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चुनावों के बीच आतंक की आहट तो नहीं ये घटनाएं, क्यों चिंता में पंजाब

Thu, 02 Feb 2017 09:47 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना
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क्या है ब्लास्ट के मायने - फोटो : अमर उजाला
पंजाब में सियासी घमासान के बीच आतंक की आहट पंजाब की शांति के लिए चुनौती बन गई है। मंगलवार की देर शाम बठिंडा के मौड़ मंडी में हुए बम धमाके ने पंजाबियों की चिंता बढ़ा दी है।
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क्या है ब्लास्ट के मायने - फोटो : अमर उजाला
एक ओर इसमें सुरक्षा एजेंसियों की नाकामी सामने आ रही है वहीं दूसरी ओर राजनीति के दंगल में इस घटना पर सियासी दांव पेंच शुरू हो गए हैं। सुरक्षा एजेंसियां घटना की तह तक पहुंचने में जुट गईं हैं। अब सवाल यह है कि आखिर क्यों? एकदम से यह धमाका क्यों, वह भी तब जबकि विधानसभा चुनाव के चंद दिन बाकी हैं। वैसे, जिले की पुलिस की बात करें तो पिछले कई ऐसे मामले हैं जिसमें अब तक आरोपी गिरफ्त के बाहर हैं। 
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क्या है ब्लास्ट के मायने - फोटो : अमर उजाला
मौड़ मंडी का हादसा  तब हुआ है, जब प्रदेश में विस चुनावों के चलते चप्पे चप्पे पर पुलिस एवं अर्ध सैनिक बल तैनात हैं। बावजूद इसके हमलावरों का मौके पर पहुंचना और धमाका करना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। लोगों का मानना है कि राजनीतिक विरोध के बावजूद नेताओं को पंजाब की शांति में खलल डालने की कोशिशों को प्रोत्साहित नहीं करना चाहिए। 

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क्या है ब्लास्ट के मायने - फोटो : अमर उजाला
ये घटनाएं कुछ कहती है
गत वर्ष चार अप्रैल को नामधारी मुख्यालय श्री भैणी साहिब में गुरु माता चंद कौर की मोटरसाइकिल सवार दो युवकों ने गोलियां मारकर हत्या कर दी। आरोपियों को पकडने के लिए सरकार ने दस लाख और नामधारी दरबार ने बीस लाख का इनाम रखा है, बावजूद इसके अब तक आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। 24 अप्रैल 2016 को खन्ना में दो मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने शिव सेना  के पंजाब प्रधान दुर्गा गुप्ता को गोलियों से भून दिया था। इस हमले के आरोपी भी अभी कानून के शिकंजे से बाहर हैं। 
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क्या है ब्लास्ट के मायने
17  मई 2016 को सिख प्रचारक संत रंजीत सिंह ढडरियां वाले पर साउथ सिटी वाली सड़क पर छबील की आड़ में कातिलाना हमला किया गया। इसमें संत ढडरियां वाले बच गए, लेकिन उनके एक साथी की गोलियां लगने से मौत हो गई। हमलावरों ने कई किलोमीटर तक संत के काफिले का पीछा किया था।  इस हमले में हालांकि पुलिस ने कुछ लोगों को काबू किया था, लेकिन इसकी साजिश रखने वालों पर पुलिस अभी तक नहीं पहुंच पाई है।
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क्या है ब्लास्ट के मायने
17 जनवरी 2017 को लुधियाना में जगरांव पुल के नजदीक हिंदू नेता अमित शर्मा पर बुलेट मोटरसाइकिल पर सवार दो हमलावरों ने गोलियां चला दीं। इससे अमित की मौत हो गई। इस मामले में भी पुलिस मुख्य आरोपियों तक नहीं पहुंच पाई है। हमले के तुरंत बाद पंजाब के डीजीपी ने आतंकी घटना होने से इंकार नहीं किया था। छह अगस्त को जालंधर में आरएसएस के सह सरसंघ चालक ब्रिगेडियर जगदीश गगनेजा को गोलियां मारी गई थी, उनकी 47 दिन बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। इस हमले के आरोपियों का भी आज तक सुराग नहीं लगा है।
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