एक इंजीनियर ने देश का पहला वजन उठाकर ले जाना ड्रोन तैयार किया है, जो भारतीय सेना को समर्पित है। इसकी खूबियां जानकर पीएम मोदी भी चौंक जाएंगे।
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देश का पहला वजन उठाकर ले जाने वाला ड्रोन
जब मन मे कुछ कर गुजरने की तमन्ना हो तो कोई भी काम मुश्किल नहीं है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है फतेहाबाद के गांव फुलां के रहने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर अश्वनी सिहाग ने। अश्वनी ने एक ड्रोन तैयार किया है। अश्वनी के मुताबिक, अब तक दुबई में 90 किलो वजन उठाने वाला ड्रोन, जबकि यूएसए में 80 किलो वजन उठाने वाला ड्रोन बना है और भारत देश में इस तकनीक से लैस यह पहला ड्रोन है।
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देश का पहला वजन उठाकर ले जाने वाला ड्रोन
रविवार को अश्वनी ने इसका सफल परीक्षण किया। 5 लाख की लागत से बने इस ड्रोन को वे भारतीय सेना को समर्पित करना चाहते हैं। ये ड्रोन एक बार मे करीब 30-40 किलो वजन उठाकर 30 किलोमीटर तक जाने की क्षमता रखता है। 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से 2 किलोमीटर की ऊंचाई तक उड़ने वाला यह ड्रोन सुरक्षा के लिए और खेत में स्प्रे करने के लिए भी प्रयोग किया जा सकता है।
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देश का पहला वजन उठाकर ले जाने वाला ड्रोन
सैनिक स्कूल कुंजपुरा से पढ़ाई करने वाले इंजीनियर अश्वनी सिहाग काफी समय से ऐसा ड्रोन तैयार करना चाह रहे थे जो दुर्गम क्षेत्र सेना के लिए मददगार हो सके, आपातकालीन समय में कुछ भारी सामान मुश्किल जगह तक तुरंत पहुंचा सके। क्योंकि अश्वनी सिहाग के पिता भरत सिंह सिहाग एयरफोर्स में आईटी डिपार्टमेंट में नौकरी कर चुके हैं और इसलिए सेना की इन जरूरत को समझते हुए ऐसा ड्रोन तैयार करने की ठानी।
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देश का पहला वजन उठाकर ले जाने वाला ड्रोन
हालांकि इससे पहले सिक्योरिटी पर्पज से संबंधित कुछ ड्रोन अश्वनी सेना को बनाकर दे चुके हैं लेकिन दरकार थी एक ऐसे ड्रोन की जो कुछ वजन उठाकर ले जा सके। यू-ट्यूब के जरिए जानकारी हासिल कर आखिरकार अश्वनी सिहाग ने रविवार को वजन उठाने वाला ड्रोन का भी सफल परीक्षण कर लिया।
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देश का पहला वजन उठाकर ले जाने वाला ड्रोन
अश्वनी के मुताबिक 30 से 40 किलो वजन उठाकर ले जाने वाले इस ड्रोन की उड़ने की ऊंचाई की क्षमता करीब 2 किलोमीटर की है जबकि चलने की गति 60 किलोमीटर प्रति घंटा की है जो 30 किलोमीटर का सफर एक बार में तय कर सकता है। अश्वनी बताते हैं कि यह ड्रोन करीब 5 लाख रुपये कीमत में तैयार हुआ है जिसका फ्रेम उन्होंने भारत में ही तैयार किया जबकि बाकी इक्यूपमेंट्स (कलपुर्जे) इंग्लैंड, अमेरिका, चाइना जैसे अन्य कुछ देशों से मंगवाए हैं।
अश्वनी ने अपने परिवारजनों की ओर से इस काम के लिए समय दिए जाने के लिए आभार व्यक्त करते हुए तैयार हुए इस ड्रोन को भारतीय सेना को समर्पित किया है। गांव के मौजिज लोग व ग्र्रामीणों ने अपने गांव के बेटे अश्वनी सिहाग की इस उपलब्धि पर कहा कि देश के युवाओं को अश्वनी की तरह देश निर्माण में सहयोग करने के लिए प्रेरित होना चाहिए, हमें अश्वनी और उस जैसे नौजवानों पर गर्व है जो देश निर्माण के लिए ऐसे कार्य कर रहे हैं।