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आखिर स्कूल बसों का रंग पीला ही क्यों होता है? जान लीजिए ये सबसे जरूरी बात

Wed, 21 Aug 2019 02:53 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
स्कूल बस तो आपने देखी ही होगी। वहीं, जो पीले रंग की होती है, लेकिन क्या कभी आपने ये ध्यान दिया है कि स्कूल की बसें आखिर पीले रंग की ही क्यों होती हैं? लाल, हरे या नीले रंग की क्यों नहीं? अगर आप ये बात नहीं जानते हैं तो चलिए हम आपको बता देते हैं कि आखिर ऐसा क्यों है?  

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19वीं सदी की स्कूल गाड़ी - फोटो : Autoevolution.com
स्कूल बस का उपयोग सबसे पहले उत्तरी अमेरिका में 19वीं सदी में किया गया था। चूंकि उस समय मोटर गाड़ियां नहीं होती थीं, इसलिए स्कूल से दूर रह रहे छात्रों को लाने और ले जाने के लिए घोड़ा गाड़ी का इस्तेमाल किया जाता था। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media
हालांकि 20वीं सदी की शुरुआत में स्कूल की गाड़ियों के रूप में घोड़ा गाड़ी की जगह मोटर गाड़ियों का इस्तेमाल होने लगा, जो लकड़ी और धातु की बनी होती थीं और उनपर नारंगी या पीला रंग चढ़ाया जाता था, ताकि वो दूसरी मोटर गाड़ियों से अलग पहचानी जा सके। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media
आपको जानकर हैरानी होगी कि स्कूल बसों को आधिकारिक रूप से पीले रंग से रंगने की शुरुआत साल 1939 में उत्तरी अमेरिका में ही हुई थी। भारत, अमेरिका और कना़डा सहित दुनिया के कई देशों में भी स्कूल की बसें पीले रंग की ही होती हैं। अब यह रंग इन गाड़ियों की पहचान बन चुका है। 
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स्कूल बस - फोटो : अमर उजाला
आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने भी स्कूली बसों को लेकर कई दिशा-निर्देश जारी किए थे, जिसके अनुसार निजी स्कूल बसों का रंग भी पीला ही होना चाहिए। इसके अलावा स्कूल बस के आगे और पीछे 'School Bus' लिखा होना चाहिए और अगर स्कूल बस किराये की है तो उस पर भी 'स्कूल बस ड्यूटी' लिखा होना आवश्यक है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media
सुप्रीम कोर्ट ने अपने दिशा-निर्देश में ये भी कहा था कि स्कूल बसों में फर्स्ट एड बॉक्स (प्राथमिक उपचार पेटी) का होना जरूरी है। इसके अलावा बस की खिड़कियों के बीच में ग्रिल लगी होनी चाहिए और स्कूल से जुड़ी सभी जानकारियां बस में उपलब्ध होनी चाहिए। साथ ही स्कूल बसों में एक अटेंडेंट का होना आवश्यक है और स्कूल बस की अधिकतम रफ्तार 40 किलोमीटर प्रति घंटा होनी चाहिए। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media
नियम के अनुसार, अगर बच्चे 12 साल से छोटे हैं तो स्कूल बसों में 1.5 ज्यादा बच्चों को बैठाया जा सकता है और अगर बच्चा 12 साल से अधिक उम्र का है तो उसे पूरी एक सीट दी जानी चाहिए। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अब आपको हम बताते हैं कि आखिर स्कूल की बसें पीली ही क्यों होती हैं? दरअसल, इसके पीछे कुछ वैज्ञानिक और सुरक्षा कारण हैं। साल 1930 में अमेरिका में हुए एक शोध में इस बात की पुष्टि हुई थी कि पीला रंग बाकी रंगों की तुलना में आंखों को सबसे जल्दी दिखाई देता है और बाकी रंगों के बीच आदमी का ध्यान सबसे पहले पीले रंग पर ही जाता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, बाकी रंगों की तुलना में पीले रंग में 1.24 गुना ज्यादा आकर्षण होता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media
स्कूल की बसों का रंग सुरक्षा की दृष्टि से भी पीला रखा जाता है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि पीला रंग होने की वजह से बस दूर से ही दिख जाती है। साथ ही पीले रंग की बस बारिश हो, रात हो, दिन हो या कोहरा हो, सभी मौसम में आसानी से दिखाई देती है और इसकी वजह से दुर्घटना होने की संभावना बहुत कम होती है।
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