डायबिटीज के मरीजों को अपने खानपान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। अगर अनदेखी हुई तो शरीर के कई अंग खत्म हो सकते हैं तो जानिए क्या खाएं, क्या न खाएं।
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शाकाहारी
डायबिटीज के मरीज का खानपान ठीक नहीं होने से ग्लूकोज और ब्लड प्रेशर का लेवल अनियंत्रित होता है। इससे शरीर के दूसरे अंगों पर काफी प्रभाव पड़ता है। धीरे-धीरे दूसरे अंग भी खराब हो जाते हैं। ऐसे में खानपान का विशेष ध्यान रखना होगा। इस बारे में डायबिटीज एक्सपर्ट का क्या कहना है, आइए जानते हैं।
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क्या नहीं खाएं
चीनी, शक्कर, गुड़, गन्ना, शहद, चॉकलेट, पेस्ट्री, केक, आइसक्रीम और मीठी वस्तुओं से बचें। हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाली चीजों को खाने से बचे, क्योंकि ये चीजे जल्दी ग्लूकोज में बदल जाती है। इनमें प्रमुख रूप से मैदा, सूजी, सफेद चावल, सफेद ब्रेड, नूडल्स, पिज्जा, बिस्किट, तरबूज, अंगूर, सिंघाड़ा, आम, चीकू, केला और लीची शामिल हैं। सब्जियों में आलू, अरबी, कटहल, जिमिकंद, शकरकंद, चुकंदर न खाएं। इनमें स्टार्च और कार्बोहाईड्रेट काफी ज्यादा होता है, जो शुगर बढ़ा सकते हैं।
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यदि खाने का मन हो तो उबाल कर खा सकते हैं। मैदा और मक्के का आटा न खाएं। इससे भी ग्लूकोज की मात्रा बढ़ती है। कुछ लोगों की आदत होती है कि उन्हें बैठे रहना ही पसंद होता है। यहां तक कि वो बैठे-बैठे दूसरों से ही अपने काम करवाते हैं। ऐसा न करें। बैठे रहने से शरीर का इंसुलिन लेवल बिगड़ जाता है और डायबिटीज की आशंका बढ़ जाती है। हो सके तो रोजाना करीब आधे घंटे तक एक्सरसाइज करें।
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पानी
कुछ लोग पानी बहुत कम पीते हैं, जबकि पानी कम पीने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है, जिससे शुगर की मात्रा बिगड़ जाती है। 7 से 8 घंटे की नींद न लेने से फैट बढ़ने लगता है जिसकी वजह से डायबटीज की संभावना बढ़ जाती है। तनाव होने की वजह से शरीर में ब्लड शुगर बढा़ने वाले हॉर्मोन्स का बैलेंस बिगड़ता है जिससे डायबिटीज होने की आशंका ज्यादा बढ़ जाती है।
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फ्रिज में अंडे
क्या खाएं
शुगर के मरीजों को प्रोटीन और कार्बोहाईड्रेट के बीच में अच्छा तालमेल बनाना होगा। नाश्ते में टोंड या डबल टोंड के दूध में बना दलिया लें या फिर ब्राउन ब्रेड के साथ अंडा लें। इसी तरह खाने में सब्जी के साथ दाल भी लें। इससे शुगर का लेवल सही रहता है। वजन कम करना है, तो कार्ब कम करके प्रोटीन बढ़ाएं। कार्बोहाईड्रेट से शुगर जल्दी बनती है, जबकि प्रोटीन से धीरे-धीरे शुगर रिलीज होती है, जिससे ज्यादा देर तक पेट भरा हुआ लगता है।
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ताजी सब्जी और फल
हरी सब्जियां, सोया, मूंग दाल, काला चना, राजमा, ब्राउन राइस, अंडे का सफेद हिस्सा खाएं। खाने में करीब 20 फीसदी फाइबर जरूर हो। चोक्कर के साथ रोटी बनाएं। जौ (बारले), काला चना, लोबिया, राजमा, दालें आदि खाएं क्योंकि इनसे प्रोटीन और फाइबर दोनों मिलते हैं। दालों में एंटी-ऑक्सीडेंट भी काफी होते हैं। दिन भर में 4-5 बार फल और सब्जियां खाएं, लेकिन एक ही बार में सब कुछ खाने के बजाय थोड़ा-थोड़ा करके खाएं।
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फलों में चेरी, स्ट्रॉबेरी, सेब, संतरा, अनार, पपीता, मौसमी आदि और सब्जियों में करेला, घीया, तोरी, सीताफल, खीरा, टमाटर आदि खाएं। रोजाना 5-7 बादाम और 1-2 अखरोट खाएं। दालचीनी का एक टुकड़ा और एक चम्मच मेथी दाना रोजाना खाएं। दालचीनी को पीसकर और मेथीदाना को भिगोकर या आटे में मिलाकर खा सकते हैं। लौकी, करेला, खीरा, टमाटर, एलोवेरा और आंवले का जूस खासतौर पर फायदेमंद है।
लो फैट दही और स्किम्ड/डबल टोंड दूध लेना चाहिए। ग्रीन टी पीना अच्छा है। चाय के साथ हाई फाइबर या फीके बिस्कुट ले सकते हैं। खाने को एक पिरामिड के तौर पर समझ सकते हैं। पिरामिड के नीचे का हिस्सा चौड़े से होकर नोक तक जाता है। चौड़े हिस्से का मतलब है कि खूब हरी सब्जियां, अंकुरित दाले और फल खाएं। नोक का मतलब है कि तला-भुना और फैटी युक्त भोजन सबसे कम खाएं।