फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शाही श्मशानघाट, यहां पिकनिक मनाने आते हैं लोग

Sun, 03 May 2015 08:06 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
1 of 7
क्या आप जानते हैं कि पंजाब में एक ऐसा शाही श्मशानघाट है, जहां आने से लोग घबराते नहीं, ब्लकि दौड़े आते हैं और पिकनिक मनाते हैं। तस्वीरों में देखिए, इस शाही श्मशानघाट को।
विज्ञापन

शाही श्मशानघाट, यहां पिकनिक मनाने आते हैं लोग

2 of 7
ये श्मशानघाट असल में पटियाला के संस्थापक बाबा आला सिंह और पटियाला शाही घराने के सदस्यों का समाधि स्थल है। ये अकेले देश में ही नहीं, ब्लकि विश्व मानचित्र पर एक बेहतरीन पर्यटन स्थल के रूप में तैयार हो चुका है।
विज्ञापन

शाही श्मशानघाट, यहां पिकनिक मनाने आते हैं लोग

3 of 7
बाबा आला सिंह के समाधि स्थल का नीचला भाग चूने की नक्काशी से, तो स्थल का ऊपरी हिस्सा व्हाइट मार्बल पर नक्काशी कर निर्मित किया गया है। स्थल की तीसरी मंजिल पर अभी एक गुबंद अधूरा पड़ा है।

शाही श्मशानघाट, यहां पिकनिक मनाने आते हैं लोग

4 of 7
पिछले सवा साल से यहां चल रहा पुनर्निर्माण का काम अब लगभग पूरा हो चुका है। शीश महल और चार बाग का जीर्णोद्धार कर रही एजेंसी ने ही शाही समाधां की नुहार बदली है। एजेंसी का दावा है कि सिर्फ इसे मामूली समाधि स्थल मानने वाले लोग भी यहां की कलाकारी देख एक बार ताजमहल को जरूर याद करेंगे।
विज्ञापन

शाही श्मशानघाट, यहां पिकनिक मनाने आते हैं लोग

5 of 7
संभवत यह गुंबद निर्माण के समय से ही ऐसी अवस्था में है, जो आज तक वैसे ही पड़ा हुआ है। असल में शाही समाधां पर आम जनता के ज्यादा ना आने का कारण यहां समाधि स्थलों का होना था। इसके बावजूद सरकार और पयर्टन विभाग ने इसे टूरिज्म के लिहाज से तैयार करने के लिए काम शुरू किया।
विज्ञापन

शाही श्मशानघाट, यहां पिकनिक मनाने आते हैं लोग

6 of 7
पटियाला राजघराने के महाराजा कर्म सिंह मोहिंदर बहादुर (12 अक्तूबर 1797-23 दिसंबर 1845), अमर सिंह बहादुर (संवत् 18580-संवत 1838), महाराजा मोहिंदर बहादुर (संवत् 1830बी-1869बी), महाराजा अरिंदर सिंह मोहिंदर सिंह (नाइट ग्राउंड कमांडर) समेत दो दर्जन समाधियां बनाई गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

शाही श्मशानघाट, यहां पिकनिक मनाने आते हैं लोग

7 of 7
राजपुरा रोड पर बीर जी दीयां मड़ियां के नाम से मशहूर यह जगह पटियाला का सबसे बड़ा श्मशानघाट है। कुछ साल पहले तक यहां उजाड़ था। एसबीओपी से रिटायर्ड व संस्था के चेयरमैन केसी अलीपुरिया, सेक्रेटरी वेद प्रकाश शर्मा व मेंबर कुंदन गोगिया बताते है कि यहां मिट्टी के बड़े बड़े टिल्ले थे। खुद जमीन समतल की, पार्क तैयार करके गुलाब समेत कई किस्म के फूल लगाए। अंतिम संस्कार स्थल पार्कों के बिल्कुल पास है, इसलिए यहां रोजाना सैकड़ों लोग आते जाते है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें