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117 साल का हुआ कालका-शिमला रेलमार्ग, दर्जनों फिल्मों में दिखी झलक, तस्वीरों में आप भी देखें

Mon, 09 Nov 2020 06:27 PM IST
ajay kumar सौरव यादव, संवाद न्यूज एजेंसी, कालका (हरियाणा)
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कालका-शिमला रेल ट्रैक। - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)
विश्व धरोहर में शामिल ऐतिहासिक कालका-शिमला रेलवे मार्ग सोमवार को 117 साल हो गया है। नौ नवंबर, 1903 को कालका- शिमला रेल मार्ग की शुरूआत हुई थी। अपने 117 वर्षों के सफर में यह रेल मार्ग कई इतिहास संजोए हुए है। उक्त रेल मार्ग उत्तर रेलवे के अंबाला डिवीजन के अंतर्गत आता है। देश-विदेश के सैलानी शिमला के लिए इसी रेल मार्ग से टॉय ट्रेन में सफर का लुत्फ उठाते हैं।
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कालका-शिमला रेल ट्रैक। - फोटो : अमर उजाला
वर्ष-1896 में इस रेल मार्ग को बनाने का काम दिल्ली-अंबाला कंपनी को सौंपा गया था। रेल मार्ग कालका स्टेशन (656 मीटर) से शिमला (2,076 मीटर) तक जाता है। 96 किलोमीटर लंबे इस रेल मार्ग पर 18 स्टेशन हैं। कालका-शिमला रेलमार्ग को केएसआर के नाम से भी जाना जाता है। 1921 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी इस मार्ग से यात्रा की थी।     
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कालका-शिमला रेल ट्रैक।
103 सुरंगें होती हैं सैलानियों के आकर्षण का केंद्र 
कालका-शिमला रेलवे लाइन पर 103 सुरंगें सफर को और भी रोमांचक बनाती हैं। बड़ोग रेलवे स्टेशन पर 33 नंबर बड़ोग सुरंग सबसे लंबी है, जिसकी लंबाई 1143.61 मीटर है। यह सुरंग क्रॉस करने में टॉय ट्रेन अढ़ाई मिनट का समय लेती है और रेल मार्ग पर 869 छोटे-बड़े पुल हैं, इससे यह सफर और भी रोमांचक हो जाता है। पूरे रेल मार्ग पर 919 घुमाव आते हैं। तीखे मोड़ों पर ट्रेन 48 डिग्री के कोण पर घूमती है। कालका-शिमला रेलमार्ग को नैरोगेज लाइन कहते हैं। इसमें पटरी की चौड़ाई दो फीट छह इंच है।

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फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
जुलाई-2008 में मिला था विश्व धरोहर का दर्जा 
कालका-शिमला रेलवे लाइन के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए यूनेस्को ने जुलाई-2008 में इसे विश्व धरोहर में शामिल किया था। इसके अलावा कनोह रेलवे स्टेशन पर ऐतिहासिक आर्च गैलरी पुल 1898 में बना था। शिमला जाते हुए यह पुल 64.76 किलोमीटर पर मौजूद है। आर्च शैली में निर्मित चार मंजिला पुल में 34 मेहराबें हैं। यह इंडियन रेलवे में आर्च गैलरी पुल सबसे बेहतरीन पुलों में शामिल है। 
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फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
बाबा भलकू के सहयोग से पूरी हुई थी सुरंग
कालका से 41 किलोमीटर दूर बड़ोग रेलवे स्टेशन के पास ही बड़ोग सुरंग है, जिसे सुरंग नंबर-33 भी कहते हैं, यह 1143.61 मीटर लंबी सीधी सुरंग है। इस सुरंग को बनाते हुए जब दोनों सिरे नहीं मिले थे तो ब्रिटिश इंजीनियर कर्नल बड़ोग ने एक रुपया जुर्माना लगने के कारण आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद में बाबा भलकू के सहयोग से यह सुरंग पूरी हुई थी।
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टॉय ट्रेन, कालका-शिमला। - फोटो : फाइल फोटो
बॉलीवुड के लिए भी रहा है आकर्षण 
कालका-शिमला रेलवे लाइन बॉलीवुड के लिए भी आकर्षण का केंद्र रहा है। 1974 में आई सुपरहिट फिल्म ‘दोस्त’ का गाना ‘गाड़ी बुला रही है’ भी इसी मार्ग पर फिल्माया गया था। 1960 में शम्मी कपूर की फिल्म ‘ब्वाय फ्रेंड’ का गाना ‘मुझको अपना बना लो’ कालका-शिमला रेल मार्ग पर शूट हुआ था। साल 2000 में आई प्रीति जिंटा की फिल्म ‘क्या कहना’ में भी कालका-शिमला रेल और उसके कुछ स्टेशनों की छवि देखी जा सकती है। इसके अलावा ऑल इज वेल, जब वी मेट, सनम रे और ‘रमैया वस्तावैया’ जैसी फिल्मों की शूटिंग भी यहां हो चुकी है।
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कालका-शिमला ट्रेन। - फोटो : अमर उजाला
फिलहाल एक ही ट्रेन का हो रहा संचालन 
कालका-शिमला रेल मार्ग पर रोजमर्रा के दिनों में कुल छह टॉय ट्रेनें दोड़ती हैं। लेकिन कोरोना काल के चलते 21 मार्च से इस मार्ग पर ट्रेन संचालन बंद कर दिया गया था। वहीं त्योहारों का सीजन देखते हुए रेलवे ने 21 अक्तूबर से कालका-शिमला स्पेशल एक्सप्रेस टॉय ट्रेन का इस मार्ग पर संचालन शुरू कर दिया है। जोकि दिन में 12:10 बजे कालका रेलवे स्टेशन से रवाना होती है और शाम 5:20 बजे शिमला पहुंचती है।
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