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शहादत को सलाम: गर्दन में गोली लगने पर भी एक दिन जिंदा रहा जांबाज

Wed, 26 Oct 2016 10:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कुरुक्षेत्र
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गर्दन में गोली लगने पर भी एक दिन जिंदा रहा जांबाज
दुश्मनों की गोलियों का मुंहतोड़ जवाब देते हुए शहीद हुए पिहोवा के सुशील कुमार की गर्दन में गोली लगी थी। आज उनका अंतिम संस्कार होगा।
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शहीद जवान सुशील कुमार
शहीद जवान सुशील कुमार भारतीय सीमा सुरक्षा बल की 127 वीं बटालियन में जम्मू की आरएसपुरा सेक्टर में तैनात थे। पैंतालीस वर्षीय सुशील कुमार पिछले चौबीस वर्षों से बीएसएफ में तैनात थे। शहीद जवान अपने पीछे पत्नी सुनीता, बारहवीं में पढ़ने वाला बेटा मोहित व दसवीं में पढ़ने वाली बेटी महक व बूढ़ी मां सोमादेवी को छोड़ गये हैं।
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एलओसी पर फायरिंग में शहीद हुआ बीएसएफ जवान सुशील कुमार
शहीद हेडकांस्टेबल सुशील के भाई संजय के मुताबिक पाकिस्तान की ओर से जम्मू के आरएस पुरा सेक्टर पर रात करीब 11 बजे गोलीबारी शुरू की गई। करीब डेढ़ घंटे तक बीएसएफ के जांबाजों ने भी दुश्मनों की गोलीबारी का पूरा जवाब दिया। उस वक्त शहीद सुशील की मां को नहीं पता था कि वो बेटे से आखिरी बार बात कर रही हैं।

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एलओसी पर फायरिंग में शहीद हुआ बीएसएफ जवान सुशील कुमार
जब सुशील ने मां से फोन पर बात शुरू की तब उसने गोलीबारी की आवाज सुन ली। उसने बेटे से पूछा कि यह आवाजें कैसी हैं? तब सुशील कुमार ने कहा कि मां आप लोग तो कुछ दिनों बाद दिवाली मनाओगे हम अभी से दिवाली मना रहे हैं दुश्मनों के साथ। यह पटाखों की आवाज है। बाद में उसके शहीद होने की ही खबर मिली।
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गर्दन में गोली लगने पर भी एक दिन जिंदा रहा जांबाज
सुशील कुमार ने देश के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी आज कुरुक्षेत्र के पिहोवा गांव में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। गौरतलब है कि सोमा देवी पिछले लंबे वक्त से बीमार हैं। परिवार का रो रो कर बुरा हाल है, सुशील की पत्नी बेसुध हैं, सुशील के दोनों बच्चों के पास पिता की यादों के सिवा अब कुछ नहीं बचा है।
 
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गर्दन में गोली लगने पर भी एक दिन जिंदा रहा जांबाज
सुशील कुमार 1992 में बीएसएफ में देश की सेवा के सपने के साथ शामिल हुए थे। 47 साल के सुशील ने आखिरी सांस तक दुश्मनों से लोहा लिया। पाकिस्तानी रेंजर्स ने जम्मू जिले की अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर 25 बॉर्डर पोस्टों पर सीजफायर तोड़ते हुए भारी गोलाबारी की। कांस्टेबल सुशील कुमार इसी गोलीबारी में शहीद हो गए।
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गर्दन में गोली लगने पर भी एक दिन जिंदा रहा जांबाज
पाकिस्तानी सैन्य बलों की तरफ से की गई फायरिंग में शहीद बीएसएफ हेड कॉन्स्टेबल सुशील कुमार का शव मंगलवार को उनके गृहनगर लाया गया। वह हरियाणा, कुरूक्षेत्र के पहोवा के रहने वाले थे। बीएसएफ की तरफ से शहीद सुशील कुमार को श्रद्धांजलि दी गई है, वहीं आज पैतृक नगर में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा.

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एलओसी पर फायरिंग में शहीद हुआ बीएसएफ जवान सुशील कुमार
रविवार को जम्मू के आरएसपुरा सेक्टर में पाकिस्तान की ओर से हुई फायरिंग में सुशील शहीद हो गए। उनकी गर्दन में गोली लगी थी। इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां सोमवार को उन्होंने दम तोड़ दिया।  फायरिंग के दौरान पाकिस्तान रेंजर्स ने 20 से ज्यादा बीएसएफ पोस्टों को अपना निशाना बनाया। 
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एलओसी पर फायरिंग में शहीद हुआ बीएसएफ जवान सुशील कुमार
गौरतलब है कि पाकिस्तान की तरफ से आरएसपुरा, अखनूर, पुलवामा और पर्गवाल सेक्टरों पर रविवार देर रात फायरिंग की गई। आसपास के गांवों को खाली करा लिया गया था। वहीं हीरानगर के बाबुआ सेक्टर में हुई फायरिंग के दौरान गुरमान सिंह घायल हो गए थे। गुरमान ने एक आतंकी सहित 7 पाकिस्तानी रेंजर्स को मार गिराया था।
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