अब रेलवे से सस्ती टिकट लेना आसान नहीं होगा। रेलवे ने एक नया फरमान जारी किया है। तस्वीरों में पूरा मामला। रिपोर्टः मोहित धूपड़
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नया फरमानः अब रेलवे से सस्ती टिकट लेना आसान नहीं
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रेलवे अब विकलांग छूट कार्ड को तैयार करने से पहले कई स्तर पर वेरीफिकेशन करेगा और फिर आवेदक विकलांग को ये छूट कार्ड जारी करेगा। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान रेलवे आवेदक का ही नहीं, बल्कि उस संबंधित डाक्टर की भी वेरीफिकेशन करेगा, जो आवेदक विकलांग को मेडिकल सर्टिफिकेट जारी करेगा।
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इसके लिए बकायदा रेलवे ने अलग से स्पेशल व्यवस्था की है। जिसमें रेलवे के कॉमर्शियल विभाग का इंस्पेक्टर संबंधित डॉक्टर के अस्पताल या चिकित्सक संस्थान में स्वयं पहुंचेगा और वहां आवेदक के विकलांगता और चिकित्सा संबंधी पूरी डिटेल लेकर उसकी वेरीफिकेशन करेगा।
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इस दौरान इंस्पेक्टर ये भी देखेगा कि संबंधित डाक्टर भी नियमानुसार योग्य डाक्टर है या नहीं? इस तरह पूरी मैनुअल वेरीफिकेशन के बाद ही विकलांग यात्री को किराया छूट कार्ड जारी किया जाएगा।
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नई व्यवस्था के मुताबिक ये कार्ड भी अब रेलवे स्टेशनों पर नहीं बनेंगे, बल्कि विकलांग आवेदक की ओर से किसी भी व्यक्ति को इसके लिए संबंधित डीआरएम कार्यालय में आकर आवेदन करना होगा। आखिर में तमाम वेरीफिकेशन प्रक्रिया होने के बाद विकलांग आवेदक को खुद आकर किराया छूट कार्ड लेना होगा।
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रेलवे में विकलांग यात्रियों के लिए पहले किराया छूट कार्ड जारी करने की प्रक्रिया काफी अलग थी। विकलांग यात्री पहले स्टेशन पर आता था, वहां अपना विकलांगता संबंधी मेडिकल सर्टिफिकेट और अपनी आईडी दिखाता था और वहीं से उसका किराया छूट कार्ड बन जाता था।
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जो मेडिकल सर्टिफिकेट वो ले आता था, उसकी बिना वेरीफिकेशन के सही मानकर रेलवे उसे किराया छूट कार्ड जारी कर देता था। इसी का फायदा उठाकर बहुत से लोग फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट और पहचान पत्र बनवाकर किराया छूट कार्ड जारी करवा लेते थे।
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इस नई व्यवस्था के बाद विकलांग यात्रियों को अब यह भी सुविधा मिलेगी कि वे अपना टिकट अपने किराया छूट कार्ड के आईडी नंबर के जरिए ऑनलाइन ही बनवा सकेंगे। पहले यात्रियों को छूट वाला टिकट स्टेशन पर आकर ही प्राप्त होता था। मगर अब विकलांग टिकट भी ऑनलाइन ही बनवा सकेंगे। ये कार्ड पांच साल के लिए वैलिड होगा।
रेल मंडल, अंबाला के सीनियर डीसीएम प्रवीण गौड़ द्विवेदी बताते हैं कि रेलवे की ये नई व्यवस्था बहुत ही पारदर्शी योजना है। इससे विकलांग यात्रियों के किराया छूट कार्ड में होने वाले फर्जीवाड़ा न के बराबर हो जाएगा। ये कार्ड अब अब रेलवे स्टेशन की बजाए डीआरएम कार्यालयों में पूरी वेरीफिकेशन के बाद बनाए जाएंगे। स्पेशल रेलवे कर्मियों की टीम इस पर काम करेगी।