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दुनिया में एक नहीं दो-दो हैं ताजमहल, हूबहू कॉपी बनाने के पीछे का कारण चौंकाने वाला

Fri, 01 Jun 2018 08:09 AM IST
फीचर डेस्क, अमर उजाला
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Taj Mahal
दुनिया के सात अजूबों में ताजमहल का नाम शुमार है। भारत के आगरा में स्थित मोहब्बत की निशानी को देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। लेकिन क्या आपको पता है यह ताजमहल सिर्फ आगरा में नहीं बल्कि दुनिया के एक और देश में भी है। यह बात आपको पढ़कर जितनी अटपटी लगेगी उससे पीछे की कहानी उतनी ही दिलचस्प है।
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Taj Mahal
यह ताजमहल कहीं और नहीं बल्कि भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में स्थित है। जो असली ताजमहल की कॉपी कहा जाता है। हालांकि इसका निर्माण सदियों पहले नहीं बल्कि 10 साल पहले यानी कि साल 2008 में शुरू हुआ था। भारत में स्थित ताजमहल की तरह बनाने में इसे महज 5 साल का वक्त लगा। 
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Taj Mahal
इसका निर्माण बांग्लादेश के अमीर फिल्म निर्माता अहसानुल्लाह मोनी ने 56 मिलियन डॉलर में किया था। हालांकि इसके बनवाने के पीछे की कहानी भी काफी दिलचस्प है। कहा जाता है कि अहसानुल्लाह चाहते थे कि जो लोग पैसो की कमी की वजह से असली ताजमहल को देखने के लिए भारत नहीं जा पाते वो इसका दीदार यही कर लें।

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Taj Mahal
हालांकि कुछ लोग यह वजह जानकर इस हूबहू ताजमहल की दिखने वाली इस नायाब निशानी को गरीबों का ताजमहल भी कहते हैं। इसका साइज और डिजाइन काफी हद तक असली ताजमहल से मिलता है। इसे बनाने के लिए इटली से संगमरमर और ग्रेनाइट मंगवाए गए थे।
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Taj Mahal
इसके साथ ही इसमें हीरे का इस्तेमाल किया गया है। कहा जाता है कि ये हीरे बेल्जियम से मंगाए गए थे वहीं गुंबद को बनाने में 160 किलो पीतल का इस्तेमाल किया गया। पहली नजर देखने में यह ताजमहल असली ताजमहल की कॉपी लगेगा लेकिन इसमें नीले और गुलाबी रंग इसे मोहब्बत की असल निशाने से अलग जरूर करता है। 
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