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दूसरे विश्व युद्ध की याद दिलाता है ये गुरुद्वारा, सिखों ने दिखाया था शौर्य, अंग्रेज भी हो गए थे कायल

Mon, 08 Feb 2021 04:54 PM IST
निवेदिता वर्मा नीरज कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी,  चंडीगढ़
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चंडीगढ़ के सेक्टर 38 बी स्थित गुरुद्वारा। - फोटो : अमर उजाला
चंडीगढ़ का दूसरे विश्व युद्ध से बड़ा गहरा नाता है। दूसरे विश्व युद्ध में साहस का परचम फहराने वाले सिख रेजीमेंट में शाहपुर गांव के भी कुछ सैनिक शामिल हुए थे। 1945 में हुए युद्ध में इन सैनिकों ने दुश्मनों के दांत खट्टे कर दिए थे। लड़ाई में सैनिकों के जौहर से गदगद अंग्रेजों ने सैनिकों को उपहार स्वरूप श्री गुरु ग्रंथ साहिब पावन स्वरूप भेंट किया। 
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चंडीगढ़ में बना पुराना गुरुद्वारा और साथ में बना नया गुरुद्वारा। - फोटो : अमर उजाला
जब इस धार्मिक सौगात को लेकर सैनिक गांव पहुंचे तो जोरदार जश्न मना। उसके बाद साल 1949 में शाहपुर में गुरुद्वारा साहिब शाहपुर का भव्य निर्माण करवाया गया। इस ऐतिहासिक जगह को अब चंडीगढ़ सेक्टर 38 बी के रूप में जाना जाता है। हालांकि गुरुद्वारे का नाम वही है, जो 45 साल पहले रखा गया था। 
 
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चंडीगढ़ स्थित गुरुद्वारा साहिब में लगा पेड़। - फोटो : अमर उजाला
गुरुद्वारा साहिब के प्रधान तारा सिंह ने बताया कि जब सैनिक अपने वतन लौट रहे थे, तभी अंग्रेज ने गांव के निवासी हवलदार शमशेर सिंह को गुरुग्रंथ साहिब का स्वरूप भेंट किया था। पहले स्वरूप को धर्मशाला में स्थापित किया गया। उसके बाद गुरुद्वारा साहिब का निर्माण किया गया। विदेशी धरती में बहादुरी की मिसाल पेश करने वालों में शाहपुर गांव के सैनिक हवलदार शमशेर सिंह, लखा सिंह, सूबेदार हजारा सिंह, सरदारा सिंह, बखतौर सिंह, लछमन सिंह, धर्म सिंह, कर्म सिंह, गुरनाम सिंह, गुरदियाल सिंह शामिल थे। हालांकि अब यहां इन लोगों का कोई वंशज नहीं रहता।  

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चंडीगढ़ के सेक्टर 38 में स्थित गुरुद्वारा साहिब। - फोटो : अमर उजाला
शाहपुर से चंडीगढ़ बनने के बाद प्रशासन ने धीरे-धीरे जमीन को अपने कब्जे में लेना शुरू किया। साल 1973 में प्रशासन ने गुरुद्वारा साहिब को छोड़कर गांव की करीब दो हजार बीघा जमीन का अधिग्रहण कर लिया। तारा सिंह ने बताया कि साल 1949 में गुरुद्वारे का जिस तरह निर्माण हुआ था, उसी प्रकार से अब भी इसे सरंक्षित रखा गया है। उसके पुराने स्वरूप से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है। कमेटी के सदस्य इसका पूरा ध्यान रखते हैं। गुरुद्वारे के अंदर दो पेड़ भी हैं, जो करीब तीन सौ साल पुराने बताए जाते हैं। गुरुद्वारा साहिब शाहपुर की कमेटी की ओर से इन पेड़ों की देखरेख की जाती है ताकि इनकी पूरी तरह से देखभाल की जा सके।
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चंडीगढ़ के गुरुद्वारे में लगा पेड़। - फोटो : अमर उजाला
अब तक 32 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों की मदद
गुरुद्वारा साहिब की ओर से सामजिक कार्य भी किए जाते हैं। हर साल कई गरीब बच्चों की पढ़ाई में मदद की जाती है। अब तक 32 हजार से भी अधिक बच्चे गुरुद्वारे की सेवाओं का लाभ उठा चुके हैं। यहां पर बाहर से आने वाले लोगों के ठहरने की व्यवस्था रखी गई है। इस गुरुद्वारे की एक खास बात और भी है। यहां पर बनने वाले लंगर में उन सब्जियों का इस्तेमाल किया जाता है, जो गुरुद्वारे में ही उगाई जाती है। इन सब्जियों को उगाने में किसी भी तरह का रासायनिक उवर्रक नहीं डाला जाता है।
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