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जाट हिंसा में हरियाणा तबाह, बचे हैं सिर्फ बेबसी के आंसू

Sat, 27 Feb 2016 01:44 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुए उपद्रव की आग में लोगों ने भाईचारा ही नहीं खोया, रोजी-रोटी का सहारा भी गंवा दिया। देखिए, बर्बादी के निशा बयां करती तस्वीरें।
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जाट हिंसा में हरियाणा तबाह, बचे हैं सिर्फ बेबसी के आंसू

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जिस कारोबार को खड़ा करने में पीढ़ियां खप गईं, वो उन्माद के तूफान में तिनके की तरह उड़ गया। बचे हैं तो सिर्फ बेबसी, लाचारी के आंसू और नफरत। घृणा और नफरत उनके खिलाफ है जिन्होंने चमन को उजाड़ दिया, गुस्सा उन पर भी जो उनकी बर्बादी को तमाशबीन होकर देखते रहे। सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी का सहारा छिन गया। ...कल तक जो मालिक थे आज वो राख के ढेर पर बैठे अपनी बेबसी को कोस रहे हैं। उनकी बेबसी नेताओं पर गुस्सा बनकर फूटी।
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रोहतक में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर व्यापारियों की पीड़ा सुनने आए तो लोगों ने मुर्दाबाद के नारे लगाए और काले झंडे दिखाए। सीएम मुआवजे का आश्वासन देते रहे, नाकारा अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा भी दिया, उन्मादियों को न बख्शने की बात कही, लेकिन जातीय हिंसा की आग में सब कुछ खो चुके इन लोगों का गुस्सा कम न हुआ। आखिरकार सीएम को बीच में ही भाषण छोड़कर जाना पड़ा।

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दिल्ली में भूख हड़ताल छोड़कर पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हु्ड्डा भी शहरवासियों की पीड़ा जानने रोहतक आए। गुस्साए लोगों ने उनके आवास पर प्रदर्शन किया। भीड़ में से उन पर किसी ने जूता फेंक दिया। आखिरकार पुलिस को सुरक्षा कारणों का हवाला देकर हुड्डा को वापस दिल्ली जाने को कहना पड़ा। उधर, रोहतक में धरने पर बैठे व्यापारियों को सांत्वना देने पहुंचे पूर्व विधायक बीबी बतरा को व्यापारियों ने उलटे पांव भगा दिया।
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जिदंगी भर की कमाई थी यह दुकान। एक-एक पैसा जोड़ कर, कर्ज लेकर परिवार को आर्थिक मदद देने के लिए शुरू की थी दुकान। कुछ दिन पहले तक यही दुकान दो बच्चों की पढ़ाई और घर के लिए आसरा बनी हुई थी, लेकिन अब यह आसरा, आसरा नहीं रहा, राख के ढेर में तब्दील हो चुका है। कुछ लोगों के उन्माद ने राख कर दिया 8 वर्षों से रोटी दे रही इस दुकान को। यह दर्द डी-पार्क के पास स्थित लेडिज आइटम्स की दुकान संचालिका ग्रीन कॉलोनी निवासी सीमा का है।
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ऐसा ही दर्द पास की दुकान के मालिक का भी है। रमन गुप्ता पिछले 18 वर्षों से ऑर्चिस गैलरी चलाते रहे, लेकिन अब उन्हीं की खुशियों पर ग्रहण लग गया। रमन ने बताया कि शनिवार को कुछ लोगों ने उनकी खुशियों में भी आग लगा दी। घर का चूल्हा जलाने वाली यह दुकान, खुद ही जल गई। ऐसा किसने किया? क्यों किया ? यह सवाल अब बेमानी है, लेकिन अब क्या होगा? कैसे होगा? घर कैसे चलेगा? यह सवाल मौत की तरह सामने खड़ा है।
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उपद्रवियों ने 20 फरवरी की दोपहर बैंक्वेट हॉल तिलियार को निशाना बनाया। टूरिस्ट ऑफिसर चंद्रभान, अकाउंटेंट क्लर्क उमेश कुमार और काउंटर इंचार्ज राकेश का कहना है कि अचानक रिसोर्ट में करीब 100 से अधिक उपद्रवी घुस गए। उन्होंने कार्यालय और रिसोर्ट का कोई भी हिस्सा ऐसा नहीं छोड़ा जहां तोड़फोड़ न की हो। यहां तक कि उपद्रवी बार में रखी शराब भी लूटकर ले गए। लगभग पांच मिनट के इस उपद्रव में तिलियार को करीब 20 लाख का नुकसान हुआ है।

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मकड़ौली टोल प्लाजा पर भी उपद्रवियों ने जमकर उत्पात मचाया। एनएच 71ए हाइवे पर टोल वसूली के लिए बने 7 बूथों में तोड़फोड़ कर आग लगा दी गई। इसके अलावा बिल्डिंग, क्रेन और एंबुलेंस आदि को भी नहीं बख्शा गया। टोल प्लाजा के सीजीएम मेजर सतानंद चौहान ने बताया कि उपद्रवियों के कारण लगभग 6 करोड़ का नुकसान हुआ है। पिछले चार दिनों से टोल वसूली भी नहीं हो रहा। इसमें हर दिन करीब 13 लाख रुपये का नुकसान हो रहा है।
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बोहर गांव स्थित एमआर डीएवी इंस्टीट्यूट को भी निशाना बनाया गया। उपद्रवियों ने इंस्टीट्यूट को खाक में मिला दिया। यहां तक इंस्टीट्यूट के अंदर चल रहा मंदबुद्धि बच्चों का स्कूल भी न बच सका। इंस्टीट्यूट के डिप्टी डायरेक्टर वैभव जिंदल का कहना है कि इंस्टीट्यूट 1998 से चल रहा था। पिता शिवकुमार जिंदल ने कड़ी मेहनत के साथ इस इंस्टीट्यूट को खड़ा किया था, लेकिन इस उपद्रव में लगभग डेढ़ करोड़ रुपये का नुकसान हो गया।
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