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नोटबंदी के बाद कैशलेस काम शुरू, यहां जाने से पहले जरूर कर लें तैयारी

Fri, 25 Nov 2016 09:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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नोटबंदी का असर - फोटो : social media
500-1000 रुपये के नोट बंद होने के बाद यूटी प्रशासन अपने सभी विभागों को कैशलेस बनाएगा। ऑनलाइन पेमेंट के लिए प्रशासन यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस अपनाएगा। अभी कई विभागों में ऑनलाइन पेमेंट की सुविधा नहीं है। शुक्रवार से ही कैशलेस बनाने का काम शुरू हो जाएगा। 
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नोटबंदी का असर
विभिन्न तरह के जिन सरकारी कामों के लिए अभी नगद में लेन-देन होता है अब उनमें पेमेंट करने का ऑनलाइन मोड अपनाने की तैयारी है। केंद्र सरकार की ओर से भी कैशलेस मोड अपनाने के आदेश जारी हो चुके हैं। विभागों को कैशलेस करने के लिए प्रशासन यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) ऐप से लोगों को जोड़ेगा। फिर इसी ऐप के जरिए हर विभाग में ऑनलाइन पेमेंट हो सकेगी। प्रशासन का दावा है कि एक महीने में यूपीआई ऐप से विभिन्न विभागों, ऑटोमोबाइल, ज्वेलरी, कंज्यूमर गुड्स और मंडी में लेनदेन ऑनलाइन शुरू हो जाएगा।
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नोटबंदी का असर
यूपीआई एक ऐप है जिसे नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ  इंडिया ने लांच किया है। इसमें आपके पास बैंक अकाउंट ना होने पर भी पैसे ट्रांसफर कर सकते हैं। इसे गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करना होगा। यूपीआई से पैसा भेजने के अलावा आपको यूटिलिटी बिल पेमेंट, ऑनलाइन शॉपिंग, खरीदारी के लिए नेट बैंकिंग, क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड की जरूरत नहीं पड़ेगी। यूपीआई से ट्रांजेक्शन के लिए केवल मोबाइल नंबर ही काफी होगा।

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नोटबंदी का असर
यूटीलिटी सर्विसेज की पहले से ही ऑनलाइन पेमेंट- अभी आप बिजली, पानी, प्रॉपर्टी टैक्स और फोन बिल की पेमेंट ऑनलाइन कर सकते हैं। ई-पेमेंट नाम से एक मोबाइल ऐप है जिस पर आप इन सर्विसेज की पेमेंट कर सकते हैं। हालांकि अभी इंटरनेट बैंकिंग के जरिए पेमेंट करने पर 10 रुपये अतिरिक्त देने होते हैं। डेबिट कार्ड से 2000 रुपय तक की ट्रांजेक्शन पर 0.75 प्रतिशत का अतिरिक्त खर्च देना होता है। जबकि 2000 रुपये और से ऊपर की ट्रांजेक्शन पर पेमेंट का 1 प्रतिशत अतिरिक्त खर्च पड़ता है। क्रेडिट कार्ड से भी 1 प्रतिशत अतिरिक्त खर्च लगता है। इसके अलावा एक्साइज एंड टैक्सेशन डिपार्टमेंट की वेबसाइट पर वैट और सीएसटी की पेमेंट का विकल्प उपलब्ध है।
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नोटबंदी का असर
अभी यहां नहीं ऑनलाइन पेमेंट की सुविधा
सीएचबी- मकान की ट्रांसफर फीस, ग्राउंड रेंट जमा करने के लिए अन्य सर्विसेज के लिए अलग-अलग बैंकों में जाना पड़ता है। ई-पेमेंट का सिस्टम नहीं है।
एसटीए- स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (एसटीए) में कॉमर्शियल व्हीकल्स की रजिस्ट्रेशन और इनके चालान वगैरह की हर रोज लाखों की ट्रांजेक्शन होती है। लेकिन ऑनलाइन पेमेंट का सिस्टम नहीं है।
सीपीसीसी- बिजनेस यूनिट की कंसेंट फीस के लिए अभी बैंक से ड्राफ्ट बनवाना पड़ता है जिसके बाद यह सीपीसीसी (चंडीगढ़ पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी) ऑफिस में जमा होता है। हालांकि कंसेंट को लेकर सारे डॉक्यूमेंट्स तो ऑनलाइन सब्मिट हो जाते हैं लेकिन फीस की ई-पेमेंट का सिस्टम नहीं है।
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एस्टेट ऑफिसट- प्रॉपर्टी से जुड़ा हर काम एस्टेट ऑफिस में होता है। करीब 14 हजार ईडब्ल्यूएस के मकान का रेंट आता है। पेमेंट ऑनलाइन लेने के लिए सिस्टम शुरू करने की बात हुई थी जो अभी तक बीच में लटकी है। रेंट एग्रीमेंट और प्रापर्टी रजिस्ट्रेशन की फीस जमा करवाने का भी ऑनलाइन मोड नहीं है।
हेल्थ- पीजीआई, जीएमसीएच-32, जीएमएसएच-16 सहित दूसरे अस्पतालों में अभी तक ई-पेमेंट का विकल्प नहीं है। ओपीडी कार्ड बनवाने, टेस्ट फीस जमा करवाने के लिए यहां लोगों की लंबी लाइनें लगी रहती हैं।
सीटीयू- सीटीयू के करीब 70 लॉन्ग रूट है। इनमें से किसी भी रूट पर ऑनलाइन बुकिंग का प्रावधान नहीं है। बस पास भी ऑनलाइन बनवाने का विकल्प नहीं है।
आरएलए- रजिस्टरिंग एंड लाइसेंसिंग अथॉरिटी में हर रोज रजिस्ट्रेशन के लिए 60 से 70 लाख रुपये की ट्रांजेक्शन होती है। लाइसेंस फीस भी ऑनलाइन जमा नहीं होती है। यहां अक्सर लंबी लाइनें देखी जा सकती हैं। आरएलए में काम कराने केलिए लोगों को छुट्टी करनी पड़ती है।
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