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यहां देखें हरियाणा का नया मंत्रिमंडल, कमलेश अकेली महिला मंत्री तो एक निर्दलीय को भी मिली जगह

Fri, 15 Nov 2019 11:32 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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- फोटो : अमर उजाला
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हरियाणा की नई सरकार का पहला मंत्रिमंडल विस्तार हो चुका है। वरिष्ठ भाजपा नेता अनिल विज समेत 10 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली है । इन 10 मंत्रियों में आठ भाजपा और एक जजपा व एक निर्दलीय विधायक शामिल हैं। आइए एक नजर डालते हैं हरियाणा सरकार के नए मंत्रियों पर...

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अनिल विज - फोटो : अमर उजाला
1- अनिल विज की प्रोफाइल
  • अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से एसडी कालेज में पढ़ते हुए छात्र राजनीति की शुरुआत की।
  • 1970 में पहली बार एबीवीपी के महासचिव बने।
  • 1974 में स्टेट बैंक आफ इंडिया में नौकरी ज्वॉइन की।
  • 1990 में विधायक सुषमा स्वराज को यहां से राज्यसभा में मनोनीत करने के कारण यह सीट खाली हुई।
  • 1991 में नौकरी से इस्तीफा देकर पहला चुनाव भाजपा की टिकट से लड़ते हुए जीत दर्ज कराई।
  • जीतने के बाद भारतीय जनता युवा मोर्चा का स्टेट प्रधान बनाया गया।
  • पार्टी से संबंध खराब होने के बाद 1996 फिर 2000 में आजाद उम्मीदवार खड़े हुए और जीत दर्ज की।
  • 2005 में कांग्रेस के देवेंद्र बंसल से थोड़े से मार्जन से हार गए।
  • 2009 में दोबारा भाजपा ज्वाइन की और छावनी विधानसभा सीट से चौथी बार विधायक बने। 
  • 2014 में भाजपा ने इन पर फिर भरोसा दिखाया और विज यहां से जीतकर स्वास्थ्य मंत्री बने।
  • 2019 में छठी जीत के साथ उनका कद भी बढ़ गया और गृह, स्वास्थ्य के साथ कई मंत्रालय विज को दे दिए गए।

- फोटो : अमर उजाला
2-कंवर पाल गुर्जर
कंवर पाल गुर्जर को इस बार हरियाणा कैबिनेट में जगह मिल गई है। हालांकि पिछली बार उन्हें स्पीकर पद से ही संतोष करना पड़ा था। यमुनानगर जिले की जगाधरी सीट से इस बार कंवरपाल चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। अनिल विज के बाद शपथ लेने वाले वे दूसरे मंत्री हैं। इनकी गिनती हरियाणा के बड़े भाजपा नेताओं में होती है। उन्होंने पूर्व डिप्टी स्पीकर अकरम को मात दिया। कंवर पाल 1990 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए और अपने राजनीतिक करियर की शुरूआत की। वे दो बार यमुनानगर जिले के महासचिव भी रह चुके हैं। 1991 में छछरौली विधानसभा से पहला चुनाव लड़ा। कंवरपाल गुर्जर का जन्म 8 मई 1960 को यमुनानगर के बहादुरपुर गांव में हुआ। इनका साधारण किसान परिवार से ताल्लुक है। 

3- मूलचंद शर्मा
मूलचंद शर्मा भाजपा के टिकट पर दूसरी बार चुनाव जीते हैं। पहली बार इन्होंने कांग्रेस के लखन सिंगला को हराया था और इस बार आनंद कौशिक को मात देने में कामयाब रहे। बल्लभगढ़ से विधायक मूलचंद शर्मा पिछली सरकार में शिक्षा मंत्री रहे राम विलास शर्मा के समधी हैं। बता दें कि रामबिलास शर्मा को इस बार चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है।

4- डॉ. बनवारी लाल
  • बावल विधानसभा की आरक्षित सीट से लगातार दूसरी बार विधायक बने। 
  • प्रदेश में पहली बार बनी भाजपा की सरकार में जन स्वास्थ्य राज्य मंत्री रहे।
  • इस बार प्रमोशन मिला और कैबिनेट मंत्री बनने में कामयाब रहे। 
  • मूल रूप से नारनौल निवासी हैं, लेकिन लंबे समय से बावल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बतौर एसएमओ कार्यरत रहे। 
  • सरकारी नौकरी छोड़कर बावल में ही लंबे समय से राजनीति करने के साथ अस्पताल चला रहे थे। 
  • 2014 लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस छोड़कर राव इंद्रजीत के साथ भाजपा में शामिल हो गए थे। 
  • राव इंद्रजीत की बदौलत ही भाजपा का टिकट मिला था।
  • राव इंद्रजीत समर्थक माने जाते हैं। 

5- रणजीत सिंह चौटाला
हरियाणा कैबिनेट विस्तार में रणजीत सिंह चौटाला की शानदार लॉटरी लगी। मनोहर की नई कैबिनेट में शामिल होने वाले एकमात्र निर्दलीय विधायक हैं। रणजीत सिंह चौटाला इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला के भाई हैं। दुष्यंत चौटाला के बाद मंत्री पद की शपथ लेने वाले चौटाला परिवार के दूसरे सदस्य हैं।

रणजीत सिंह चौटाला हरियाणा की रानियां विधानसभा सीट से चुनाव जीत कर विधानसभा पहुंचे। रणजीत चौटाला पूर्व उप प्रधानमंत्री देवीलाल के पुत्र हैं। रणजीत चौटाला इस बार निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर जीते हैं और सबसे पहले भाजपा को अपना समर्थन दिया था। शायद मंत्री पद इसी का इनाम है।

चौटाला परिवार से ताल्लुक रखने वाले रणजीत की रानियां में खासी पहचान है। बता दें कि रणजीत चौटाला इससे पहले भी मंत्री रह चुके हैं। हालांकि इस बार वो लंबे अरसे के बाद कोई चुनाव जीते हैं। कांग्रेस से टिकट कटने पर वे निर्दलीय मैदान में उतरे और हरियाणा लोकहित पार्टी के गोविंद कांडा को 19431 वोट से हराया।

6- अनूप धानक
चुनाव से पहले इनेलो छोड़ जजपा का दामन थामने वाले अनूप धानक की लॉटरी निकल पड़ी। हरियाणा कैबिनट में अब मंत्री पद की जिम्मेदारी संभालेंगे। अनूपधानक तीसरी बार उकलाना विधानसभा सीट से विधायक बने हैं। इस बार उन्होंने जेजेपी प्रत्याशी के तौर पर भाजपा उम्मीदवार आशा खेदड़ को मात दी। बता दें कि चुनाव से पहले इनेलो के जिन चार विधायकों ने जेजेपी पर अपनी आस्था दिखाई थी उनमें अनूप धानक का भी नाम शामिल था।

7- कमलेश ढांडा
कमलेश ढांडा हरियाणा सरकार के पहले मंत्रिमंडल विस्तार में मंत्री पद की शपथ लेने वालीं इकलौती महिला विधायक हैं। कमलेश ढांडा का नाम पहले से राजनीतिक हलकों में मंत्री पद के लिए चर्चा में था। वे कलायत विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचीं हैं। कमलेश ने दिग्गज नेता जयप्रकाश को शिकस्त दी। इसी का तोहफा उन्हें राज्यमंत्री स्वंतंत्र प्रभार के रूप में मिला है। बता दें कि जयप्रकाश कलायत क्षेत्र के एक प्रभावशाली नेता हैं। पिछले बार वे यहां से निर्दलीय विधानसभा का चुनाव जीते थे।

संदीप सिंह - फोटो : अमर उजाला
8- संदीप सिंह
हरियाणा की पेहोवा सीट से चुनाव जीतने वाले पूर्व भारतीय हॉकी टीम के कप्तान संदीप सिंह की किस्मत खुल गई। वे हरियाणा में राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार की शपथ ली। संदीप सिंह चुनाव जीतने वाले इकलौते खिलाड़ी हैं। इसका फायदा भी उन्हें मिला। संदीप सिंह का जन्म 27 फरवरी 1986 को हरियाणा में कुरुक्षेत्र जिले के शाहबाद में हुआ है। वह भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान हैं। भारतीय हॉकी के ड्रैग फ्लिकर संदीप को पेनाल्टी कार्नर विशेषज्ञ के रूप मे जाना जाता है। हॉकी में विशेष उपलब्धियों के लिए भारत सरकार ने संदीप को 2010 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया था। डीएसपी के पद से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गए। फिल्म निर्माता शाद अली ने संदीप सिंह के जीवन पर सूरमा नाम की एक फिल्म बनाई है।
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9- ओमप्रकाश यादव
हरियाणा के नारनौल विधानसभा सीट से भाजपा तीन बार जीती है। इस बार भाजपा की टिकट ओमप्रकाश यादव विधायक बने तो वहीं कैबिनेट में भी राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार की जिम्मेदारी सौंपी गई। नारनौल से ओपी यादव ने 14715 वोट से जीत दर्ज की थी। 2014 में भी ओमप्रकाश यादव ने इसी सीट से चुनाव जीता था। यह इनकी लगातार दूसरी जीत है। इससे पहले नारनौल में साल 1987 कैलाश चंद्र शर्मा बीजेपी से जीते थे। 

10- जयप्रकाश दलाल
लोहारू विधानसभा सीट से चुनाव जीतने वाले जयप्रकाश दलाल ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली। जयप्रकाश ने कांग्रेस प्रत्याशी सोमवार सिंह को इस बार चुनाव में मात दी। पिछले चुनाव में इस सीट पर इनेलो के ओमप्रकाश बारवा ने जीत दर्ज की थी।
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