पाक रवाना होते लोग।
- फोटो : अमर उजाला
जब रिश्तेदारों से पूछा गया कि क्या हिंदुस्तान में ऐसा कोई इलाज है, जिससे गोद हरी हो जाए। इसके बाद इंदौर में रहने वाले रिश्तेदारों ने उन्हें यहां आने को कहा। अब 16 माह बाद बच्चे की किलकारियों के साथ पाकिस्तान लौट रही हूं। ये बातें अटारी बॉर्डर से पाकिस्तान जा रहीं पाकिस्तान के सिंध प्रांत की आशा चावला ने कहीं। आशा और उनके पति नरेश चावला अपने चार माह के बेटे को गोद में उठाए फूले नहीं समा रहे थे, क्योंकि वह जिस उम्मीद से भारत आये थे, वह पूरी हो गई थी।