यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने एक बार फिर अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन किया है। इसने मध्य पूर्व की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सैकड़ों किलोमीटर दूर सऊदी अरब के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को बार-बार निशाना बनाया है। साथ ही यमन के भीतर एक महत्वपूर्ण शिपिंग मार्ग के पास इलाके पर कब्जा भी कर लिया है। हूतियों की बढ़ती ताकत क्षेत्रीय शक्तियों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
हैरानी की बात यह है कि बीते एक दशक में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका, ब्रिटेन और इजरायल ने हूतियों की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने के लिए कई हवाई हमले किए, लेकिन तमाम सैन्य अभियानों के बावजूद यह विद्रोही संगठन खत्म होने के बजाय लगातार मजबूत होता जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि सऊदी अरब की सैन्य ताकत को लेकर है। अमेरिकी हथियारों और आधुनिक रक्षा प्रणालियों से लैस होने के बावजूद सऊदी अरब को हूतियों के हालिया हमलों का मुकाबला करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। आइए जानते हैं कि आखिर हूती कौन है?
कौन हैं हूती?
मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन बदल रहा है। इनके बीच हूतियों की बढ़ती सैन्य ताकत अब सिर्फ यमन की समस्या नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए भी एक गंभीर चुनौती साबित हो रही है। हूती यमन के अल्पसंख्यक शिया जैदी समुदाय का एक हथियारबंद समूह है। इस समुदाय ने 1990 के दशक में यह समूह बनाया था। इसका मकसद तत्कालीन राष्ट्रपति अली अब्दुल्लाह सालेह के कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई थी। इसका नाम अभियान के संस्थापक हुसैन अल हूती के नाम पर रखा गया। खुद को हूती अंसार अल्लाह यानी ईश्वर के साथी भी कहते हैं।