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2019 में खूब विवादों में रहे सिद्धू, तीन मामले जिन पर बवाल हुआ और मंत्री पद से दिया इस्तीफा

Mon, 30 Dec 2019 09:24 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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नवजोत सिद्धू
नवजोत सिद्धू का विवादों से पुराना नाता रहा है। साल 2019 में भी उन्हें लेकर काफी हंगामा हुआ। हम आपको बता रहे हैं ऐसे ही तीन मामले, जो खूब उछले और सिद्धू ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।
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नवजोत सिद्धू
जून 2019 में कैप्टन ने बदला नवजोत सिद्धू का विभाग
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कैबिनेट में फेरबदल करते हुए नवजोत सिंह सिद्धू से स्थानीय निकाय विभाग वापस ले लिया। सिद्धू को पावर एंड न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी सोर्स का विभाग दिया गया। लेकिन सिद्धू इस बदलाव से खुश नहीं थे। उन्होंने चंडीगढ़ में ही अपने आवास पर प्रेस कांफ्रेंस की और अपने अधीन स्थानीय निकाय विभाग की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने कैप्टन के उन आरोपों का खारिज करने का प्रयास किया, जिसमें सीएम ने कहा था कि लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस को शहरी क्षेत्रों से पर्याप्त वोट नहीं मिले। इसके लिए कैप्टन ने स्थानीय निकाय विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। यह मुद्दा काफी चर्चा में रहा।
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नवजोत सिद्धू
जुलाई 2019 में कैबिनेट मंत्री के पद से इस्तीफा
नवजोत सिंह सिद्धू ने कैबिनेट मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने ट्विटर पर इस बात की जानकारी दी। उन्होंने अपना इस्तीफा 10 जून को ही तत्कालीन पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी को भेज दिया था, लेकिन कैप्टन को नहीं भेजा था। इस बात को लेकर काफी बवाल हुआ, फिर उन्होंने कैप्टन को संबोधित करते हुए दोबारा से इस्तीफा भेजा। नवजोत सिंह सिद्धू अपना मंत्रालय बदले जाने से नाराज चल रहे थे। सिद्धू से विभाग वापस लेते हुए उनके खराब प्रदर्शन को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया गया था। भाजपा नेता तरूण चुघ ने उनके खिलाफ राज्यपाल को चिट्ठी लिखकर शिकायत की कि उन्होंने मंत्री पद की शपथ तो ले ली है, लेकिन अभी तक कार्यभार नहीं संभाला है। इस बीच सामने आया कि सिद्धू तो जून में ही अपना इस्तीफा दे चुके थे।

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नवजोत सिद्धू
नवंबर 2019 में इमरान खान की तारीफ में पढ़े कसीदे
करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन के दौरान सिद्धू फिर चर्चा में रहे। सिद्धू को उद्घाटन समारोह में शामिल होने के लिए पाकिस्तान और भारत दोनों तरफ से बुलावा आया, लेकिन वे पाकिस्तान के कार्यक्रम में शिरकत करने गए। वहां उन्होंने कॉरिडोर के उद्घाटन के दौरान अपने भाषण में इमरान खान की प्रशंसा में जमकर कसीदे पढ़े और विरोधियों पर निशाना साथा। सिद्धू ने इमरान की प्रशंसा में कहा- ‘... क्या मिलेगा मारकर किसी को जान से, मारना हो तो मार डालो एहसान से। दुश्मन मर नहीं सकता कभी नुकसान से और सर उठाकर चल नहीं सकता मरा हुआ एहसान से।’ यही नहीं, उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख को गले लगाने पर आलोचना करने वालों पर भी निशाना साधा। उन्होंने साफ कहा, ‘हां, मैंने जफ्फी डाली और आगे भी सौ बार डालूंगा। इस जफ्फी के कारण ही पाकिस्तान और डेरा बाबा नानक का रास्ता खुला। विश्व के सिख आज इमरान खान को दुआएं दे रहे हैं। यार होवे तां इमरान वरगा। जहां हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने करतारपुर कॉरिडोर का रास्ता खोलने के लिए सराहनीय कार्य किया, वहीं इमरान खान ने जो सिखों के लिए किया, उसको भुलाया नहीं जा सकता।’
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नवजोत सिद्धू
इतनी दूरियां क्यों आईं कि इस्तीफे की नौबत आ गई
आखिर नवजोत सिद्धू और कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच इतनी दूरियां क्यों आईं कि इस्तीफे की नौबत आ गई। इसकी दो वजह सामने आई हैं और एक कारण तो पत्नी हैं। दरअसल, 2017 के विधानसभा चुनाव में कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई में कांग्रेस को मिली सफलता ने नवजोत सिद्धू के मन में यह भ्रम पैदा कर दिया था कि कांग्रेस की जीत में उनके द्वारा की गई 100 से अधिक चुनावी सभाओं का बड़ा योगदान है। सिद्धू यह दावा करने लगे थे कि कांग्रेस, विधानसभा चुनाव में 60 सीटों तक ही सिमट जाती, यदि कांग्रेस को 75 सीटें मिली है तो यह उनके चुनाव प्रचार और साफ सुथरी छवि के कारण मिली। इसी को आधार बनाकर सिद्धू पहले उपमुख्यमंत्री पद की मांग करते रहे। उनकी यह इच्छा तो पूरी नहीं हुई, लेकिन वे कैप्टन को ही चुनौती देने लगे थे। नवजोत सिद्धू अमृतसर संसदीय क्षेत्र से तीन बार लोकसभा का चुनाव जीते। जीतने के बाद सिद्धू ने गुरुनगरी के लोगों के साथ कभी सीधा संपर्क नहीं रखा। स्थानीय निकाय मंत्री होने के बावजूद सिद्धू अपने विधानसभा हलके की दशा सुधारने में नाकाम रहे।
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नवजोत सिद्धू
आसपास के लोग और पत्नी भी दूरियों का कारण बनीं
आसपास के लोगों ने भी सिद्धू और कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच दूरियां पैदा कीं। डॉ. नवजोत कौर की अति महत्वाकांक्षा ने भी सिद्धू के लिए मुसीबतें पैदा कीं। डॉ. सिद्धू का लोकसभा चुनाव में चंडीगढ़ से टिकट मांगना और उसमें सिद्धू का कूदना भी सिद्धू-कैप्टन के बीच दूरियां पैदा कर गया। सिद्धू के ओएसडी बन्नी और कभी उनकी पत्नी के निजी सचिव रहे गौरव ने भी सिद्धू की छवि को नुकसान पहुंचाया। मुख्यमंत्री और सिद्धू के बीच मतभेद अगस्त 2017 में सामने आए थे, जब सिद्धू पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने गए थे। वहां उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख को गले लगाया। इस पर कैप्टन ने नाखुशी जाहिर की थी। इस घटना के कुछ महीनों बाद सिद्धू ने एक बयान में कहा कि कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी ही उनके कैप्टन हैं और अमरिंदर सिंह तो सेना के कैप्टन रहे हैं। इसके अलावा भी कई बातें ऐसी रही, जिन्होंने दूरियों को बढ़ावा दिया।
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