प्रतीकात्मक तस्वीर
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007 नाम वाले कौवे ने जो पहेली हल की, वो कई पायदानों की है और हर कदम पर नई चाल की सोच तलब करती है। इसमें कामयाब होने वाला कौवा कहीं ज्यादा बुद्धिमत्ता होने का परिचय देता है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक डकोटा मैक्कॉय कहती हैं कि ज्ञान कभी-कभी बहुत मजेदार होता है। इससे ऐसे बर्ताव के दरवाजे खुलते हैं, जिसकी हमें अपना अस्तित्व बचाने के लिए जरूरत नहीं होती। जैसे हम अपने मजे के लिए पहेलियां हल करते हैं, ताकि दिमागी कसरत हो जाए। उसी तरह कौवे भी कई बार ऐसी पहेलियां हल कर के मस्ती और दिमागी कसरत करते हैं।
डकोटा मैक्कॉय के मुताबिक कौवों में कुदरती तौर पर जिज्ञासा होती है। वो चुपके से कोई औजार उठा कर उड़ जाते हैं और फिर उससे अपने प्रयोग करते हैं। खास तौर से नौजवान परिंदे ऐसे काम करते देखे गए हैं। ठीक इंसानों की तरह। डकोटा कहती हैं कि, "हमारे पास इतना बड़ा दिमाग होता है। फिर भी हम क्रॉसवर्ड्स सुलझाते हैं। हमारे दिमाग का विकास इसके लिए तो नहीं हुआ था।"
सिर्फ अपने उपयोग के लिए दिमाग का प्रयोग करना ही बुद्धिमत्ता नहीं है। मस्ती के लिए जहन को काम पर लगाने से दिमाग तेज होता है। ये बात इंसानों के साथ-साथ दूसरे जीवों पर भी लागू होती है। तभी तो, कोई कौवा पहेलियां सुलझाता है, तो कोई तोता चुटकुले सुनाता है या आवाजों की नकल करता है। बात अक्लमंदी की आती है, तो इसकी कोई सीमा नहीं है।