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क्या आपने देखा है लड़कियों का रेलवे स्टेशन, जहां रात को घबराने लगती हैं स्टाफ गर्ल

Wed, 14 Feb 2018 04:52 PM IST
फीचर डेस्क, अमर उजाला
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लेडीज स्पेशल बस और ऑटो के बाद अब लेडीज स्पेशल स्टेशन भी आ गया है। यह अच्छी पहल है कि सरकार महिलाओं को आगे बढ़ाने और उन्हें हर चीज में बराबरी का दर्जा दिलाने के लिए हर कदम पर साथ खड़ी है। 

इसके लिए केवल महिलाओं के लिए कुछ चीजें स्पेशल बनाई गई हैं। इसकी बड़ी मिसाल है यह रेलवे स्टेशन। जी हां, हम बात कर रहे हैं देश के पहले वूमेन स्पेशल स्टेशन “माटुंगा” की। इसके बारे में मुंबई में कौन नहीं जानता, लेकिन दूर बैठे कई देशवासियों को अब भी इसकी खबर नहीं होगी। चलिए आज हम आपको सैर करातें हैं इस लेडिज स्पेशल रेलवे स्टेशन की...
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इस स्टेशन की हर तरह से देखभाल केवल महिलाएं ही करती हैं। इस चलते इसका नाम आज लिम्का बुक ऑफ रेकॉर्ड्स 2018 में भी दर्ज हो चुका है। महिलाओं द्वारा संचालित होने वाले इस स्टेशन पर सेंट्रल रेलवे ने 34 महिलाओं की नियुक्ति की है। यह इस बात का सबूत पेश करता है कि सरकार पूरी महिला सशक्तिकरण के लिए ऐसी मुहिम चला रही है।  

आपकी जानकारी के लिए बताना चाहेंगे कि किसी भी स्टेशन के लिए महिलाओं की इतनी बड़ी संख्या में भर्ती होना अपने आप में बहुत बड़ी बात है।
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माटुंगा स्टेशन के लिए महिलाओं की जो टीम बनाई गई है उसमें स्टेशन मैनेजर से लेकर खलासी तक शामिल है। फिर चाहे वो पॉइंट पर्सन, बुकिंग स्टाफ, टिकट चेकर ही क्यों न हो सभी जगह काम महिलाएं ही करती हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक औपचारिक तौर से 12 जुलाई 2017 को इस स्टेशन का कार्यभार इन महिला कर्मियों को सौंपा गया था।

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इस स्टेशन के देखरेख का कार्यभार 41 महिलाओं की टीम कर रही है। यहां की कमान स्टेशन मैनेजर ममता कुलकर्णी के हांथ में है। दिलचस्प बात यह है कि ममता जब 1992 में सेंट्रल रेलवे में आई थीं तब वह खुद भी मुंबई डिविजन में स्टेशन मास्टर बनने वाली पहली महिला थी। यह स्टाफ पिछले 6 महीने से स्टेशन चला रहा है।
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ममता कुलकर्णी नाम के माटुंगा को नई पहचान मिल गई है क्योंकि यह बॉलिवुड की एक एक्ट्रेस का नाम भी रहा है लेकिन यहां काम करने वाली ममता बॉलीवुड की हस्ती नहीं है। इस स्टेशन में अगर सफेद शर्ट-ट्राउजर, बरगंडी कलर की टाई और माथे पर चमकती बिंदी में कोई महिला नजर आए तो समझ जाना कि वही है। 
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महिलाओं की इस टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती है रात को ड्यूटी करना। कई बार खतरनाक हालातों से पाला पड़ा लेकिन इन्होंने उसका भी तोड़ निकला लिया है। अब तो ये टीम पुरुष यात्रियों से भी निपटने में पारंगत हो चुकी है।

रात की ड्यूटी के समय असामाजिक तत्व, नशेबाज लोग कई बार स्टेशन के आसपास घूमते हैं। लेकिन ये महिलाएं प्रशासन की मदद से इन मुश्किलों से भी पार पा ले रही हैं। आपको जानकर शायद हैरानी हो इस टीम में 23 से 53 आयु वर्ष के बीच की कुल 41 महिलाएं हैं।

तो यह है वूमेन स्पेशल स्टेशन जहां का कार्यभार पूरी तरह से महिलाओं ने संभाला है। 
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