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बच्चे की चाह में पाक से आया दंपती, 16 माह बाद बेटे संग लौटा, कहा- भारत मां का आशीर्वाद मिला

Thu, 01 Oct 2020 06:30 PM IST
ajay kumar अशोक नीर, अमर उजाला, अमृतसर (पंजाब)
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अपने बेटे के साथ पाकिस्तानी दंपती। - फोटो : अमर उजाला
शादी को कई वर्ष हो चुके थे और कोई औलाद नहीं थी। पाकिस्तान के बड़े-बड़े डॉक्टरों से इलाज करवाया लेकिन गोद सूनी थी। इस कारण पति नरेश चावला मानसिक रूप से परेशान रहते थे। एक दिन घर के बड़े बुजुर्गों ने कहा कि हिंदुस्तान के इंदौर शहर में रहने वाले अपने रिश्तेदारों से क्यों न बात की जाए। 
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पाक रवाना होते लोग। - फोटो : अमर उजाला
जब रिश्तेदारों से पूछा गया कि क्या हिंदुस्तान में ऐसा कोई इलाज है, जिससे गोद हरी हो जाए। इसके बाद इंदौर में रहने वाले रिश्तेदारों ने उन्हें यहां आने को कहा। अब 16 माह बाद बच्चे की किलकारियों के साथ पाकिस्तान लौट रही हूं। ये बातें अटारी बॉर्डर से पाकिस्तान जा रहीं पाकिस्तान के सिंध प्रांत की आशा चावला ने कहीं। आशा और उनके पति नरेश चावला अपने चार माह के बेटे को गोद में उठाए फूले नहीं समा रहे थे, क्योंकि वह जिस उम्मीद से भारत आये थे, वह पूरी हो गई थी।
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- फोटो : अमर उजाला
मई 2019 में जब वह अटारी सड़क सीमा के रास्ते हिंदुस्तान आए, तब वह बेहद अवसाद में थीं। उनका इंदौर में रहने वाले रिश्तेदारों ने एक बड़े अस्पताल में इलाज करवाया। इसके बाद 16 मई, 2020 को अस्पताल में उनके बेटे की किलकारी गूंजी तो लगा कि जहां भर की खुशियां उनकी झोली में आ गई हैं। उन्होंने कहा कि वह भारत सरकार की शुक्रगुजार हैं, जिन्होंने इंदौर के एक रिश्तेदार के घर ठहरने की मंजूरी दी और वीजा अवधि भी बढ़ाई।      

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- फोटो : अमर उजाला
जब उनसे पूछा गया कि बेटे का क्या नाम रखा है, इस पर नरेश चावला ने कहा कि वह सिंधी समाज से हैं। उनके गुरु इंदौर में हैं। बेटे का जन्म कोरोना महामारी के दौरान हुआ है, इसलिए उन्होंने इसका नाम अवतार लाल चावला रखा है। ईश्वर ने उनके परिवार की प्रार्थना को सुन लिया है। परिवार के भाग्य खुल गए हैं। बेटा भारत में जन्मा, इसलिए भारत माता का आशीर्वाद भी उसे मिल गया है। पाकिस्तान में रहने वाले बच्चे के दादा-दादी व नाना-नानी सहित सभी रिश्तेदार बच्चे की पहली झलक पाने को बेताब हैं। यही कारण है कि वह सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर वाघा सीमा पर अवतार का स्वागत करने पहुंचे हुए हैं।     
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- फोटो : अमर उजाला
पारिवारिक सदस्य का इलाज करवाकर जा रहा हूं  
पाकिस्तानी नागरिक सुरेश कुमार का कहना था कि वह अपने पारिवारिक सदस्य का कैंसर का इलाज करवाने फरवरी में हिंदुस्तान आया था। हिंदुस्तान में मेडिकल सुविधाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर की हैं। अब वह ठीक होकर पाकिस्तान लौट रहे हैं। अस्पताल में इलाज के दौरान बहुत सुविधाएं मिलीं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत होने चाहिए। 
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- फोटो : अमर उजाला
इलाज के लिए कई पाकिस्तानी भारत आना चाहते हैं लेकिन वीजा व अन्य कारणों से वह इलाज से वंचित हो रहे हैं। वहीं पाकिस्तान से इलाज करवाने आई एक महिला भानो ने कहा कि वह एक चिकित्सा प्रक्रिया के लिए भारत आई थी और दिल्ली स्थित भाभी के घर रह रही थी। अब वह ठीक होकर पाकिस्तान जा रही है।
 
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- फोटो : अमर उजाला
315 कश्मीरी विद्यार्थी और 100 पाकिस्तानी भी रवाना
कोरोना वायरस के कारण छह माह से भारत में फंसे पेशावर और इस्लामाबाद के विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले लगभग 315 कश्मीरी छात्र बुधवार को अटारी-वाघा सीमा के रास्ते पाकिस्तान रवाना हो गए। साथ ही 100 से अधिक पाकिस्तानी नागरिक भी वतन लौट गए। कश्मीरी छात्रों ने बताया कि भारत सरकार ने 315 कश्मीरी छात्रों को बुधवार को अटारी-वाघा सीमा से पाकिस्तानी जाने की अनुमति दी है। इनमें से अधिकांश छात्र पाकिस्तान में विभिन्न मेडिकल कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में एमबीबीएस कर रहे हैं। 
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- फोटो : अमर उजाला
पिछले एक माह के दौरान यह कश्मीरी छात्रों का दूसरा समूह है, जो अटारी-वाघा सीमा से लाहौर रवाना हुआ है। इससे पहले 10 सितंबर को करीब 350 छात्रों का दल पाकिस्तान लौटा था। पाकिस्तान में मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में कश्मीर के लगभग एक हजार छात्र पढ़ते हैं। सीमा पर तैनात एक अधिकारी अरुण पाल ने कहा कि वापस जाने वाले 100 पाकिस्तानी नागरिकों में से 55 दिल्ली, छत्तीसगढ़ और अन्य स्थानों के अलावा गुजरात से आए थे। अमर उजाला से बातचीत करते हुए श्रीनगर के छात्र फारूक ने कहा कि वह पिछले कुछ माह से कोविड- 19 महामारी के कारण घर में फंसे थे। पाकिस्तान सरकार ने मेडिकल कॉलेजों की कक्षाएं शुरू कर दी हैं, अब वह वापस जा रहे हैं।
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