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शहीद को मां और बेटी ने दिया कंधा, पत्नी से कहा था- सेना का नमक चुका सकूं तो मैं भाग्यशाली

Fri, 19 Jun 2020 09:55 AM IST
खुशबू गोयल संवाद न्यूज एजेंसी, गुरदासपुर (पंजाब)
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नम आंखों से दी गई शहीद को अंतिम विदाई। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
दो दिन पहले शहादत का जाम पीने वाले भारतीय सेना की तीन मीडियम रेजीमेंट के नायब सूबेदार सतनाम सिंह का गांव भोजराज में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। इससे पहले लेह से एयरलिफ्ट कर शहीद का पार्थिव शरीर चंडीगढ़ लाया गया और वहां सेना के उच्चाधिकरियों ने सभी शहीदों को रीथ चढ़ाकर सलामी दी। इसके बाद विशेष हेलीकॉप्टर से शहीद नायब सूबेदार सतनाम सिंह का तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर तिब्बड़ी कैंट लाया गया। 
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अंतिम विदाई में पहुंचे कैबिनेट मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा
यहां भी सेना के उच्चाधिकारियों ने शहीद को सलामी दी। इसके बाद सेना की विशेष गाड़ी से शहीद का पार्थिव शरीर गांव भोजराज लाया गया। जैसे ही शहीद नायब सूबेदार सतनाम सिंह का तिरंगे में लिपटा हुआ पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो सारे गांव में मातम पसर गया। शहीद की माता जसबीर कौर, पत्नी जसविंदर कौर व बेटी संदीप कौर को बिलखते देख हर आंख नम हो उठी। सेना की 1871 फील्ड रेजीमेंट के जवानों ने मेजर विनय पराशर के नेतृत्व में शहीद को शस्त्र उल्टे कर और हवा में गोलियां दागते हुए व बिगुल की मातमी धुन के साथ सलामी दी।  
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पंजाब सरकार की ओर से कैबिनेट मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा, जिला प्रशासन की ओर से डीसी मोहम्मद इशफाक, एसएसपी गुरदासपुर डॉ. रजिंदर सिंह सोहल, एसपी नवजोत सिंह संधू, एसपी दिलबाग सिंह, जिला परिषद के चेयरमैन रविनंदन सिंह बाजवा, पूर्व मंत्री सुच्चा सिंह छोटेपुर, पूर्व मंत्री मास्टर मोहन लाल व शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के महासचिव कुंवर रविंदर सिंह विक्की ने रीथ चढ़ाकर शहीद को सलामी दी। राज्यसभा सदस्य श्वेत मलिक भी शहीद को श्रद्धांजलि देने पहुंचे।

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शहीद नायब सूबेदार सतनाम सिंह की अर्थी को उनकी मां जसबीर कौर और बेटी संदीप कौर ने कंधा दिया। 18 वर्षीय बेटे प्रभजोत सिंह ने अपने पिता की चिता को मुखाग्नि दी। इस दौरान शहीद नायब सूबेदार सतनाम सिंह अमर रहे, भारतीय सेना जिंदाबाद, चीन सेना मुर्दाबाद के नारे लगे। शहीद की मां जसबीर कौर ने कहा कि मुझे बेटे के जाने का गम तो बहुत है मगर उसकी शहादत पर गर्व भी है। 
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वहीं शहीद की पत्नी जसविंदर कौर ने कहा कि जब वह अपने पति को फोन पर यह बात कहती कि कश्मीर में खतरा है अपना ध्यान रखना तो वे आगे से कहते कि जिस फौज का 24 साल नमक खाया है। अगर उसका कर्ज अपनी शहादत देकर चुका सका तो मैं खुद को सौभाग्यशाली समझूंगा। उनके पति हमेशा गरीबों की मदद करते थे। वे रिटायरमेंट के बाद अपने बुजुर्ग पिता जगीर सिंह के नाम पर एक वृद्धाश्रम बनवाना चाहते थे। 
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वर्दी पहन कर पापा के सपने को साकार करूंगा: प्रभजोत
शहीद सतनाम सिंह के बेटे प्रभजोत सिंह ने बताया कि पापा का सपना था कि मैं उनकी यूनिट में अफसर बनूं और वे मुझे सैल्यूट करें। साथ ही कहते थे कि वह अपनी बेटी को भी सेना में डॉक्टर बनाएंगे। पहले उनकी मंशा विदेश जाने की थी मगर पापा की शहादत के बाद उसका एक ही मकसद है कि वो वर्दी पहन व सेना में अफसर बनकर पापा के सपनों को साकार करे। इस दौरान शहीद की माता जसबीर कौर, पिता जगीर सिंह, पत्नी जसविंदर कौर, बेटी संदीप कौर, बेटा प्रभजोत सिंह व भाई सूबेदार सुखचैन सिंह ने भी पुष्प चक्र चढ़ाकर शहीद को आखिरी सलामी दी।
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