1971 के युद्ध में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ गजब की एक रणनीति अपनाई थी और दुश्मनों को धूल चटा दी थी। उस रणनीति का खुलासा अब हुआ है, जानिए।
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1971 का भारत पाक युद्ध
1971 में इंडो-पाक युद्ध के दौरान शकरगढ़ सेक्टर में इंडियन आर्मी के जवान छह टैंक लिए आगे बढ़ रहे थे। इन टैंकों की जिम्मेवारी थी कि पाकिस्तान द्वारा यहां तैयार की गई तीन माइन्स फील्ड को क्लीयर कर इंफेंटरी के लिए सेफ लाइन तैयार करना। दूसरा, पाकिस्तान के टैंकों को नेस्तनाबूद करना। इसके लिए इंडियन आर्मी ने एक खास रणनीति तैयार की थी।
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1971 का भारत पाक युद्ध
रणनीति के तहत इस काम के लिए जिन टी-55 टैंकों का इस्तेमाल किया गया। उन टैंकों पर ब्रिटेन निर्मित सेंचुरियन टैंक नकली बैरकें लगाई गईं। इसका मकसद था पाकिस्तान को डराना और युद्ध के दौरान अपने टैंकों की पहचान रखना। दरअसल, सेंचुरियन टैंक से पाकिस्तान बहुत खौफजदा था। इस टैंक का इस्तेमाल भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ सन 1965 की लड़ाई में किया था।
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1971 का भारत पाक युद्ध
यह युद्ध पंजाब के तरनतारन के पास स्थित आसल उताड़ क्षेत्र में लड़ा गया था और ये इंडो-पाक के बीच तीन दिन तक चलने वाला सबसे बड़ा टैंक युद्ध था। इस युद्ध में इंडिया ने इसी टैंक के बूते पाक 90 टैंकों को नेस्तनाबूद कर उसके घुटने टिकवा दिए थे। तभी से पाकिस्तान इस टैंक से डरने लगा था। सन 1971 के युद्ध में शकरगढ़ सेक्टर में हालांकि इस टैंक का इस्तेमाल तो नहीं किया गया।
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लेकिन युद्ध में इस्तेमाल हो रहे टैंक टी-55 पर सेंचुरियन टैंक बैरल लगाकर पाकिस्तानी जवानों और अफसरों के पसीने जरूर छुड़ाए गए। इस युद्ध का हिस्सा रहे रिटायर्ड कर्नल जेडीएस जींद के अनुसार ऐसा करना सेना की रणनीति का हिस्सा था। वह चंडीगढ़ में आयोजित मिलट्री लिटरेचर फेस्टिवल में आए हुए थे। यहां क्रू मेंबर ओमप्रकाश ने बताया कि छह टैंकों को पाकिस्तान द्वारा इस सेक्टर में बिछाई गई तीन माइंस फील्ड को क्लीयर करने का टास्क दिया गया था।
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दो ग्रुप में तीन-तीन टैंक शामिल थे और आगे बढ़ रहे थे। तभी शहबाजपुर (पाकिस्तान) के पास जब ये टैंक माइंस फील्ड को क्लीयर करते हुए आगे बढ़ रहे थे, तभी वहां घात लगाकर बैठे पाकिस्तान ने टैंकों पर ताबड़तोड़ हमला बोल दिया। दो टैंक क्षतिग्रस्त हो गए। शहबाजपुर सेक्टर की माइंस फील्ड को पूरी तरह क्लीयर कर वहां सेफ लाइन बना ली थी। तभी इस टैंक को भी वापस भारत की सीमा में लौटने के आदेश हुए।
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1971 का भारत पाक युद्ध
ओमप्रकाश ने तुरंत अपने टैंक को वापसी के लिए घुमाया तो पाकिस्तानियों के दो गोलों ने ओमप्रकाश के टैंक के दाहिने हिस्से को हिट कर दिया। टैंक में आग लग गई, फिर भी ओमप्रकाश का वापस का प्रयास जारी रहा। इसी अफरातफरी में वहां एक नाले की वजह से टैंक लड़खड़ाया और तीन पलटी खाते हुए उल्टा हो गया। टैंक की चार बैटरी व सारा एम्युनेशन ओमप्रकाश की छाती पर आ गिरा और उसकी सीट लॉक भी अटक गया।
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मालूम चलने पर दूसरे टैंक का क्रू मेहर सिंह तुरंत ओमप्रकाश के पास पहुंचा और ओमप्रकाश को निकालने का प्रयास किया। जब काफी समय बीत गया तो फंसे हुए टैंक क्रू ओमप्रकाश ने मेहर सिंह को उसे शूट कर वापस लौट जाने को कहा। ओमप्रकाश ने कहा कि वे मेहर सिंह के आने से पहले भी खुद को गोली मारने का प्रयास कर रहा था, लेकिन उसकी पिस्टल टैंक के नीचे फुट ब्रेक के पास पड़ी थी और वे फंसा होने के कारण नीचे नहीं जा रहा पा रहा था।
उनके अनुसार वह जिंदा पाक के हाथ नहीं लगना चाहता था। इसलिए उन्होंने अपने साथी मेहर को उन्हें शूट करने को कहा था। लेकिन कड़ी मशक्कत के बाद मेहर उसे निकालकर ले गया। उसके बाद संबंधित सेक्टर में इसी गजब रणनीति नए टैंक भेजे गए और 25 किमी पाकिस्तान के भीतर दसरी कैप्चर, चक अमरू व मरियाल इलाके को कब्जे में ले लिया गया।