दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संस्थापक आशुतोष महाराज की समाधि के केस में हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिससे 'बेटे' को बड़ा झटका लगा है।
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दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के आशुतोष महाराज
- फोटो : फाइल फोटो
मामले में जस्टिस महेश ग्रोवर की खंडपीठ ने आशुतोष महाराज के भक्तों के हक में फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए सिंगल बेंच के आदेशों को खारिज करते हुए आशुतोष महाराज के शरीर को संरक्षित करने के आदेश दिए हैं।
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आशुतोष महाराज
- फोटो : file photo
अपने आदेशों में हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि आशुतोष महाराज के शरीर को किसी भी प्रकार का नुकसान ना हो इसके लिए लगातार डीएमसी की मेडिकल टीम उनके शरीर की जांच हेतु जाती रहेंगी और इसके लिए डेरे को भुगतान करना होगा। इस भुगतान के लिये हाईकोर्ट ने 50 लाख के तौर पर एफडी के रूप में जमा रखने के आदेश दिए हैं।
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आशुतोष महाराज
इसके साथ ही आशुतोष महाराज की कथित पुत्र दिलीप कुमार झा की डीएनए टेस्ट को लेकर दाखिल की गई याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी। डीएनए टेस्ट की मांग पर हाईकोर्ट ने दिलीप कुमार झा को कहा कि वो चाहे तो इसके लिए सिविल सूट दाखिल कर सकते हैं।
हाईकोर्ट ने ये भी कहा कि सिविल सूट दाखिल करने की स्थिति में यदि आशुतोष महाराज के डीएनए सैंपल की आवश्यकता पड़ी तो डेरे को वह उपलब्ध कराना होगा। हाईकोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि सैंपल लेने में किसी भी तरह के रोक टोक न की जाए।