एक पेड़ ऐसा भी था जिसके काटने से खून निकलता था। आखिर ऐसा क्यों था? जानिए उस पेड़ के बारे में चौंकाने वाले सच।
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देखिए, एक ऐसा पेड़, जिसको काटने से निकलता था खून
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दरअसल पानीपत का तीसरा युद्ध जिस जगह पर लड़ा गया, वहां भीषण युद्ध में हजारों सैनिकों की मारे गए थे। रक्तपात से इस जगह की मिट्टी लाल हो गई और वहां स्थित आम का पेड़ काला हो गया। इसी वजह से उस जगह का नाम भी पेड़ के नाम पड़ा और जिसे काटने पर खून निकलता था।
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पानीपत की जमीन पर तीन युद्ध लड़े गए थे, जो सन् 1526, सन् 1556 और सन् 1761 में लड़े गए। पानीपत का तीसरा युद्ध मराठों और मुगलों के बीच लड़ा गया था।
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मराठों की तरफ से सदाशिवराव भाऊ और मुगलों की ओर से अहमदशाह अब्दाली ने नेतृत्व किया था। इस युद्ध को भारत में मराठा साम्राज्य के अंत के रूप में भी देखा जाता है। इस युद्ध में अहमदशाह अब्दाली की जीत हुई थी।
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इतिहासकार बताते हैं कि पानीपत के तीसरे युद्ध के दौरान इस जगह पर एक काफी बड़ा आम का पेड़ हुआ करता था। लड़ाई के बाद सैनिक इसके नीचे आराम करते थे।
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कहा जाता है कि भीषण युद्ध में तकरीबन 70,000 मराठा सैनिकों की मौत हो गई थी। रक्तपात से इस जगह की मिट्टी लाल हो गई थी, जिसका असर इस आम के पेड़ पर भी पड़ा।
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70,000 मराठा सैनिकों के रक्त के कारण आम के पेड़ का रंग काला हो गया और तभी से इस जगह को 'काला अंब' यानी काला आम के नाम से जाना जाने लगा। एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि इस पेड़ पर लगे आमों को काटने पर उनमें से जो रस निकलता था, उसका रंग रक्त की तरह लाल होता था।
कई वर्षों बाद इस पेड़ के सूखने पर इसे कवि पंडित सुगन चंद रईस ने खरीद लिया। सुगन चंद ने इस पेड़ की लकड़ी से खूबसूरत दरवाजे को बनवाया। यह दरवाजा अब पानीपत म्यूजियम में रखा गया है। अब इस जगह पर एक स्मारक बनाया गया है, जिसे 'काला अंब' कहा जाता है। आम का ये पेड़ काला हो गया है इसलिए इसे काला अंब कहा जाता है।