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उत्तराधिकारी चुनने के बाद महंत चांदनाथ ने त्यागा शरीर, सीएम योगी-खट्टर पहुंचे

Mon, 18 Sep 2017 10:20 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा)
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Chand Nath Yogi passes away
साल 1985 में मस्तनाथ मठ की गद्दी संभालने वाले महंत चांदनाथ ने 29 जुलाई 2016 को अपने शिष्य योगी बालकनाथ को उत्तराधिकारी बना दिया था। लंबे समय से बीमार चल रहे महंत चांदनाथ ने खुद को स्वास्थ्य को देखते हुए यह फैसला लिया था। उत्तराधिकारी चुनने के 13 महीने 15 दिन बाद ही महंत चांदनाथ ने अपना शरीर त्याग दिया। अब मस्तनाथ मठ में आठवें उत्तराधिकारी के तौर पर योगी बालकनाथ गद्दी संभालेंगे। 
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महंत चांदनाथ का जन्म 21 जून 1956 को दिल्ली के बेगमपुर गांव के किसान परिवार में हुआ। वर्ष 1977 में अस्थल बोहर मस्तनाथ मठ के महंत श्रेयोनाथ के शिष्य बने। महंत श्रेयोनाथ ने उनको अस्थल बोहर मठ का महंत बनाने से पहले हनुमानगढ़ के मठ के कोठारी की जिम्मेदारी दी थी। वर्ष 1984 में उन्हें उत्तराधिकारी घोषित कर दिया। श्रेयोनाथ के ब्रह्मलीन होने के बाद वर्ष 1985 में महंत चांदनाथ ने गद्दी संभाली। 
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महंत श्रेयोनाथ से पहले सिद्ध योगी तोतानाथ ने 1864 से 1894, सिद्ध योगीराज मेघनाथ ने 1894 से 1923, सिद्ध योगीराज मोहरनाथ ने 1922 से 1935 और सिद्ध योगीराज पूर्णनाथ ने 1963 से 1939 तक मठ की गद्दी संभाली। इसके बाद 1939 से 1985 तक महंत श्रेयोनाथ और फिर सातवें उत्तराधिकारी के तौर पर महंत चांदनाथ उत्तराधिकारी बनें। 

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पिछले साल 29 जुलाई 2016 को महंत चांदनाथ ने मठ की परंपरा के अनुसार, अपने शिष्य योगी बालकनाथ को उत्तराधिकारी नियुक्त कर दिया था। करीब 13 महीने 15 दिन बाद अब महंत चांदनाथ के ब्रह्मलीन होने के बाद आठवें उत्तराधिकारी के तौर पर योगी बालकनाथ मठ की गद्दी संभालेंगे।
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गौरतलब है कि महंत चांदनाथ को वर्ष 2014 में राजस्थान के बहरोड़ हलके के लोगों ने विधायक बनाया और फिर अलवर संसदीय क्षेत्र से सांसद बने। उन्हें शिक्षा रत्न के साथ-साथ राजस्थान गौरव समेत कई अवार्ड मिल चुके हैं। 
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यह है मठ का इतिहास 
मठ से जुड़े लोगों की मानें तो आठवीं शताब्दी में बाबा चौरंगीनाथ ने मठ की स्थापना की। इसके कुछ समय बाद ही मठ का अस्तित्व खत्म हो गया था। 17वीं शताब्दी में बाबा मस्तनाथ ने मठ का दोबारा से जीर्णोद्धार किया। तभी से नाथ संप्रदाय की परंपरा के अनुसार इसे चलाया जा रहा है। तब से लेकर अब तक महंत चांदनाथ मठ के सातवें उत्तराधिकारी के तौर पर गद्दी संभाल रहे थे। 
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