वर्दी पहनकर गया था बेटा, पर ये नहीं सोचा था कि तिरंगे में लिपट कर आएगा। यह कहते कहते मां बेसुध हो गई, देखिए शहीद परमजीत सिंह की अंतिम विदाई।
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पाकिस्तानी सेना की फायरिंग में मारे गए परमजीत सिंह
सोमवार को जम्मू कश्मीर के पूंछ जिले में पाकिस्तान की तरफ से हुई फायरिंग में शहीद हुए परमजीत सिंह का अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस मौके पर मां का रो रोकर इतना बुरा हाल था कि उन्हें देखकर सभी रो पड़े। श्रद्धांजलि देने के लिए पूरा गांव उमड़ा। वहीं शहीद के परिवार को 13 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान डीसी की तरफ से किया गया।
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पाकिस्तानी सेना की फायरिंग में मारे गए परमजीत सिंह
साल 2000 में भारतीय फौज में भर्ती हुए परमजीत सिंह की शहादत गर्व करने वाली मां जोगिंदर कौर की आंखों में बेटा खोने का दर्द साफ झलकता है, लेकिन पाकिस्तान ने शव के साथ जो बर्बरता की, वो उन्हें दोहरा दुख देती है। भरी आंखों से शहीद के पिता उधम सिंह कहते हैं कि उनका परमजीत दलेर था, परंतु ऐसा कभी भी नहीं सोचा था कि देश के लिए आपनी जान कुर्बान कर जाएगा।
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पाकिस्तानी सेना की फायरिंग में मारे गए परमजीत सिंह
वहीं परमजीत के शव के साथ पाकिस्तान ने जो बर्बरता की, उसके खिलाफ गांव वालों में गुस्सा भी देखने को मिला है। गांव के लोगों ने दुश्मनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। गांव वालों का कहना है कि पाकिस्तान भारतीय सैनिकों पर हमला करके मार देता है, परंतु उनके सिर काटकर ले जाने कोई बहादुरी नहीं है। अब गांव से जो सेना में जाएगा, परमजीत सिंह की शहादत का बदला लेने के लिए जाएगा।
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पाकिस्तानी सेना की फायरिंग में मारे गए परमजीत सिंह
शहीद के भाई रंजीत सिंह ने कहा कि गांव में ये पहली शहादत है। जिस पर हमें गर्व तो है, लेकिन दुख इस बात का है कि मोदी सरकार कुछ करने की क्षमता में नहीं। उन्होंने कहा कि जवानों को शहीद करके उनके सिरों को काट लिया जाता है। बावजूद इसके यदि भारतीय फौज चुप्प बैठे तो आने वाले समय में ओर नुकसान होगा। आए दिन पाकिस्तान द्वारा भारतीय जवानों को शहीद किया जा रहा है, लेकिन 56 इंच वाला सीना दिखाई नहीं देता।
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पाकिस्तानी सेना की फायरिंग में मारे गए परमजीत सिंह
परमजीत सिंह की शादी गांव लालपुरा निवासी परमजीत कौर के साथ हुई थी। उनके पिता उधम सिंह एक किसान हैं और उनके दो भाई भाई चरणजीत सिंह और रंजीत सिंह शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी में काम करते हैं। परमजीत के परिवार में तीन बच्चे हैं। परमजीत सिंह की 17 वर्षीय बड़ी बेटी सिमरनदीप कौर मैट्रिक, 13 वर्षीय बेटी खुशदीप कौर और 10 वर्षीय बेटा साहिलदीप सिंह श्री गोइंदवाल साहिब में पढ़ाई करते हैं।
पाकिस्तानी सेना की फायरिंग में मारे गए परमजीत सिंह
गांव के सरपंच रंजीत सिंह राणा ने बताया कि परमजीत सिंह 5 महीने पहले घर आया था। अब उसे 28 अप्रैल को छुट्टी पर आना था, लेकिन वे नहीं आए। क्योंकि उनके दोस्त को तुरंत छुट्टी चाहिए थी, इसलिए उन्होंने अपनी छुट्टी मई के दूसरे हफ्ते तक के लिए स्थगित कर दी थी। शायद किस्मत को यहीं मंजूर था, पर उस दोस्त को सारी जिंदगी परमजीत सिंह ये जिंदादिली याद रहेगी।