बचपन में खेल और मस्ती के लिए रावण बनाने का शौक उसे कारीगर बना देगा और उसकी आजीविका का जरिया बनेगा। ये शायद इस युवक ने सोचा न था।
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देखिए, कैसे रावण के कारण इस नौजवान को मिला रोजगार?
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ये हैं पंजाब के पठानकोट निवासी राकेश। इनके पिता 70 सालों से बांस की सीढ़ियां और अन्य सामान बनाने का काम कर रहे हैं। बचपन में लोगों को पिता से रावण बनाने का सामान खरीदते देखते थे।
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राकेश बताते हैं कि उससे बने पुतले देखकर उनके मन में भी इन्हें बनाने की चाह जागी। इस चाहत को पूरा करनके लिए राकेश ने रावण बनाने शुरू कर दिए। धीरे-धीरे दूर-दराज के इलाकों से ऑर्डर मिलने लगे।
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इस तरह राकेश की चाहत ने उन्हें कारीगर बना दिया और साथ में रोजगार का जरिया भी दे दिया। अब वह रामपुरा मोहल्ला में ही खुले में पुतले तैयार करते हैं और डिमांड पर सप्लाई की जाती है।
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राकेश ने बताया कि रक्षाबंधन के बाद से ही उनके पास बुकिंग शुरू हो जाती है। हर साल कम से कम उनके पास 30 पुतलों के ऑर्डर आ जाते हैं। पठानकोट के अलावा हिमाचल प्रदेश में भी उनके बनाए पुतलों की खासी डिमांड है। इन पुतलों की लंबाई करीब 25 फुट तक रखी जाती है।
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राकेश बताते हैं कि इनकी कीमत 8 से 10 हजार रुपये होती है। वहीं रावण, कुंभकर्ण व मेघनाथ के पुतलों का सैट 31 हजार से शुरू होता है। अब तक उन्होंने सबसे बड़ा पुतला 30 फुट का बनाया है।
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राकेश ने यह भी बताया कि पहले बांस की कोई कमी नहीं होती थी। बांस आसानी से हिमाचल से मिल जाते थे। अब हिमाचल प्रदेश में बांस के कटान पर प्रतिबंध लगा देने से सामग्री मिलने में समस्या हो रही है। बांस अब कीमती दामों पर उपलब्ध हो रहे हैं। इससे मुनाफा पहले से काफी कम हो गया है।