दिल्ली में कनॉट प्लेस में लगा झंडा सैलानियों और अपने ही देश के, मगर अन्य राज्यों से आए लोगों के आकर्षण का केंद्र सदा ही रहा है। कभी आप टहलते हुए निकलें, तो कई सारे लोगों को उसकी तस्वीर लेते देखेंगे। ऐसा ही आकर्षण का केंद्र है फ्लोरेंस के टसकनी में ऐतिहासिक परिधान त्योहार।
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इस त्योहार में देखने लायक कई चीजें हैं, जो लोगों का ध्यान आकर्षित करती हैं। उन्हीं में से एक है फ्लैग थ्रोइंग या फ्लैग टॉसिंग। इटली के मध्यकालीन पोशाक में कई सारे नौजवान झंडे लेकर एक स्थान पर इकट्ठा होते हैं और झंडे को ऊपर की तरफ उछालते हैं।
स्बनदियरातोरी के रूप में पहचाने जाने वाले कलाकार, मध्यकालीन पोशाक में आमतौर पर ड्रमर (तंबुरी) और कभी-कभी ट्रम्पेट के साथ होते हैं। मध्यकाल में ऐसे समूह को मध्यकालीन मंडली कहा जाता था और इसमें पुरुष ही हिस्सा लेते थे, लेकिन समय के साथ-साथ महिलाओं ने भी इसमें हिस्सा लेना शुरू किया।
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इन कलाकारों का कौशल उत्कृष्ट होता है। इस दौरान युवा प्रतिभागियों को अपने झंडे को उछाल देते हुए एक लहर के साथ पकड़ना होता है। वहीं इस करतब में कुशल कलाकार अद्भुत और सुंदर अभ्यास करते हुए दो झंडों को उछालते हुए और आपस में अदला-बदली करते हुए पकड़ते हैं।
जो बेहद ही मनमोहक दृश्य होता है। इटली में कई साल पहले शुरू हुए फ्लैग टॉस करने की यह परंपरा आज भी कायम है। उस दौरान मंडली के बैनर या ध्वज को पवित्रता का प्रतीक माना जाता था और उसे जमीन पर गिराया या नहीं रखा जाता था। वही प्रथा आज भी इटली में चलन में है।
इस त्योहार में बच्चे भी हिस्सा लेते हैं और अपने पूर्वजों की पोशाक पहनकर फ्लैग थ्रोइंग का करतब दिखाते हैं। ध्वज फेंकने की दो प्रमुख श्रेणियां होती हैं- शास्त्रीय और कलात्मक। शास्त्रीय फ्लैग थ्रोइंग में, मंडली के लोगों को सीधे खड़े होकर अपने झंडे को बाएं से दाईं ओर उछाल कर पकड़ना होता है।
वहीं कलात्मक फ्लैग थ्रोइंग में कलाकार को झंडे को बैठकर या घुटने टेककर अपने दोनों हाथों का इस्तेमाल करते हुए उछालना होता है। इस दौरान ड्रमर्स और ट्रम्पेटर्स मधुर धुनों के साथ उनका प्रोत्साहन करते हैं।