जिंदादिली की मिसाल देखनी है तो इस लड़की की कहानी सुनिए, दर्दनाक है लेकिन जोश और जज्बा ऐसा कि आप सेल्यूट किए बिना नहीं रहेंगे।
विज्ञापन
2 of 13
एसिड अटैक पीड़िता रितू सैनी
उस भयंकर मंजर के बाद जब ढाई महीने बाद शीशे में अपना चेहरा देखा तो लगा कि मर जाती तो बेहतर होता। लेकिन मैं गलत थी। परिवार ने सबसे ज्यादा सपोर्ट किया। इसके बाद हर मोड़ पर लड़ी और जीती। आज अपनी जिंदगी से बहुत खुश हूं। यह दर्द भरी कहानी रोहतक के प्रेम नगर निवासी एसिड अटैक पीड़िता रितू सैनी की है।
विज्ञापन
3 of 13
एसिड अटैक पीड़िता रितू सैनी
रितू सैनी न केवल मौत के मुंह से निकली, बल्कि एसिड अटैक की शिकार दूसरी बेटियों और बहनों को जीने की राह सिखा रही हैं। 26 मई 2011 का वह दिन रितू आज तक नहीं भूली है। सपनों को पूरा करने के लिए वह घर से प्रैक्टिस के लिए निकली थी। रितू जैसे ही प्रेम नगर चौक पर पहुंची तो पहले से ही बाइक पर सवार घात लगाकर बैठे आरोपियों ने उसके चेहरे पर तेजाब फेंक दिया।
4 of 13
एसिड अटैक पीड़िता रितू सैनी
इस घिनौने कृत्य को करवाने वाला रितू के बुआ का बेटा रामनिवास दूर से कार में बैठकर देख रहा था। हालांकि आज मामले में रामनिवास सहित तीन दोषी उम्रकैद और दो दस साल की सजा भुगत रहे है। रितू अप्रैल 2017 में घर आई थी। उसके माता पिता और भाई -बहन यहां रहते हैं। बता दें कि रितू वालीबॉल में राज्य स्तर पर कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी है।
विज्ञापन
5 of 13
एसिड अटैक पीड़िता रितू सैनी
रितू ने बताया कि जिस दिन उस पर अटैक हुआ तो आंखों के सामने अंधेरा छा गया। सब कुछ धुंधला नजर आ रहा था। पहले लगा किसी ने पानी डाल दिया। जब हाथ पर पड़े छींटों की जगह त्वचा झुलसकर काली होने लगी तो घबरा गई। साथ में चल रहे भाई ने रितू से पूछा कि यह क्या हो गया। मगर बहन के 90 प्रतिशत झुलस चुके चेहरे को देखकर भाई के मुंह से एक ही बात निकली। घबरा मत हम तेरे साथ हैं, तू ठीक हो जाएगी।
विज्ञापन
6 of 13
एसिड अटैक पीड़िता रितू सैनी
रितू के अब तक 13 ऑपरेशन हो चुके हैं। दो पीजीआईएमएस रोहतक और 11 दिल्ली के निजी अस्पताल में हुए हैं। यह सिलसिला जारी है। रितू ने बताया कि उसके चेहरे में 90 प्रतिशत रिकवरी हो चुकी है। जबकि शरीर के अन्य हिस्सों में 30 प्रतिशत की रिकवरी हो चुकी है। रितू का कहना है कि उसके इलाज का खर्चा हरियाणा सरकार की तरफ से उठाया जा रहा है।
विज्ञापन
7 of 13
एसिड अटैक पीड़िता रितू सैनी
रितू ने कहा कि वैसे तो अटैक के बाद पूरी जिंदगी बदल जाती है। लेकिन जब इंसान कामयाब हो जाता है तो धीरे-धीरे चीजें ठीक हो जाती हैं। सबसे बड़ी समस्या जब कोई पहली बार पीड़ित को देखता है तो उसका प्रभाव अच्छा नहीं होता। अटैक के बाद पीजीआई से छुट्टी मिलने के बाद रितू घर आ गई। इसके बाद वह स्टॉप एसिड अटैक कैंपेन नामक एनजीओ से जुड़ गई।
8 of 13
एसिड अटैक पीड़िता रितू सैनी
यह एनजीओ देश भर में एसिड अटैक की पीड़िताओं को तलाश कर उनके सपने पूरे करने में मदद करता है। चाहे कोई पढ़ना चाहे या अन्य तैयारी करना चाहता हो। फिलहाल, रितू इसी एनजीओ के सदस्यों के साथ उदयपुर में रह रही है। वह पिछले पांच साल से एनजीओ के साथ काम कर रही हैं। एनजीओ से जुड़ने का भी एक कारण है, जो रितू खुद बताती हैं।
9 of 13
एसिड अटैक पीड़िता रितू सैनी
रितू ने बताया कि अटैक के बाद परिवार ने ही साथ दिया। परिवार के लोग पहले से ज्यादा प्यार करने लगे और हर मुश्किल में साथ खड़े रहे। आज तक समाज से कोई भी ऐसा आदमी सामने नहीं आया जो रितू की मदद करना चाहता हो। इसी वजह से उसके दिल में ऐसी पीड़िताओं के लिए कुछ करने की इच्छा जागी। इसी कारण रितू एनजीओ से जुड़कर अन्य पीड़िताओं को प्ररेणा दे रही है।
10 of 13
एसिड अटैक पीड़िता रितू सैनी
रितू ने बताया कि वारदात के समय तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने मदद शुरू की थी। लेकिन वर्तमान सरकार की तरफ से आज तक पीड़िता को मुआवजा नहीं दिया गया है। जबकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार एसिड पीड़िता को पूरा इलाज मुफ्त और पांच लाख रुपये मुआवजा देने की जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की है। पीड़िता ने प्रदेश की भाजपा सरकार को भी कोसा है।
11 of 13
एसिड अटैक पीड़िता रितू सैनी
रितू का कहना है कि एसिड अटैक के बाद से उसकी पढ़ाई छूट गई। दसवीं कक्षा के बाद स्कूल नहीं जा सकी। सामाजिक व्यवस्था के कारण उसे शहर से बाहर जाकर रहना पड़ा। पीड़िता का कहना है कि सरकार अन्य लोगों को सरकारी नौकरी देती है। यदि एसिड पीड़िता को सरकारी नौकरी दी जाए तो वह भी अपना जीवन सही तरीके से बिता सकती है।
12 of 13
एसिड अटैक पीड़िता रितू सैनी
रितू की हिम्मत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अटैक के बाद भी उसने स्पोर्ट्स में कुछ बनने का सपना नहीं छोड़ा। वह कई बार प्रैक्टिस के लिए गई, लेकिन अटैक के कारण रितू की बाई आंख की रोशनी कम हो गई। इस वजह से वह पीछे खड़े खिलाड़ी को नहीं देख पाती। एक बार उसके चेहरे पर बॉल भी लग गई। बाद में उसने खेल छोड़ दिया। पर वह खेल में कॅरियर बनाना चाहती है।
तेजाब बिक्री के संबंध में रितू का कहना है कि हरियाणा में खुलेआम तेजाब की बिक्री हो रही है। वह नहीं मानती कि इस पर प्रतिबंध लगा है। मैं तो खुद पीड़िता हूं, लेकिन बड़ी आसानी से तेजाब खरीद सकती हूं। रितू का कहना है कि कम से कम मेरे प्रदेश में तो तेजाब की बिक्री पर प्रतिबंध होना चाहिए, ताकि बेटियां और महिलाएं सुरक्षित घर से बाहर निकल सकें।