एक साथ, एक ही गली के चार लोगों की चिताएं जली तो देखने वालों की आखें नम हो गईं। मां की चीख निकल गई कि हे मां चिंतपूर्णी! मेरा शिव लौटा दो...
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अमृतसर में एक साथ जली चार चिताएं
छह साल की पल्लवी और तेरह साल का नितिन पिता शिव कुमार की मौत से अंजान थे। उन्हें यह बताया गया था कि बस एक्सीडेंट में उनके पिता को चोटें आई थी। मौत की खबर दोनों बच्चों और उनकी पत्नी प्रिया (32) से घरवालों ने छुपा ली थी। सच्चाई कौन छिपा सकता है।
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अमृतसर में एक साथ जली चार चिताएं
देर रात जब शिव की देह उनका छोटा भाई सुखदेव राज लेकर घर पहुंचा तो दोनों बच्चे सो रहे थे। प्रिया ने शव देखते ही बेहोश हो गई। होश आई तो बच्चे पूछने लगे कि मम्मी पापा कब आएंग, यह सुन प्रिया सन्न हो गई बस यही बोली कि हे चिंतपूर्णी मां! मेरा शिव लौटा दो।
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अमृतसर में एक साथ जली चार चिताएं
शिव का अंतिम संस्कार शुक्रवार को अन्य तीन मृतकों के साथ हुआ जो बस हादसे में उनके साथ थे। शिव की चिता को उसके छोटे भाई सुखराज ने आग दी।
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accident kangra
शिव नाई का काम करता था। नाइयां वाले मोड़ पर फुटपाथ पर उसने रोजी रोटी का जरिया बना रखा था। शिव यात्रा पर जाने से पहले पल्लवी से वादा करके गया था कि वह जब लौटेगा तब उसके लिए नए कपड़े लेकर देगा। घर की हालात ज्यादा अच्छे नहीं है।
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accident kangra
रोज कमाना रोज खाना शिव की दिनचर्या थी। शिव के चले जाने के बाद प्रिया के कंधे पर दो छोटे बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी आ गई है, प्रिया ज्यादा पढ़ी लिखी भी नहीं है ऐसे में उसके जिंदगी में सकंट कम होते नहीं दिख रहे हैं।
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संतोष रानी (55) एकता नगर छोटा हरीपुरा में रहती थी। मुहल्ले के लोग बताते हैं कि संतोष को हर बात का संतोष था। कहा करती थी कि एकता में बल है। छोटा हरीपुरा में रहती थी हरि की भक्त थी। दिल बड़ा था। संतोष रानी के तीन बेटे हैं। उनके घर में पिछले 24 घंटे से मातम पसरा है। मुहल्ले से ही तीन लाशें आज अंतिम संस्कार के लिए जब उठी तो पूरा इलाका अर्थी के साथ श्री दुर्गयाणा मंदिर स्थित श्मशान घाट पहुंचा।
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स्वर्ण रानी (52) की चिता में आग लगाने से पहले बेटा रवि फफक-फफक कर रो पड़ा। रवि बताता है कि पित सरदारी लाल के निधन के बाद मां को पेंशन मिलती थी। पहली बार वह मां चिंतपूर्णी के दर्शन के लिए गई थी। मां के पास फोन भी था लेकिन वह फोन नहीं मिला। रवि यह बताते रो पड़ा कि मां ने उससे कहा था कि इस बार दर्शन करके जब लौट कर आऊंगी तो महामाई का जगराता करवाएंगे।
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करतार सिंह (42) सिख परिवार से है। आस्था थी तो अपने दोस्तों के साथ वह भी मां दर्शनों के लिए चला गया। सुबह छह बजे मां चिंतपूर्णी में माथा टेकने के बाद बस कांगड़ा के तरफ बढ़ने से पहले करतार सिंह ने अपने परिवार वालों से बात की। बहुत खुश था। करतार के चाचा गुरदीप सिंह कहते हैं कि करतार धार्मिक विचारों का था और हर धर्म का आदर करता था। करतार अपने पीछे बिलखता परिवार छोड़ गया है।
मृतकों की गिनती कितनी कोई नहीं जानता
पिछले 24 घंटे में हरीपुरा के हर घर में आंसू बह रहे हैं। चूल्हे ठंडे पड़े हैं और गलियों में मातम पसरा है। वीरवार-शुक्रवार रात करीब डेढ़ बजे चार मृतकों के शव लेकर परिजन लौटे। यह शव थे शिव कुमार, करतार सिंह, संतोष कुमारी व स्वर्णा रानी के। चारों की चिताएं एक साथ जली। अभी तक घायलों के परिजनों को यह नही पता है कि मृतकों की गिनती कितनी है। शुक्रवार दोपहर 15 लोगों के मरने की चर्चाएं तो रही लेकिन पुष्टि नहीं हुई।