पाकिस्तान ही फायरिंग में शहीद हुए बीएसएफ के हेडकांस्टेबल राय सिंह की पत्नी उनकी शहादत की खबर मानने को तैयार नहीं है। देखिए, ये रिपोर्ट।
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राजौरी में हरियाणा का हेड कांस्टेबल राय सिंह शहीद
सुनीता पति की शहादत की खबर सुनकर बेहोश हो गईं। महिलाओं ने बड़ी मुश्किल से उन्हें संभाला। सुनीता बार-बार यही कहती रही कि नहीं, यह खबर झूठी है, उनका पति हर हाल में आएगा। वहीं, जब गांव वालों ने शहीद के घर के सामने चौपाल में राय सिंह अमर रहे के नारे लगाए तो यह सुनकर शहीद की बूढ़ी मां चंद्रा देवी भी बेहोश हो गईं। इस समय तक मां को बेटे की शहादत की जानकारी नहीं थी।
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राजौरी में हरियाणा का हेड कांस्टेबल राय सिंह शहीद
वहीं, राय सिंह के शहीद होने की खबर उनके गांव खेड़ी सांपला में जैसी ही पहुंची गांव गम में डूब गया। हर कोई शहीद के परिजनों को सांत्वना देने के लिए पहुंचने लगा। देर शाम तक शहीद के घर शोक संवेदना जताने वालों का तांता लगा रहा। गांव वालों और परिजनों को इस बात पर गर्व था कि उनका बेटा देश के लिए शहीद हुआ है। सुबह से शाम तक परिजन व ग्रामीण शहीद के पार्थिव शरीर का इंतजार करते रहे।
बाद में बीएसएफ मुख्यालय से सूचना मिली कि देर शाम तक शहीद का पार्थिव शरीर गांव पहुंच पाएगा। शाम को खबर आई कि पार्थिव शरीर दिल्ली आ गया है। वहां से मंगलवार सुबह गांव लाया जाएगा। सुबह करीब 10 बजे राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर दस स्थित बहुतकनीकि संस्थान के सामने नगर पालिका की जमीन पर शहीद का अंतिम संस्कार किया जाएगा। परिजनों की मांग है कि उसी स्थान पर शहीद का स्मारक बनाया जाए।
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राजौरी में शहीद हुए हरियाणा के हेड कांस्टेबल राय सिंह
रविवार देर रात पाकिस्तान की ओर से सीजफायर का उल्लंघन कर की गई फायरिंग में सीमा पर गश्त कर रहे गांव खेड़ी सांपला निवासी बीएसएफ के हवलदार राय सिंह गोली लगने से शहीद हो गए। बताया गया कि परिजनों को रात करीब 12 बजे ही राय सिंह के घायल होने की सूचना मिल गई थी। सुबह जब लोगों ने टीवी पर राय सिंह के शहीद होने की खबर देखी तो उनके घर के बाहर ग्रामीणों का हुजूम लग गया।
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राजौरी में शहीद हुए हरियाणा के हेड कांस्टेबल राय सिंह
हर किसी की आंखें नम थीं। शहीद के भाई रमेश ने बताया कि राय सिंह जुलाई में घर आया था। ड्यूटी पर जाते समय जल्द घर आने का वादा किया था। दलित गरीब परिवार से संबंध रखने वाले राय सिंह चार भाई हैं। शहीद हुए राय सिंह के परिवार में सात भाई-बहन थे। इनमें सबसे बड़ी बहन प्रेमो, भाई करतार सिंह, बहन राजवंती, भाई रमेश कुमार, भाई भूप सिंह, राय सिंह, बहन मुकेश समेत मां चंद्रो देवी सहित परिवार में सात सदस्य थे।
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राजौरी में हरियाणा का हेड कांस्टेबल राय सिंह शहीद
शहीद राय सिंह ने अपनी शुरूआती पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल में की थी। साल 1992 में एएफसी संस्था के स्कूल से दसवीं की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद हसनगढ़ आईटीआई से पढ़ाई पूरी की। साल 1993 में एमडीयू में दाखिला लेने के बाद पढ़ाई करते समय ही साल 1995 में बीएसएफ में भर्ती हो गए।
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राजौरी में शहीद हुए हरियाणा के हेड कांस्टेबल राय सिंह
राजोरी में शहीद हुए राय सिंह की शादी साल 1999 में महम खंड के मातो भैणी गांव की सुनीता के साथ हुई थी। शहीद के परिवार में पत्नी के अलावा 85 साल की बूढी मां चंद्रो देवी और 3 बेटे हैं। बड़ा बेटा हितेष 10वीं कक्षा में पढ़ता है। दूसरा बेटा कर्मबीर 9वीं कक्षा में पढ़ रहा है। तीसरा पुत्र पारस 6वीं कक्षा में पढ़ रहा है। तीनों बेटै खेड़ी सांपला के प्रज्ञा हाई स्कूल में पढ़ते हैं।
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राजौरी में शहीद हुए हरियाणा के हेड कांस्टेबल राय सिंह
शहीद राय सिंह की रविवार देर शाम पूरे परिवार के साथ बात हुई थी। शहीद के बडे़ बटे हितेष ने बताया कि पापा के साथ कल देर शाम को बात हुई थी। हितेष ने पूछा था कि पापा घर कब आ रहे हो? इस पर राय सिंह ने कहा था कि बेटा तीन-चार दिन बाद घर आ रहा हूं। घर आने के बाद नई दिल्ली प्रगति मैदान घुमाने ले जाऊंगा।
राजौरी में शहीद हुए हरियाणा के हेड कांस्टेबल राय सिंह
जवान के शहीद होने की सूचना होने के बावजूद तकरीबन छह घंटे तक प्रशासन का कोई अधिकारी शहीद के घर नहीं पहुंचा। सीआईडी चीफ को इस बारे में बताया गया तो प्रशासन हरकत में आया। इसके बाद तहसीलदार सांपला, एसएचओ सांपला सहित खंड स्तर के अधिकारी शहीद के घर पहुंचे। शहीद के परिजनों से यह कहते नजर आए कि यह मेरा नंबर है, कोई बात हो तो फोन करके बता देना। शाम को एसडीएम मुनीष नागपाल पहुंचे।