मुख्यमंत्री बादल की कंपनी आर्बिट की बस में छेड़छाड़ का विरोध करने पर मां-बेटी को नीचे फेंक दिया गया। हादसे में बेटी की मौत हो गई, जबकि मां की हालत गंभीर है। तस्वीरों में पूरा मामला।
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सीएम की कंपनी की बस से मां-बेटी को नीचे फेंका, बेटी मरी
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हादसा, पंजाब के मोगा जिले में हुआ। एसपी (आई) हरजीत सिंह पन्नू ने बताया कि बस ड्राइवर रणजीत सिंह, कंडक्टर सुखविंदर सिंह गांव बहावल वासी (अबोहर), हेल्पर (हॉकर) गुरदीप सिंह निवासी, मोगा और अमर राम निवासी गांव चकबख्तू (बठिंडा) को गिरफ्तार कर लिया गया है।
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जिला पुलिस प्रमुख जतिंदर सिंह खैहरा ने कहा कि जख्मी महिला के बयान के मुताबिक बेटी से छेड़छाड़ से रोकने पर आरोपियों ने दोनों को बस से धक्का दिया गया था। हादसे में बेटी की मौत हो गई थी और वह खुद घायल हो गई थी।
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जिला पुलिस प्रमुख जतिंदर सिंह खैहरा ने कहा कि जख्मी महिला के बयान के मुताबिक बेटी से छेड़छाड़ से रोकने पर आरोपियों ने दोनों को बस से धक्का दिया गया था। हादसे में बेटी की मौत हो गई थी और वह खुद घायल हो गई थी।
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सिविल अस्पताल में आईजी एनआरआई एवं महिला विंग गुरप्रीत दियो ने भी पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता का भरोसा दिया। इस मौके पर फिरोजपुर रेंज के डीआईजी अमर सिंह चाहल भी मौजूद थे।
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पंजाब के डीजीपी सुमेध सिंह सैनी ने कहा है कि मामले की जांच आईजी गुरप्रीत कौर देओ करेंगी। क्राइम ब्रांच अलग से इसकी जांच करेगी। मोगा के एसपी डी हरजीत सिंह को अर्शदीप के भाई अक्षयदीप सिंह की देखभाल के लिए तैनात किया गया है। एडीजीपी क्राइम इकबालप्रीत सिंह सहोता को सारे मामले की तेजी से जांच के लिए निगरानी करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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डीजीपी सुमेध सिंह सैनी ने कहा कि ऑर्बिट कंपनी उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल व उनके परिवार की है, लेकिन उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हो सकती। कानून के मुताबिक उस व्यक्ति के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो सकती, जिसे अपराध का पता ही न हो। बेशक वह संबंधित कंपनी का मालिक ही क्यों न हो?
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सिविल अस्पताल पहुंचे पंजाब कांग्रेस प्रधान प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि पंजाब में कानून-व्यवस्था की हालत बद से बदतर होती जा रही है। उन्होंने आर्बिट बसों की परमिट रद्द करने की मांग की। उन्होंने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के अलावा सुप्रीम कोर्ट को स्वत: संज्ञान लेने की अपील करते हुए कहा कि सत्ताधारी पार्टी नेता की बस होने के कारण सिविल और पुलिस प्रशासन दबाव में पीड़ित परिवार को इंसाफ नहीं दे सकता।
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राष्ट्रीय अनुसूचित जाति कमीशन के चेयरमैन राजकुमार वेरका ने पीड़ित परिवार से बातचीत कर जिला प्रशासन को 24 घंटे में पीड़ित परिवार को पांच लाख रुपये का मुआवजा और घायल महिला के इलाज के लिए 50 हजार रुपये की रकम जारी करने का आदेश दिया। उन्होंने प्रशासन को इस घटना की विस्तार रिपोर्ट 3 दिन में पेश करने की हिदायत भी दी।
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उबेर कंपनी की एक कैब में बलात्कार होने के बाद गत वर्ष दिसंबर महीने में दिल्ली सरकार की ओर से इसे बैन किए जाने की तर्ज पर ऑर्बिट कंपनी की बसों पर कार्रवाई के संबंध में पूछे गए सवाल के जवाब में एडीजीपी कानून-व्यवस्था दिनकर गुप्ता ने कहा कि ऐसा संभव नहीं है। उबेर पर बैन के कई अन्य कारण भी थे, लेकिन ऑर्बिट में एक घटना की वजह से पाबंदी लगाया जाना सही नहीं है। जिन लोगों ने अपराध किया उनके खिलाफ तो कार्रवाई की ही जा रही है।