पंजाब के हलवारा (लुधियाना) में रायकोट के मंदिर शिवाला खाम की जगह पर बनाई जा रही गोशाला के मामले ने बुधवार को हिंसक रूप ले लिया। गोशाला समर्थकों ने पुलिस पर पथराव कर तहसीलदार की सरकारी गाड़ी आग के हवाले कर दी। साथ ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों समेत कई वाहन तोड़ डाले। पथराव में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस को हवाई फायरिंग करनी पड़ी।
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जमीन मामले ने लिया हिंसक रूप, देखिए तस्वीरें
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गोशाला बनाने के लिए मरणव्रत पर बैठे रघुनंदन गौड़ की सेहत बिगड़ने पर तहसीलदार बलकरण सिंह और ईओ शक्ति कौशल उसे अस्पताल भर्ती करवाने पहुंचे। उन्होनें रघुनंदन के पिता गिरीश गौड़ से गायों की बिगड़ी सेहत का हवाला देकर अन्य जगह पर भेजने की अपील की। गिरीश नहीं माने और मिट्टी का तेल डालकर खुद को आग लगाने की कोशिश की। इस पर पुलिस ने गिरीश गौड़ को हिरासत में लेकर वैन में बैठा लिया। यह देख गोशाला समर्थक भड़क उठे और पथराव शुरू कर दिया।
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इसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए जिनमें महिला पुलिस भी शामिल है। लोगों ने पुलिस और सिविल प्रशासन की गाड़ियों सहित दो ट्रकों की तोड़फोड़ करते हुए तहसीलदार की सरकारी गाड़ी को आग के हवाले कर दिया। भडके लोगों को खदेड़ने के लिए पुलिस फोर्स ने हवा में गोलियां चलाईं। एसएसपी रवचरण सिंह बराड़ का कहना है कि पहले ही हमले की पूरी योजना बनाई गई थी। पुलिस और सिविल प्रशासन मामले को सुलझाने के लिए निहत्थे ही गए थे। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है।
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एसएसपी ने कहा कि दंगाकारियों ने तहसीलदार की सरकारी गाड़ी को आग लगाने के अलावा ईओ रायकोर्ट की गाड़ी, दो पुलिस वैन और दो प्राइवेट ट्रकों और कुछ अन्य वाहनों की की तोड़फोड़ की है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग इस विवादित जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे थे। ऐसे लोगों पर काबू पाने के लिए पुलिस कार्रवाई कर रही है।
रायकोट के मंदिर शिवाला खाम से करीब डेढ़ एकड़ जमीन जुड़ी है। मंदिर कमेटी के प्रधान इंद्रपाल गोल्डी ने बताया रघुनंदन गौड़ और उसके पिता गिरीश गौड़ के अनुरोध पर दो गायों को रखने की जगह दी गई थी। मंदिर की एक ओर की दीवार करीब छह माह पहले टूट गई। इसके बाद पिता-पुत्र ने मंदिर की जमीन पर कब्जा कर लिया। मंदिर कमेटी ने दोनों पर केस दर्ज कराया दिया। इस समय पिता-पुत्र पर विभिन्न मामलों के सात केस चल रहे है। दस्तावेजों में जमीन मंदिर कमेटी के नाम दर्ज है। गोशाला को हटाने के लिए जब प्रशासनिक अफसरों के हस्तक्षेप किया तो रघुनंदन गौड़ मरणव्रत पर बैठ गया।