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अब न 'बाला' न 'उजड़ा चमन', गंजेपन का है असरदार इलाज, पांच क्लिक में जानिए नुस्खे और थेरेपी

Mon, 11 Nov 2019 11:42 AM IST
खुशबू गोयल आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
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आमतौर पर लोग गंजेपन को बीमारी नहीं समझते, जबकि बालों का गिरना चिंताजनक समस्या है। हालांकि इसका असरदार इलाज संभव है, लेकिन सटीक जानकारी जरूरी है।
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लोगों को लगता है कि बालों का गिरना एक सामान्य प्रक्रिया है। रोज 20-30 बाल गिरें तो भी कोई परेशानी वाली बात नहीं है, मगर एक दिन में 100 से ज्यादा बाल गिरते हैं तो इसे बीमारी माना जाएगा। इस स्थिति में किसी विशेषज्ञ के पास जाना होगा। दिक्कत यही है कि लोग जाना नहीं चाहते हैं। यदि जाते हैं तो उन्हें पता नहीं होता कि वे किसके पास जाएं? कोई रास्ता नहीं दिखने पर वे हेयर ट्रांसप्लांट की ओर मुड़ जाते हैं। मगर यहां पर उन्हें धोखा ही मिलता है। अनुभवी सर्जन न होने की वजह से उनके पैसों की बर्बादी होती है। इस विशेष रिपोर्ट में सभी सवालों के जवाब विस्तार से मिलेंगे।
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क्यों गिरते हैं बाल
केमिकल युक्त दुनिया में बालों का झड़ना आम बात है। एक इंसान के सिर पर एक लाख के करीब बाल हो सकते हैं और प्रत्येक बाल का जीवन एक से चार साल तक होता है। सीनियर डेरमेटोलॉजिस्ट (त्वचा रोग विशेषज्ञ) डॉ. आभा भटनागर के मुताबिक, पुरुष और महिलाएं दोनों के बाल झड़ते हैं। दोनों में बाल झड़ने के कुछ कारण एक जैसे होते हैं तो कुछ अलग। महिलाओं में पीसीओडी, एनिमिया, थायराइड, जबकि पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन और डिहाइड्रोटेस्टोस्टेरोन जैसे हार्मोन की मात्रा में वृद्धि होना मुख्य कारण होते हैं। तनाव, जेनेटिक व हार्मोन असंतुलन होने से दोनों के बाल झड़ते हैं।

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इलाज कैसे होता है
डॉ. आभा के मुताबिक, मरीज के आने पर पहले उसकी जांच करते हैं। आयरन, हीमोग्लोबिन और हार्मोन संतुलन की जांच करवाते हैं। डाइट और मरीज की हिस्ट्री पूछी जाती है। उसके बाद बालों के झड़ने के रोकने की दवाई देते हैं। नियमित व्यायाम, बैलेंस डाइट और तनाव से दूर रहने की सलाह दी जाती है। यदि दवाओं से बाल झड़ना नहीं रुकता है तो दूसरी थेरेपी दी जाती हैं। आजकल कई ऐसी थेरेपी हैं, जो हेयर ग्रोथ को विकसित करते हैं।
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दवाओं के अलावा ये थेरेपी भी कामयाब
बालों को झड़ने से रोकने में माइक्रोनीडलिंग थेरेपी काम आती है। इसे सुई व होम रोलर की मदद से किया जाता है। इससे हेयर ग्रोथ होती है और बालों का झड़ना बंद होता है। नए बालों का भी विकास होता है। एक और प्रक्रिया है, जिससे बालों के गिरने को रोकने में मदद मिलती है। इस विधि को प्लेटलेट रिच प्लाज्मा (पीआरपी) कहते हैं। इसमें मरीज का ब्लड निकालते हैं। ब्लड से ग्रोथ फैक्टर (प्लेटलेट्स व प्लाज्मा) को अलग करते हैं। ग्रोथ फैक्टर में प्लेटलेट रिच प्लाज्मा को तैयार करते हैं और कुछ देर बाद उसे सिर की खाल में डालते हैं। इससे हेयर ग्रोथ बढ़ती है और फायदा नजर आने लगता है।
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हेयर ट्रांसप्लांट भी एक विकल्प
जब सारी कवायद फेल हो जाती हैं तो लोगों के सामने हेयर ट्रांसप्लांट ही विकल्प के तौर पर बचता है। लेकिन हेयर ट्रांसप्लांट जानलेवा हो सकता है। अनुभवहीन सर्जन से ट्रांसप्लांट कराने से लेने-देने पड़ सकते हैं। ट्रांसप्लांट से पहले डॉक्टर की क्वालिफिकेशन और उसका अनुभव देखना जरूरी है। हेयर ट्रांसप्लांट एक सर्जिकल प्रक्रिया है। इसमें सिर के पीछे और साइड से बाल लेकर गंजेपन वाले भाग में लगाए जाते हैं। इन बालों को आने में तीन से चार महीने का समय लगता है। उसके बाद वास्तविक बाल आते हैं। ट्रांसप्लांट के दौरान दाढ़ी व छाती के बाल भी लगाए जा सकते हैं, लेकिन जिस बाल का जैसा नेचर होगा, सिर में उसी प्रकार से आएंगे। चाहे व्यक्ति बूढ़ा हो या गंजा, उसके सिर के पीछे और साइड में बाल जरूर होते हैं। इसे परमानेंट हेयर जोन कहते हैं। आमतौर पर यहीं से बाल निकालकर लगाए जाते हैं।
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हेयर ट्रांसप्लांट के लिए ये जरूरी बातें जानें
विशेषज्ञों का कहना है कि हेयर ट्रांसप्लांट के लिए उपयुक्त डॉक्टर सिर्फ प्लास्टिक सर्जन हैं। प्लास्टिक सर्जन के पास तीन साल सर्जरी और फिर तीन साल प्लास्टिक सर्जरी का अनुभव होता है। ट्रांसप्लांट के दौरान व्यक्ति को बेहोश करना होता है। कई बार अन्य दिक्कतें आ सकती हैं तो सेंटर में ऑपरेशन थियेटर (ओटी) का सेटअप होना चाहिए। टेक्नीशियन व ओटी में प्रयोग आने वाले सभी सामान होने चाहिए।

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हेयर ट्रांसप्लांट के लिए इन बातों का ध्यान रखें
हेयर ट्रांसप्लांट के लिए प्लास्टिक सर्जन को चुनें। क्लीनिक के सेटअप को जानें, इमरजेंसी सेवाएं हैं या नहीं इसकी पड़ताल करें। डॉक्टर खुद ट्रांसप्लांट करता है या फिर अपने स्टाफ से करवाता है। रिजल्ट के लिए कम से कम चार महीने तक इंतजार करें। एक हेयर ट्रांसप्लांट में कम से कम छह से आठ घंटे का वक्त लगता है। एक दिन में एक ही हेयर ट्रांसप्लांट संभव है। 20 से 70 साल की उम्र तक व्यक्ति के हेयर ट्रांसप्लांट किए जा रहे हैं। हेयर ट्रांसप्लांट के बाद कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। 45 से 50 साल के ऊपर के मरीजों की कुछ अतिरिक्त जांच कराई जाती हैं।
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बाल झड़ना ठीक हो सकता है, लेकिन लोग इसे एक स्वभाविक प्रक्रिया मानते हैं और इलाज कराने नहीं आते। जबकि मौजूदा वक्त में काफी एडवांस दवाइयां और थेरेपी हैं, जिनकी मदद से बालों का गिरना रोका जा सकता है।
- डॉ. आभा भटनागर, द स्किन सोल्यूशन एमकेयर प्लाजा वीआईपी रोड जीरकपुर

हेयर ट्रांसप्लांट एक सफल प्रक्रिया है। इसमें बाल पूरी तरह से प्राकृतिक आते हैं। इसका कोई भी साइड इफेक्ट नहीं होता है, मगर अनुभवी डॉक्टर से ही हेयर ट्रांसप्लांट करवाएं।
- डॉ. सुनील गाबा, एडिशनल प्रोफेसर, प्लास्टिक सर्जन पीजीआई
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