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टॉपर्स की जुबानी: कोई 8 घंटे लगातार पढ़ी तो किसी ने टीवी, मोबाइल व सोशल मीडिया से बनाई दूरी

Sat, 11 Jul 2020 01:31 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हिसार/नारनौंद (हरियाणा)
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रिशिता, ऊमा
हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के दसवीं कक्षा के परिणाम में टॉप थ्री में स्थान बनाने वाली हिसार की बेटियों ने पढ़ाई पर फोकस किया। कोई सात-आठ घंटे लगातार पढ़ी तो किसी ने टीवी-मोबाइल का बहिष्कार किया। सोशल मीडिया से भी दूरी बनाए रखी और शिक्षकों के बताए अनुसार अपनी पढ़ाई करती रहीं। खास बात यह है कि उन्होंने यह नहीं सोचा था कि उनका परिणाम इस कदर शानदार रहेगा, बस वे तो कर्म करो फल की चिंता न करो की नीति पर अपनी पढ़ाई ध्यान लगाकर करती रहीं। 
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निकिता मारूति सांवत, स्नेह
टीवी बहुत कम देखती थी टॉपर रिशिता
हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड में 500 में से 500 अंक लेकर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली रिशिता ने बताया कि वह नॉर्मल दिनों में 5 से 6 घंटे पढ़ाई करती थी और परीक्षा के दिनों में 7-8 घंटे तक पढ़ाई करती थी। क्रिकेट में भी रुचि है और टीवी बहुत ही कम देखती है। उन्हें बाहर की बजाय घर का खाना पसंद है। रिशिता का लक्ष्य डॉक्टर बनना है। 

उनकी माता विक्की देवी टैगोर स्कूल में ही प्राइमरी टीचर हैं और पिता मार्केट कमेटी में अकाउंटेंट हैं। रिशिता ने बताया कि उसने कभी नहीं सोचा था कि वह इस मुकाम तक पहुंच जाएगी। उसने कभी पढ़ाई के लिए दिमाग पर बोझ नहीं लिया। उसने अपनी इस कामयाबी का श्रेय खुद की मेहनत, स्कूल स्टाफ व अपने माता पिता को दिया है।
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कल्पना, अंकिता
साल में तीन-चार बार रिवाइज किया सिलेबस: निकिता
बोर्ड की टॉप थ्री की सूची में दूसरा स्थान हासिल करने वाली निकिता मारुति सावंत शहर के मोरी गेट की रहने वाली है। निकिता के मुताबिक साल में उसने तीन-चार बार सिलेबस कवर किया। इस कारण से परीक्षा के समय ज्यादा टेंशन भी नहीं थी। स्कूल में जो पढ़ाते थे, उसे घर आकर अच्छे से रिवाइज करती थी। स्कूल टाइम के अलावा दिन में पांच-छह घंटे पढ़ती थी। निकिता ने बताया कि वह 11वीं कक्षा में नॉन मेडिकल संकाय लेना चाहती है। निकिता के पिता मारुति सावंत ज्वेलर की दुकान पर काम करते हैं और मां सुशीला सावंत एक गृहिणी हैं। 

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चहक, हिमांशी
रट्टा न मारकर हर टॉपिक को समझा: अंकिता
बोर्ड की टॉप थ्री की सूची में दूसरे स्थान पर रहने वाली अंकिता गांव खांडा खेड़ी की रहने वाली है। अंकिता ने बताया कि उसने कभी रट्टा नहीं मारा और हर टॉपिक को अच्छे से समझा। दिनभर में वह 10 से 12 घंटे पढ़ती थी। एग्जाम से पहले सिलेबस को चार से पांच बार अच्छी तरह रिवाइज किया। कभी सोशल मीडिया का इस्तेमाल भी नहीं किया। अंकिता ने बताया कि वह डॉक्टर बनना चाहती है। अंकिता के पिता राजेश एक किसान और मां सुनीता एक गृहिणी हैं।
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गर्विता और एक दूसरे को मिठाई खिलाती छात्राएं।
स्कूल में करवाए गए काम को घर पर करती थी रिवाइज: चहक
बोर्ड की टॉप थ्री की सूची में तीसरा स्थान हासिल करने वाली चहक नारनौंद की रहने वाली है। चहक ने बताया कि स्कूल में जो पढ़ाया जाता था, वह घर आकर उसे अच्छी तरह से रिवाइज करती थी। स्कूल टाइम के अलावा चार से पांच घंटे पढ़ती थी। मोबाइल पर कभी समय बर्बाद नहीं किया। चहक के मुताबिक वह अपनी सफलता का श्रेय अपने शिक्षकों व माता-पिता को देना चाहती है। चहक के पिता राममेहर रोहिल्ला एक निजी स्कूल में शिक्षक व मां दर्शना एक गृहिणी हैं।
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अंकिता को मिठाई खिलाते माता-पिता।
डॉक्टर बनना चाहती है गर्विता
हरियाणा बोर्ड में टॉप थ्री में जगह बनाने वाली गर्विता का लक्ष्य डॉक्टर बनना है। गर्विता ने बताया कि पढ़ाई को लेकर किसी तरह कोई स्ट्रेस नहीं था। स्कूल से घर आने के बाद सबसे पहले स्कूल का काम करती थी उसके बाद थोड़ा खेलती थी। परिणाम से बेहद खुशी हुई है और अपना लक्ष्य पाने के लिए मुझे हौसला दिया है। रोज 7-8 घंटे पढ़ाई करती थी। चार बहनों में दूसरे नंबर पर हूं। बड़ी बहन एलएलबी कर रही हैं। मम्मी उर्मिला गृहिणी व पापा सतबीर दूहन पूर्व सरपंच हैं।
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टॉपर छात्रा गर्विता।
पढ़ाई के साथ घर वालों का काम में हाथ भी बंटाया
हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड में दसवीं कक्षा में द्वितीय स्थान पर रहने वाली उमा ने 499 अंक प्राप्त कर द्वितीय स्थान प्राप्त किया है। उमा ने बताया कि वह 7 से 8 घंटे पढ़ाई करती थी। स्कूल से जाने के बाद कुछ समय आराम कर वह फिर से पढ़ाई पर लग जाती थी और उसके बाद कुछ समय घर वालों का काम में हाथ बंटाती थी और रात को फिर 10 बजे तक पढ़ाई करती थी। उसने हमेशा टीवी व सोशल मीडिया से दूरी बनाकर रखी। इसका श्रेय वह स्कूल के स्टाफ व अपने माता-पिता को दिया है।

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शानदार परिणाम आने पर बच्चों को मिठाई खिलाते टैगोर सीनियर सेकेंडरी स्कूल के प्रधानाचार्य धर्मपाल यादव।
पढ़ाई को नहीं समझा कभी बोझ
500 में से 499 अंक लेकर दूसरे स्थान पर रहने वाली स्नेह ने बताया कि वह नॉर्मल तरीके से पढ़ती थी और उसने कभी भी पढ़ाई को बोझ नहीं समझा। दिन में 5 से 6 घंटे ही पढ़ती थी और स्कूल का होमवर्क जितने समय में हो जाता वह करती थी। आगे चलकर वह डॉक्टर बनना चाहती है और इसका श्रेय अपने माता-पिता व अपने अध्यापकों को देना चाहती है।
 
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अध्यापकों के बताए रास्ते पर चलकर हासिल की सफलता
500 में से 499 अंक लेकर हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड में दूसरे स्थान पर रहने वाली छात्रा कल्पना का कहना है कि वह डॉक्टर बनना चाहती है। उसने हमेशा पढ़ाई में अपने अध्यापकों के दिखाए रास्ते पर चलकर यह मुकाम हासिल किया है। पूरा दिन स्कूल में पढ़ने के बाद घर पर पहुंचने के बाद 4 से 5 घंटे की पढ़ाई करती थी। उसके बाद घर में अपने माता-पिता का काम में हाथ बंटाती थी। इसका श्रेय वह अपने गुरुजनों माता-पिता व अपने दोस्तों को देना चाहती है।
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