हरियाणा का वर्ष 2016-17 का बजट कई मायनों में अलग हटकर आया है। केंद्र की उदय योजना के तहत अपनी बिजली कंपनियों का 25 हजार करोड़ का कर्ज अपने सिर ले चुकी प्रदेश सरकार के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने सोमवार को विधानसभा में पेश किए बजट में आम लोगों को टैक्स के बोझ से तो बचाया ही, कई मदों में वैट घटाकर राहत भी दी। वर्ष 2015-16 के बजट के मुकाबले इस बार 28.4 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 88781.96 करोड़ रुपये का बजट पेश किया।
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हरियाणा का बजट पेश करने जाते वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु
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- फोटो : amar ujala
बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने प्रदेश के औद्योगिक व कृषि क्षेत्र, आधारभूत संरचना, शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों, शिक्षा, स्वास्थ्य सहित सभी मदों में दिल खोल कर बजट राशि बढ़ाने का प्रस्ताव रखा। ‘सबका साथ सबका विकास’ के नारे के साथ अपना दूसरा बजट पेश कर रहे कैप्टन अभिमन्यु ने रियायतें देते हुए प्रदेश में जूता उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए 500 रुपये से अधिक मूल्य के जूतों पर वैट की दर 12.5 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दी। इसके साथ ही कृषि आधारित उद्योगों को ध्यान में रखते हुए खल, बिनौला, बेसन व सूती धागे में कर छूट का प्रस्ताव रखा।
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कृषि उत्पादों का उपयोग करने वाले उद्योगों पर भी ध्यान देते हुए वित्त मंत्री ने सेवइयां पर वैट की दर 12.5 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दी। वैट दर की इतनी ही कटौती इलेक्ट्रिकल वाहनों की बिक्री पर भी गई है, जबकि लघु व सूक्ष्म उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए छोटा टोका (रसोई में पत्तेदार सब्जियां काटने वाला उपकरण) पर टैक्स छूट का फैसला लिया है।
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वित्त मंत्री ने प्रदेश में जाट आरक्षण आंदोलन से प्रभावित व्यापारियों को राहत देने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि जो व्यापारी उनके विभाग के साथ रजिस्टर्ड हैं, सरकार की कोशिश है कि उनका आकलन कर अतिशीघ्र राहत दी जाए। इसके लिए पालिसी बनाई जाएगी, जिसमें पीड़ित व्यापारियों को वैट में इस साल और अगले साल राहत दी जाएगी।
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वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने वर्ष 2016-17 के दौरान 12280.35 के अनुमानित राजस्व घाटे और 25115.96 करोड़ के अनुमानित राजकोषीय घाटे की परवाह न करते हुए अधिकांश प्रमुख क्षेत्रों के लिए बजट आवंटन में इजाफा किया है। इसके अंतर्गत कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र (सिंचाई, सहकारिता एवं ग्रामीण विद्युतीकरण सबसिडी सहित) के लिए 13494 करोड़ रुपये, ग्रामीण विकास एवं पंचायत को 2824.47 करोड़ रुपये, शिक्षा क्षेत्र (प्राथमिक, माध्यमिक, उच्चतर, तकनीकी शिक्षा, औद्योगिक प्रशिक्षण, खेल, कला एवं संस्कृति) को 14305.34 करोड़ रुपये आवंटन करने का प्रस्ताव पेश किया।
इसके अलावा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को 3916.94 करोड़ रुपये, उद्योग एवं खनिज विकास के लिए 828.80 करोड़ रुपये, समाज कल्याण, पोषाहार और अनुसूचित जाति एवं पिछड़े वर्ग कल्याण के लिए 6189.87 करोड़ रुपये, बिजली क्षेत्र के लिए 16826.70 करोड़ रुपये, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी के लिए 3108.37 करोड़ रुपये, शहरी विकास के लिए 3645.86 करोड़ रुपये और जिला योजना के लिए 400 करोड़ रुपये के आवंटन करने का प्रस्ताव पेश किया।