Lyudmila Pavlichenko
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'मरे हुए नाजी नुकसान नहीं पहुंचाते'
सेना में रहते हुए उन्होंने ग्रीस और मोलदोवा की लड़ाइयों में हिस्सा लिया। पवलिचेंको ने जल्द ही सेना में खास छवि बना ली। युद्ध के पहले 75 दिनों में ही उन्होंने 187 नाजी सैनिकों को मार गिराया। आज के यूक्रेन के दक्षिण में बसे ओडेसा के युद्ध में खुद को साबित करने के बाद उन्हें सेवास्टोपोल के युद्ध को लड़ने के लिए क्राइमिया भेज दिया गया। (30 अक्टूबर, 1941 से 4 जुलाई 1942)
सेवास्टोपोल के युद्ध में उन्हें कई चोटें आईं, लेकिन उन्होंने तब तक मैदान नहीं छोड़ा, जब तक नाजी आर्मी ने उनकी पोजीशन को बम से उड़ा नहीं दिया और उन्हें चेहरे पर गंभीर चोटें आईं। कई उपलब्धियों के चलते उन्हें लेफ्टिनेंट पद पर पदोन्नति मिली और उन्होंने दूसरे निशानेबाजों को ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया। कुछ दिनों बाद ही उन्हें वॉशिंगटन भेजा गया। अमेरिका की यात्रा के दौरान उन्होंने कहा था, "जिंदा रहने वाला हर जर्मन महिलाओं, बच्चों और बूढ़ों को मार देगा। इसलिए एक नाजी को मारने पर मैं कई जानें बचाती हूं।"