टीवी चैनलों पर शिरडी में साई बाबा के प्रकट होने की खबरें दिखाई जा रही हैं जिसमें शिरडी में चमत्कार बताया जा रहा है। यहीं नहीं टीवी स्क्रीन पर वीडियो फुटेज दिखाए जा रहे हैं जिसमें शिरडी में मंदिर की एक दीवार पर धुंधली सी एक आकृति को दिखाया गया है। इसी आकृति को साई बाबा का चमत्कार बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि मंदिर की दीवार पर बाबा ने दर्शन देकर चमत्कार दिखाया है। इसके बाद से शिरडी में बाबा के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी है।
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sai baba
लोग ये चमत्कार अपनी आंखों से देखने के लिए बेताब हैं। जिस दीवार पर यह तस्वीर बनी है उसे चमत्कार की दीवार भी कहा जा रहा है। काले रंग की इस दीवार पर एक धुंधली सी छवी अलग से नजर आ रही है। इस आकृति पर फूलों की माला डाली गई है।
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साईं बाबा मंदिर
बताना चाहेंगे कि साई के जीवन चरित्र पर आधारित पुस्तक में उनके जिंदा रहते 1910 से लेकर 1918 में उनके समाधिस्थ होने तक की जानकारी मिलती है। साई बाबा महाराष्ट्र के पाथरी (पातरी) गांव में 27 सितंबर 1830 को जन्मे थे। साई के जन्म स्थान पाथरी (पातरी) पर एक मंदिर बना है। मंदिर के अंदर साई की आकर्षक मूर्ति रखी हुई है। यह बाबा का निवास स्थान है, जहां पुरानी वस्तुएं जैसे बर्तन, घट्टी और देवी-देवताओं की मूर्तियां रखी हुई हैं।
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shirdi sai baba
बताया जाता है कि आज शिर्डी में जहां सांईं बाबा का भव्य मंदिर बना हुआ है, कभी वहां श्रीकृष्ण का मंदिर बनाने की योजना थी। लेकिन तात्या की जगह बाबा ने अचानक देह त्याग दी। अचानक देह त्याग के बाद भक्तों को समझ नहीं आ रहा था कि अब क्या करें। तब भक्तों ने निर्णय लेकर बूटी साहिब द्वारा बनवाया गया वाड़ा (भवन) में स्थित मूर्ति स्थापना के लिए स्थापित जगह जगह पर बाबा को समाधि दे दी।
बाद में भक्तों ने कभी इस ओर ध्यान नहीं दिया कि इस जगह पर श्रीकृष्ण की मूर्ति स्थापना करने की योजना थी और इसकी आज्ञा स्वयं बाबा ने दी थी। सांईं के समाधि स्थल पर सांईं प्रतिमा का अनावरण बाबा की 36वीं पुण्यतिथि पर 7 अक्टूबर 1954 को किया गया।