहता है। वह साइड इफेक्ट के झंझटों से दूर रहकर खुद से ठीक होकर तंदुरस्त रहना चाहता है। योग में वह क्षमता पूरी है, जिससे व्यक्ति पूरी तरह से तंदुरुस्त रह सकता है। इसी को ध्यान में रखकर हेल्थ सेक्टर की पालिसी तैयार की जाएगी।

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मोदी ने उदाहरण देकर समझाया गया कि फिजियोथेरेपिस्ट यदि योग की डिग्री हासिल कर ले तो उससे बेहतर कोई फिजियोथेरेपिस्ट नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि डाक्टर को संवेदनशील भी बनना चाहिए, क्योंकि वे कलपुर्जों के साथ नहीं जिंदा इंसान के साथ काम करते हैं। जिन लोगों को गोल्ड मेडल नहीं मिल पाया है। वे निराश न हो, क्योंकि कई बार विफलता भी एक शिक्षक का काम करती है।

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20 अक्तूबर 2014 को एम्स के कन्वोकेशन के दौरान अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुझाव दिया था कि क्या दीक्षांत समारोह में स्पेशल गेस्ट की परंपरा शुरू कर सकते हैं। कन्वोकेशन में गरीब परिवारों के स्कूली बच्चों को बुलाया जाए, ताकि वे इस दुनिया को देखें और भविष्य के डाक्टरों से प्रेरणा पाएं। करीब 11 महीने पहले दिए गए इस सुझाव को पीजीआई ने माना।
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पीजीआई के 34 वें कन्वोकेशन के दौरान अलग-अलग सरकारी स्कूलों के बच्चों को बुलाया गया था। भाषण के दौरान जब नरेंद्र मोदी ने बच्चों को देखा तो उन्होंने कहा कि वे पीजीआई के आभारी हैं। उन्होंने मेरा सुझाव मान लिया है। ये बच्चे ही आज के चीफ गेस्ट हैं। इस दौरान मोदी ने बच्चों से तीन मिनट बात की।
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