ये डिजिटल इंडिया है साहब! अब अपने स्कूल से लेकर कॉलेज तक के सारे सर्टिफिकेट्स को फाइल बनाकर नहीं बल्कि यहां रखें। गुम तो होंगे नहीं और फायदे ही फायदे है...
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अब नहीं ढोना पड़ेगा प्रमाण पत्रों का भार
युवा वर्ग से लेकर अन्य आम लोगों को भी अपने किसी भी कार्य के लिए कई प्रकार के प्रमाण पत्रों का भार नहीं ढोना पड़ेगा। उनके यह प्रमाण पत्र एक क्लिक करते ही सामने होंगे और वहीं से ही संबंधित कार्यालय में उनकी प्रति भी भेजी जा सकेगी। इस प्रति की तस्दीक करनी भी जरूरी नहीं होगी। इससे न केवल लोगों का समय बचेगा बल्कि अपने साथ हर समय प्रमाण पत्र उठाए रखने का झंझट भी खत्म होगा।
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अब नहीं ढोना पड़ेगा प्रमाण पत्रों का भार
इसके लिए इंटरनेट सर्वर पर जाकर अपना-अपना डिजिटल लॉकर बनाना होगा। इसमें न केवल सभी प्रमाण पत्र सुरक्षित होंगे बल्कि इन पत्रों को केवल संबंधित व्यक्ति ही देख व प्रयोग में ला सकेगा। पूरी तरह से आधार लिंक से जुड़ने वाले इस लॉकर में संबंधित व्यक्ति के अगले सभी प्रमाण पत्र भी स्वत: ही इसमें जमा होते रहेंगे। ये लॉकर पूरे देश में सरकारी तौर पर मानयता प्राप्त है।
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अब नहीं ढोना पड़ेगा प्रमाण पत्रों का भार
हालांकि ऐसे लॉकर हर किसी के लिए जरूरी है, लेकिन अभी तक न के बराबर लोग ही इस सुविधा का लाभ उठा पा रहे हैं। इसके चलते अब प्रशासन ने जिले के अधिक से अधिक लोगों के यह लॉकर खुलवाने की योजना तैयार की है, जो पूरी तरह सिरे चढ़ी तो जल्द ही जिले के लोगों के यह लॉकर होंगे। जिसे वे अपने मोबाइल से भी ऑपरेट कर सकेंगे।
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अब नहीं ढोना पड़ेगा प्रमाण पत्रों का भार
छात्रों के प्रमाण पत्र सीधे डिजिटल लॉकर में पहुंचेंगे
डिजिटल लॉकर विशेष तौर पर छात्र-छात्राओं व युवाओं के लिए सबसे अधिक फायदेमंद होंगे। जहां इस लॉकर में वे अपने अब तक एकत्रित किए गए प्रमाण पत्रों को अपलोड कर सकते हैं बल्कि भविष्य में मिलने वाले सभी प्रमाण पत्र भी सीधे इस लॉकर में ही जमा होते रहेंगे। यह लॉकर ई मेल की तरह ऑपरेट किए जा सकेंगे और इनका पासवर्ड संबंधित व्यक्ति के पास ही रहेगा। कहीं से भी अपने प्रमाण पत्र लेने हैं तो इस लॉकर की आईडी वहां दर्ज करवानी होगी और इसके बाद सीधे प्रमाण पत्र इस लॉकर में जमा होते रहेंगे।
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अब नहीं ढोना पड़ेगा प्रमाण पत्रों का भार
जिला सचिवालय व ई- दिशा केंद्र में खोले जाएंगे काउंटर
प्रशासन की योजना है कि जिले के अधिक से अधिक लोगों और विशेष तौर पर युवाओं के यह लॉकर हो। इसके लिए न केवल लोगों को व्यापक स्तर पर जागरूक किया जाएगा बल्कि जिला सचिवालय व ई-दिशा केंद्र में काउंटर भी खोले जाएंगे। इन काउंटरों पर यहां आने वाले लोगों को न केवल डिजिटल लॉकर के बारे में पूरी जानकारी दी जाएगी बल्कि उनके यहीं पर ही लॉकर भी बनाए जाएंगे, जिन्हें मौके पर ही ऑपरेट करना भी सिखाया जाएगा।
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सक्षम युवा घर-घर देंगे दस्तक
डिजिटल लॉकर की सुविधा और इसे ऑपरेट करने को लेकर अब सक्षम युवा घर-घर दस्तक देते हुए दिखाई देंगे। जिला प्रशासन सरकार की ओर से तय माने गए समक्ष युवाओं को इस अभियान से जोड़ेगा और सरकार से रोजगार पाए ये युवा लोगों के घर-घर जाकर भी डिजिटल लॉकर बनाने व इसकी पूरी जानकारी देंगे।
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अब नहीं ढोना पड़ेगा प्रमाण पत्रों का भार
इससे पहले इन सभी को विशेषज्ञों द्वारा पूर्ण प्रशिक्षित किया जाएगा और सबसे पहले एनआईसी से जुड़े युवाओं का ही सहयोग लिया जाएगा। यह भी विचार किया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति से 20 से 30 रुपये का शुल्क भी इसके लिए लिया जाए, जो सक्षम युवा के खर्च में शामिल किया जाएगा।
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तैयारी पूरी, जल्द अमल में लाई जाएगी योजना : सिंगला
एनआईसी के जिला अधिकारी विनोद सिंगला का कहना है कि डिजिटल लॉकर हर किसी के लिए होना बेहद आवश्यक है। इससे कागज लेकर घूमने का झंझट खत्म होगा तो कागज व प्रमाण पत्र गुम होने का भी खतरा नहीं रहेगा।
प्रशासनिक तौर पर लोगों के यह लॉकर बनाने व उन्हें जागरूक करने के लिए व्यापक योजना तैयार की है और इसे जल्द ही अमल में लाया जाएगा। सबसे पहले जिला सचिवालय व ई- दिशा केंद्र में काउंटर खोले जाएंगे और उसके बाद टीमें बनाई जाएंगी।