कई बार छोटे बच्चे जिज्ञासावश कुछ ऐसी चीज गटक लेते हैं, जो जानलेवा साबित हो जाती है। इससे कई बच्चों की जान भी जा चुकी है। आमतौर पर बच्चे सिक्के, खिलौने की बैट्री व फिनायल गटक लेते हैं। इससे कई बच्चों की जान भी जा चुकी है। इसी तरह से लिक्विड मच्छरमार दवा (मॉस्किटो रेपलेंट) भी बच्चों के लिए हानिकारक है, जानिए कैसे..
विज्ञापन
2 of 5
सांकेतिक तस्वीर
हाल ही में इंडियन जरनल ऑफ पीडियाट्रिक्स में प्रकाशित पीजीआई की एक स्टडी में बताया गया है कि कई बच्चे धोखे से तरल मच्छमार दवा पी लेते हैं। चार सालों में पीडियाट्रिक इमरजेंसी में कुल 23 केस पहुंचे हैं। इनमें से एक बच्चे की इलाज की दौरान मौत भी हो गई। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि तरल मच्छरमार दवा कितनी खतरनाक है और उसे ऐसी जगह पर रखना चाहिए है, जहां छोटे बच्चे (0-5 साल तक) पहुंच न पाएं।
विज्ञापन
3 of 5
सांकेतिक तस्वीर
पीजीआई की पीडियाट्रिक्स में आए 23 केसों की स्टडी करने पर पता चला है कि अधिकतर केस गर्मियों के दिनों में आए थे और सभी केस शहरी इलाकों के थे। इनमें से 70 फीसदी केस गंभीर हालत में थे। वे एक्यूट रेसपाइरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम से पीड़ित थे। ऐसे केसों में अतिरिक्त ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। तरल मच्छरमार दवा पाइरेथ्रिन और केरोसिन को मिलाकर बनता है। इसमें 95-97 फीसदी केरोसिन और एक फीसदी पाइरेथ्रिन मिला होता है। पाइरेथ्रिन का इस्तेमाल आमतौर पर एक कीटनाशक के तौर पर किया जाता है, जबकि केरोसिन अपने आप में एक हाइड्रोकार्बन होता है।
4 of 5
सांकेतिक तस्वीर
अस्पताल पहुंचाना जरूरी, लोग करते हैं टोटके
स्टडी में शामिल पीजीआई के पीडियाट्रिक मेडिसिन के डा. अरुण बंसल ने बताया कि यदि कोई बच्चा मच्छरमार तरल पदार्थ पीता है तो उस बच्चे को तुरंत अस्पताल पहुंचाना चाहिए। कई लोग बच्चे को अस्पताल में ले जाने के बजाए टोटके करते हैं। देशी दवा पिलाते हैं। इससे काफी देर हो जाती है और दवा अंदर पहुंचते ही नुकसान पहुंचाना शुरू कर देती है। तरल मच्छरमार पीने से अधिकतर बच्चों को निमोनिया व इंफेक्शन होता है, जो समय पर इलाज नहीं मिलने पर जानलेवा भी साबित हो सकता है। दवा अंदर जाकर ब्लड में मिलती है और अंदर जाकर नुकसान पहुंचाने लगती है।
बचाव ही इसका इलाज है
स्टडी में शामिल एक अन्य शोधकर्ता ने बताया कि कोशिश यही होनी चाहिए तरल मच्छरमार को बच्चों से दूर रखना चाहिए। जागरूकता ही इसका एक मात्र इलाज है। कई पेरेंट्स को पता नहीं होता कि यह बच्चों के हाथ लग सकता है और वे इसे मुंह में डाल देते हैं। यदि कोई बच्चा इस तरह के कदम उठा लेता है तो घबराएं नहीं और सीधे ऐसे हास्पिटल में पहुंचें, जहां बच्चों का इलाज बेहतर तरीके से हो सके। इस रीजन में यदि किसी के साथ कोई घटना घटती है तो उसे तुरंत पीजीआई की इमरजेंसी में पहुंचना चाहिए। पीजीआई में आए इस तरह के बच्चों का अच्छा इलाज होता है।